प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 अप्रैल को प्रस्तावित वाराणसी दौरे से पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पीएम की जनसभा के लिए रास्ता बनाने के चक्कर में जिला प्रशासन ने एक किसान की खड़ी टमाटर की फसल पर जेसीबी (बुलडोजर) चलवा दी, जिससे किसान को भारी नुकसान हुआ है। इस घटना ने स्थानीय लोगों और किसानों में आक्रोश पैदा कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी की जनसभा के लिए वाराणसी के एक इलाके में जगह तैयार की जा रही थी। इसके लिए प्रशासन को जनसभा स्थल तक पहुंचने के लिए रास्ता बनाना जरूरी था। इस प्रक्रिया में एक महिला किसान की टमाटर की फसल प्रभावित हुई। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने किसान को पहले सूचित किया और पीएम के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। इसके बाद किसान ने अपनी कच्ची फसल को खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया था, ताकि नुकसान को कम किया जा सके। हालांकि, इसके बावजूद प्रशासन ने बिना किसी देरी के फसल पर जेसीबी चला दी, जिससे पूरी फसल बर्बाद हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब जेसीबी मशीनें रास्ता बनाने के लिए खेत में उतारी गईं। किसान का आरोप है कि उनकी लाखों रुपये की फसल को बिना किसी ठोस कारण या पर्याप्त सूचना के नष्ट कर दिया गया। पीड़ित किसान ने कहा, "हमने पहले ही अपनी फसल तोड़ना शुरू कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने हमारी बात नहीं सुनी और जेसीबी चला दी। यह हमारी मेहनत और आजीविका का अपमान है।"
घटना के बाद प्रशासन की ओर से सफाई दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि पीएम के दौरे के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर यह कदम उठाना जरूरी था। एक अधिकारी ने बताया, "हमें जनसभा स्थल तक पहुंचने के लिए रास्ता बनाना था। किसान को पहले ही सूचित कर दिया गया था और उन्हें मुआवजे का आश्वासन भी दिया गया है।" लेखपालों ने अब दावा किया है कि प्रभावित किसान को उचित मुआवजा दिया जाएगा, जिसके लिए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
इस घटना ने स्थानीय किसानों के बीच गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। कई लोगों का कहना है कि प्रशासन ने किसानों की मेहनत को तवज्जो नहीं दी और जल्दबाजी में यह कदम उठाया। एक स्थानीय किसान ने कहा, "हमारी फसल हमारी जिंदगी है। इसे ऐसे बर्बाद करना ठीक नहीं है। अगर मुआवजा भी मिलेगा, तो क्या वह हमारी मेहनत और समय की भरपाई कर पाएगा?"
इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा है। कुछ नेताओं ने इसे "किसान विरोधी" कदम करार देते हुए कहा कि यह सरकार की नीतियों का असली चेहरा दिखाता है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है, जहां लोग प्रशासन और सरकार की आलोचना कर रहे हैं।
फिलहाल, प्रशासन ने मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया है, लेकिन किसान का कहना है कि उन्हें अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। इस घटना ने एक बार फिर किसानों के हितों और सरकारी योजनाओं के बीच टकराव को उजागर किया है। पीएम मोदी का दौरा जहां वाराणसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं इस घटना ने स्थानीय स्तर पर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।