वक्फ बिलः सोनिया गांधी ने स्थायी ध्रुवीकरण की चिन्ता क्यों जताई

04:00 pm Apr 03, 2025 | सत्य ब्यूरो

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वक्फ बिल को संविधान पर "खुला हमला" करार देते हुए चेतावनी दी है कि यह देश और समाज में "स्थायी ध्रुवीकरण" को बढ़ावा देगा और संविधान को "कागज तक सीमित" कर देगा। वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को बुधवार रात को लोकसभा में पारित किया गया और गुरुवार को इस पर राज्यसभा में चर्चा हो रही है।

सोनिया गांधी ने 3 अप्रैल को पार्टी की संसदीय दल की बैठक में कहा, "यह बिल BJP की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में रखना है। नरेंद्र मोदी सरकार देश को एक ऐसे रसातल में धकेल रही है, जहाँ संविधान केवल कागज पर रह जाएगा।

    सोनिया गांधी ने कहा, वक्फ बिल को लोकसभा में जबरदस्ती और जल्दबाजी में पारित किया गया है। सोनिया गांधी ने पार्टी सांसदों से कहा कि वे मोदी सरकार की भारत को निगरानी राज्य (surveillance state) में बदलने की मंशा को उजागर करें। इसके अलावा, सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव विधेयक’ संविधान का एक और उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस कानून का भी कड़ा विरोध करती है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। 

    यह बिल मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने और उनके निजी कानूनों व संपत्ति अधिकारों को हड़पने का हथियार है। RSS, BJP और उनके सहयोगियों द्वारा संविधान पर यह हमला आज मुसलमानों पर है, लेकिन भविष्य में अन्य समुदायों को भी निशाना बनाएगा।


    -राहुल गांधी, नेता विपक्ष, 3 अप्रैल 2025 सोर्सः राहुल का एक्स हैंडल

    कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बिल के खिलाफ कानूनी चुनौती देने की बात कही। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने दावा किया कि यह बिल अमेरिकी टैरिफ घोषणा से ध्यान हटाने के लिए लाया गया। उन्होंने कहा, "संसद रात 2 बजे तक चली, और 1:30 बजे अमेरिका ने टैरिफ लगाए। यह बिल पहले से नियोजित था ताकि टैरिफ के मुद्दे से ध्यान हटाया जा सके।" 

    विपक्षी दलों ने इस बिल को "असंवैधानिक" और "मुस्लिम-विरोधी" करार दिया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे "ध्रुवीकरण की चाल" करार दिया और कहा कि यह BJP के लिए "वाटरलू" साबित होगा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, "यह बिल संविधान को कमजोर करने, अल्पसंख्यक समुदायों को बदनाम करने, भारतीय समाज को बाँटने और अल्पसंख्यकों को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास है।" AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर बिल की प्रति फाड़ दी।

    सरकार ने इस बिल का बचाव करते हुए कहा कि यह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता लाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा, "यह बिल संपत्ति की सुरक्षा करेगा। ASI की संपत्ति, जनजातीय भूमि, निजी संपत्ति और गाँव की जमीन को वक्फ में दान नहीं किया जा सकता। यह बिल पारदर्शिता लाएगा।" संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, "अगर यह असंवैधानिक होता, तो सुप्रीम कोर्ट इसे रद्द कर देता। 'संवैधानिक' और 'असंवैधानिक' जैसे शब्दों का हल्के में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।"

      इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक वक्फ बिल पर राज्यसभा में बहस हो रही थी। राज्यसभा में पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। उनके हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा। राज्यसभा में कुल 239 सांसद हैं, और बिल को पास करने के लिए 119 मतों की आवश्यकता है। सत्तारूढ़ NDA के पास 125 सांसदों का समर्थन है, जो बहुमत से 6 अधिक है। विपक्षी गठबंधन INDIA के पास 95 मत हैं, जबकि 16 सांसद (बीजेडी, बीआरएस, AIADMK, और बसपा) अभी अनिर्णीत हैं।