दशकों पुराने विवाद से असम-मिज़ोरम के बीच हुई हिंसक झड़प

07:09 am Oct 20, 2020 | दिनकर कुमार - सत्य हिन्दी

उत्तर-पूर्व के राज्यों के बीच सीमा निर्धारण में बरती गई लापरवाही और परस्पर संवादहीनता के चलते अक्सर सीमा पर हिंसक झड़पों की घटनाएँ होती रहती हैं। ताज़ा मामला असम और मिज़ोरम के सीमावर्ती इलाक़े में सामने आया है। असम-मिज़ोरम के दो समूहों के बीच हिंसक झड़पों के बाद दोनों राज्यों की सीमा पर तनाव व्याप्त हो गया और कई लोग घायल हो गए। ख़बरों के मुताबिक़, असम के कछार ज़िले के लायलपुर इलाक़े में शनिवार शाम असम और मिज़ोरम के दो समूहों के बीच झड़प के दौरान कई लोग घायल हो गए। इस महीने दोनों राज्यों के निवासियों के बीच यह दूसरा ऐसा विवाद है।

अधिकारियों ने रविवार को कहा, कोविड -19 की स्थिति के बीच मिज़ोरम ने असम और त्रिपुरा के साथ अपने दशकों पुराने सीमा विवादों से जूझते हुए मसले को स्थायी रूप से हल करने के लिए केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की माँग की है।

मिज़ोरम होमगार्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया, ‘कभी-कभी मिज़ोरम, असम और त्रिपुरा के साथ अंतरराज्यीय  सीमाओं पर भयावह तनाव और घटनाक्रम हो रहे हैं। ऐसे उदाहरण हैं कि सरकारी अधिकारी भी इन अप्रिय घटनाओं का समर्थन कर रहे हैं।’

नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि मिज़ोरम सरकार ने अंतरराज्यीय सीमा विवादों को हल करने के लिए पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारतीय सर्वेक्षण से संपर्क किया था। मिज़ोरम की असम के साथ 123 किलोमीटर, त्रिपुरा के साथ 109 किलोमीटर और मणिपुर के साथ 95 किलोमीटर की सीमाएँ हैं।

1995 के बाद से मिज़ोरम और असम सरकारों के अधिकारियों के बीच अनिर्णायक बैठकों के कई दौर लंबे समय से जारी विवाद को सुलझाने के लिए आयोजित किए गए हैं। मिज़ोरम के तीन ज़िले - कोलासिब, आइजोल और ममित - दक्षिणी असम के कछार, हैलाकांडी और करीमगंज ज़िलों के साथ 123 किमी की सीमा साझा करते हैं।

अंतरराज्यीय सीमा के लैलापुर इलाक़े के पास उपद्रवियों ने कई घरों में आग लगा दी। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने अब कहा है कि असम-मिज़ोरम सीमा पर समग्र स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा कर्मियों को असम के कछार ज़िले और मिज़ोरम के कोलासिब ज़िले के अंतर्गत सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

मिज़ोरम और असम के बीच 164.6 किलोमीटर लंबी सीमा है। सीमा विवाद को हल करने के लिए 1995 से आयोजित की गई बैठकों के परिणाम ख़ास नहीं रहे हैं। सीमा पर दोनों राज्यों के बीच अक्सर झड़प होती है और विवाद पैदा होता रहता है।

ताज़ा घटना वैरेंगते से लगभग 3 किमी दूर, साईहापुई 'वी' गाँव के पास अंतरराज्यीय सीमा की रक्षा करने वाले स्थानीय स्वयंसेवकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक अस्थायी झोपड़ी के विध्वंस का नतीजा हो सकती है। स्वयंसेवक कोविड -19 महामारी के मद्देनज़र लोगों की आवाजाही की जाँच करने के लिए सीमा पर पहरा दे रहे हैं। मिज़ोरम के एमएनएफ़ विधायक लाल्रिंटलुंगा सेलो, जो वैरेंगते में डेरा डाले हुए हैं, ने कहा कि उनके राज्य की असम या उसके लोगों से दुश्मनी नहीं है, लेकिन वे अवैध रूप से बांग्लादेशी आप्रवासियों द्वारा घुसपैठ से अपने क्षेत्र की रक्षा कर रहे हैं, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में रह रहे हैं।

कोलासिब ज़िले में वैरेंगते मिज़ोरम के उत्तरी किनारे पर है, जिसके माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग 306 (पूर्व में 54) गुजरता है, जो राज्य को असम से जोड़ता है। असम का निकटतम गाँव लैलापुर है, जो कछार ज़िले में है।

कहाँ भड़की हिंसा

बड़ी संख्या में वैरेंगते के निवासी तब इकट्ठे हुए जब असम के कुछ लोगों ने लाठी और कटारी से लैस होकर शनिवार शाम सीमावर्ती गाँव के बाहरी इलाक़े में ऑटो-रिक्शा स्टैंड के पास एक समूह पर पथराव किया। वैरेंगते की विक्षिप्त भीड़ ने प्रतिशोधी क़दम उठाते हुए लैलापुर के निवासियों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बनाए गए लगभग 20 अस्थायी बाँस की झोपड़ियों और स्टॉलों में आग लगा दी।

अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि दोनों राज्यों ने अब भारतीय रिज़र्व बटालियन के उन सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है, जो मिज़ोरम में वैरेंगते गाँव और असम के लैलापुर के निकट हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं।

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को फ़ोन पर असम-मिज़ोरम सीमा पर मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। सर्बानंद सोनोवाल ने मिज़ोरम के मुख्यमंत्री जोरामथांगा से फ़ोन पर बात की और सीमा की झड़प पर चर्चा की। मिज़ोरम के सीएम के साथ बातचीत के दौरान सर्बानंद सोनोवाल ने सीमा मुद्दों के समाधान के लिए संयुक्त प्रयासों पर ज़ोर दिया। उन्होंने सीमा विवाद को शांत करने और अंतरराज्यीय सीमा पर शांति और क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सहयोग के साथ काम करने की बात कही।

सोनोवाल ने ट्विटर पर कहा,

‘असम-मिज़ोरम सीमा पर हुई घटना के बारे में मिज़ोरम के मुख्यमंत्री श्री जोरामथांगा से फ़ोन पर बात हुई। हम क्षेत्र की क़ानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए सहमत हुए ताकि शांति तुरंत बहाल हो सके। हम दोनों राज्यों के बीच भाईचारा बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लेते हैं।’

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा,

मतभेद हो सकते हैं लेकिन सभी मतभेदों को बातचीत के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए।


सर्बानंद सोनोवाल

मिज़ोरम के सीएम जोरमथांगा ने सर्बानंद सोनोवाल को मामले की जाँच करने और अंतरराज्यीय सीमा पर शांति बनाए रखने और सहयोग से काम करने का आश्वासन दिया। इस बीच असम के वन मंत्री परिमल शुक्लबैद्य ने रविवार को लायलपुर क्षेत्र का दौरा किया और स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

मिज़ोरम सरकार की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क करने के अलावा राज्य की सीमा पर मौजूदा मुद्दों को हल करने के लिए असम सरकार के साथ सक्रिय रूप से बातचीत की जा रही है।

बयान में कहा गया है, ‘प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों के आशंकित निवासियों को सुरक्षा की भावना प्रदान करने और किसी अन्य अप्रिय घटना को रोकने के लिए इन क्षेत्रों में सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है।’ बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा की अध्यक्षता में एक कैबिनेट बैठक का आयोजन कर इस मसले पर विचार किया गया है।

बयान में कहा गया कि मंत्रिमंडल ने असम के कछार और करीमगंज ज़िलों के अधिकारियों द्वारा राज्य के तीन स्थानों - थिंगहलुन, सहापुई 'वी' और वैरेंगते में ‘सार्वजनिक शांति और सौहार्द बिगाड़ने के’ एकतरफ़ा और उत्तेजक कृत्यों पर ख़ेद व्यक्त किया। असम सरकार इन क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए तत्काल उपाय करेगी।

विज्ञप्ति के अनुसार मिज़ोरम में असम द्वारा आयोजित सड़क नाकाबंदी के कारण आवश्यक वस्तुओं का प्रवेश नहीं हो पा रहा है और अन्य पड़ोसी राज्यों के माध्यम से एलपीजी और ईंधन की आपूर्ति जैसी आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त करने के प्रयास चल रहे हैं। मिज़ोरम सरकार ने लोगों से असुविधा को सहन करने और जमाखोरी से बचने की अपील की ताकि आवश्यक वस्तुओं का समान वितरण हो।

एक अन्य घटनाक्रम में मिज़ोरम के गृह सचिव लालबिक्सांगी ने अपने त्रिपुरा समकक्ष बरुण कुमार साहू को एक पत्र में कहा कि सर्वे ऑफ़ इंडिया से त्रिपुरा और मिज़ोरम के साथ अंतरराज्यीय सीमा मुद्दे को जल्द से जल्द हल करने के लिए संयुक्त स्पॉट सत्यापन की सुविधा देने का अनुरोध किया गया है।

9 अक्टूबर के पत्र में कहा गया है कि मिज़ोरम सरकार को रिपोर्ट मिली है कि त्रिपुरा के सोंग्रॉन्गमा, एक स्थानीय संगठन, फगडुंगसी के पास ‘विवादित अंतरराज्यीय सीमावर्ती गांव’ में एक ‘मंदिर’ बनाने की कोशिश कर रहा है और पत्र ने दावा किया है कि यह क्षेत्र ममित ज़िले के अंतर्गत आता है।

मिज़ोरम के गृह सचिव के पत्र की एक प्रति केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई थी। त्रिपुरा सरकार के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस बीच त्रिपुरा-मिज़ोरम सीमा पर स्थित फुलडुंगसी के 130 ग्रामीणों को दोनों राज्यों की चुनावी सूची में नामांकित और विभिन्न सेवाओं और लाभों से आकर्षित करने की सूचना मिलने के बाद त्रिपुरा सरकार द्वारा एक आधिकारिक जाँच जारी है।

उत्तरी त्रिपुरा ज़िले के एक अधिकारी ने कहा कि इन 130 फुलडुंगसी निवासियों के नाम हाल ही में मिज़ोरम ग्राम परिषद चुनावों से पहले मतदाता सूची में दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया, हालाँकि इन लोगों को कई वर्षों तक त्रिपुरा में मतदाता के रूप में नामांकित किया गया था।

त्रिपुरा के राजस्व और मत्स्य मंत्री नरेंद्र चंद्र देबबर्मा ने बताया कि उन्होंने राजस्व और वित्त सचिव तनुश्री देबबर्मा को मामले की जाँच करने और जल्द से जल्द एक रिपोर्ट देने को कहा है।