वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024, जिसे बुधवार 2 अप्रैल को लोकसभा में चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया जा रहा है, ने भारतीय राजनीति में एक तीखी बहस को जन्म दिया है। यह विधेयक, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में सुधार लाने का दावा करता है, विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच समर्थन और विरोध की रेखा खींच रहा है।
भाजपा और एनडीए का समर्थन
भाजपा इस विधेयक की सबसे बड़ी समर्थक है और इसे पारित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध दिखाई देती है। पार्टी ने अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को 2 और 3 अप्रैल को संसद में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है। भाजपा का दावा है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता लाएगा। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि यह विधेयक किसी भी धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करता, बल्कि यह उन लोगों को अधिकार देने के लिए है जिन्हें पहले अवसर नहीं मिले।
एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के प्रमुख सहयोगी दलों ने भी इस विधेयक को समर्थन देने का फैसला किया है। इनमें शामिल हैं:
- तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी): 16 सांसदों के साथ, टीडीपी ने विधेयक का समर्थन किया है, हालांकि उसने कुछ संशोधनों की मांग की थी, जो जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) की सिफारिशों में शामिल कर लिए गए हैं।
- जनता दल (यूनाइटेड) (जेडी(यू)): 12 सांसदों वाली यह पार्टी शुरू में कुछ संशोधनों को लेकर चिंतित थी, लेकिन अब वह विधेयक के पक्ष में है।
- लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) (एलजेपी): 5 सांसदों के साथ, चिराग पासवान की अगुवाई वाली यह पार्टी विधेयक का समर्थन कर रही है और इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं मानती।
- शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट): 7 सांसदों वाली यह पार्टी भी एनडीए के साथ खड़ी है।
एनडीए के पास लोकसभा में 293 सांसद हैं, जिसमें भाजपा के 240 सांसद शामिल हैं। यह संख्या विधेयक को पारित करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। राज्यसभा में भी एनडीए के पास 125 सांसदों का समर्थन है, जो इसे ऊपरी सदन में भी मजबूत स्थिति में रखता है।
विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने इस विधेयक का कड़ा विरोध करने का संकल्प लिया है। विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक असंवैधानिक है और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला करता है।
- कांग्रेस: कांग्रेस ने विधेयक को "असंवैधानिक" करार दिया है और अपने सांसदों को 2, 3 और 4 अप्रैल को संसद में मौजूद रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी का आरोप है कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदायों की परंपराओं और संस्थानों को बदनाम करने की कोशिश है।
- समाजवादी पार्टी (एसपी): अखिलेश यादव की अगुवाई वाली एसपी ने विधेयक को खारिज कर दिया है। यादव ने कहा कि भाजपा इस विधेयक के जरिए हर चीज पर नियंत्रण चाहती है और यह मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है।
- ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम): असदुद्दीन ओवैसी ने इसे "संविधान पर सीधा हमला" बताया और एनडीए सहयोगियों से इसके समर्थन के लिए जवाब माँगा।
- राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी): तेजस्वी यादव ने इसे "असंवैधानिक" और "गंगा-जमुनी तहजीब के खिलाफ" करार दिया।
- अन्य दल: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), और वामपंथी दल भी विधेयक के खिलाफ हैं। इंडिया ब्लॉक ने मंगलवार को एक बैठक कर अपनी रणनीति तय की और इसे हराने का संकल्प लिया।
गैर-गठबंधन दलों की स्थिति
कुछ गैर-गठबंधन दलों ने भी विधेयक का विरोध किया है:
शिरोमणि अकाली दल (एसएडी): इसने विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है।
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस): के. कविता ने कहा कि उनकी पार्टी मुस्लिम समुदाय के सशक्तिकरण के लिए काम करती है और विधेयक का विरोध करेगी।
बीजू जनता दल (बीजेडी): इसने विधेयक पर गंभीर चिंताएँ जताई हैं और विपक्ष के विचारों को शामिल करने की माँग की है।
अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके): तमिलनाडु की यह विपक्षी पार्टी भी विधेयक के खिलाफ है।
संख्याबल महत्वपूर्ण
लोकसभा में 543 सीटों में से वर्तमान में 542 सांसद हैं। एनडीए के पास 293 सांसदों का बहुमत है, जो विधेयक को पारित करने के लिए पर्याप्त है। राज्यसभा में भी 125 सांसदों के साथ एनडीए मजबूत स्थिति में है। विपक्ष के पास एकजुटता के बावजूद संख्याबल में कमी है, जिसके कारण विधेयक को रोकना मुश्किल हो सकता है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों का स्पष्ट समर्थन है, जबकि इंडिया ब्लॉक और कुछ गैर-गठबंधन दल इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। संख्याबल एनडीए के पक्ष में होने के कारण विधेयक के पारित होने की संभावना प्रबल है। हालांकि, विपक्ष इसे असंवैधानिक और विभाजनकारी करार देकर जनता के बीच अपनी बात रखने की कोशिश कर रहा है। यह विधेयक न केवल संसद में बल्कि देश की राजनीति में ध्रुवीकरण को बढ़ाएगा।
रिपोर्ट और संपादनः यूसुफ किरमानी