नफ़रत की राजनीति का केंद्र बना यूपी: 104 पूर्व IAS अफ़सर

10:36 am Dec 30, 2020 | सत्य ब्यूरो - सत्य हिन्दी

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव और प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार टी. के. ए. नैयर समेत 104 रिटायर्ड आईएएस अफ़सरों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिख कर कहा है कि "राज्य नफ़रत, विभाजन और कट्टरता की राजनीति का केंद्र बन गया है।" 

'सांप्रदायिकता के ज़हर में डूबा प्रशासन'

इन पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार के मुखिया से कहा है कि "कथित लव जिहाद को रोकने के लिए बने अध्यादेश की वजह से गंगा-जमुनी तहजीब के लिए मशहूर प्रदेश में प्रशासनिक संस्थाएं भी सांप्रदायिकता के ज़हर में डूबी हुई हैं।" 

योगी सरकार ने 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिशेध अध्यादेश 2020' बीते महीने यानी 28 नवंबर को जारी किया। इसे ही 'लव जिहाद अध्यादेश' कहा जा रहा है।

क्या है अध्यादेश में?

अध्यादेश में यह प्रावधान है कि किसी व्यक्ति को धर्म बदलने के कम से कम दो महीने पहले स्थानीय प्रशासन को इसकी लिखित जानकारी देनी होगी। इसमें यह व्यवस्था भी है कि विवाह करने के मक़सद से किया गया धर्म परिवर्तन ग़ैर-क़ानूनी माना जाएगा। इसके तहत दंड का भी प्रावधान है। 

इस अध्यादेश के लागू हुए एक महीना हो गया है, अब तक 14 मामले पाए गए हैं, जिनमें 51 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, उनमें से 49 लोगों को जेल हुई है। लेकिन किसी महिला की शिकायत पर पुलिस के हरकत में आने के सिर्फ दो उदाहरण है, बाकी मामलों में महिला के परिवार वालों की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की है।

'जघन्य अत्याचार'

इन रिटायर्ड अफ़सरशाहों ने इस अध्यादेश को पूरी तरह ग़ैर-क़ानूनी बताते हुए उसे तुरंत वापस लेने की माँग की है। इस चिट्ठी में यह भी कहा गया है, 

"आपके प्रशासन ने कई युवा भारतीयों पर जघन्य अत्याचार किए हैं, ये लोग सिर्फ इस देश के आज़ाद नागरिक के रूप में अपने मनपसंद व्यक्ति के साथ रहना चाहते हैं।"


रिटायर्ड आईएएस अफ़सरों की चिट्ठी का अंश

इन लोगों ने मुख्यमंत्री से यह भी कहा है कि "आप लोगों को अपने आप को उस संविधान के बारे में फिर से शिक्षित करना चाहिए आपने जिसकी शपथ ली है।" 

मुरादाबाद

इस पत्र में कई उदाहरण दिए गए हैं। इसमें मुरादाबाद का उदाहरण दिया गया है कि किस तरह बजरंग दल के लोगों ने पुलिस को इस मामले में घसीटा और एक हिन्दू महिला से विवाह करने के मामले में उसके पति को गिरफ़्तार किया गया। 

ख़त में कहा गया है, "इस बात के लिए पुलिस को कभी माफ़ नहीं किया जा सकता कि किस तरह स्वयंभू कार्यकर्ताओं ने निर्दोष जोड़े से पूछताछ की और पुलिस मूक बनी रही, महिला का गर्भपात हो गया, जो शायद उसे परेशान किए जाने की वजह से हुआ।"

बिजनौर

इसमें बिजनौर के मामले के बारे में भी बताया गया कि किशोर-किशोरियों के जोड़े को पकड़ा गया, उन्हें परेशान किया गया और पुलिस थाने में उन पर 'लव जिहाद' का मामला दर्ज कर दिया गया। किशोर को एक सप्ताह तक जेल में रहना पड़ा, उस पर यह आरोप लगा कि उसने 16 साल की हिन्दू लड़की का धर्म बदलवाने की कोशिश की, हालांकि इससे दोनों ने ही इनकार किया। 

इन पूर्व नौकरशाहों ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को लिखी चिट्ठी में कहा है, "क़ानून के प्रति समर्पित होने के बावजूद  लोगों पर इस तरह के अत्याचार जारी हैं, इस धर्म- परिवर्तन निषेध अध्यादेश का इस्तेमाल विशेष रूप से उन लोगों के ख़िलाफ़ किया जा रहा है जो मुसलमान हैं और स्वतंत्रता के अधिकार का प्रयोग करने की ज़ुर्रत करते हैं।" 

उत्तर प्रदेश सरकार के इस अध्यादेश के पीछे उसकी मंशा क्या है, बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष।