क्या नीतीश कुमार वक्फ बिल पर समर्थन देकर फँस गए हैं? वक्फ संशोधन विधेयक को संसद में समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय जनता दल ने नीतीश पर तीखा हमला बोला है। राजद ने सोशल मीडिया पर नीतीश की एक फोटोशॉप की गई तस्वीर साझा की, जिसमें उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पारंपरिक वर्दी सफेद शर्ट और खाकी शॉर्ट्स में दिखाया गया है।
यह हमला नीतीश की सेक्युलर छवि पर सवाल उठाने और उनके वक्फ बिल समर्थन को बीजेपी और आरएसएस के एजेंडे से जोड़ने की कोशिश है। आरजेडी ने इसको लेकर एक फोटोशॉप की हुई तस्वीर साझा करते हुए इसका कैप्शन दिया, 'आरएसएस सर्टिफाइड मुख्यमंत्री चीटीश कुमार'।
इसके अलावा एक बड़ा पोस्टर आरजेडी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के घर के बाहर भी लगाया गया है। आरजेडी नेता आरिफ़ जिलानी ने पोस्टर में नीतीश को आरएसएस की खाकी पैंट और ब्लैक टोपी में दिखाया है। पोस्टर पर ही एक अन्य तस्वीर में नीतीश मुस्लिम वेश-भूषा में हैं। इसी में उनकी एक और अलग तरह की तस्वीर दिखाई गई है।
इन तस्वीरों के साथ पोस्टर पर लिखा है, 'गिरगिट रंग बदलता था। ये तो उससे भी ज़्यादा स्पीड से रंग बदलने वाले निकले।' इसमें आगे लिखा गया है, 'इफ्तार देकर ठगने वाले, ईद में टोपी पहनकर टोपी पहनाने वाले, वक्फ पर धोखा दिया, एनआरसी पर भी वही किया...।'
नीतीश को लेकर बड़ा पोस्टर लगाया गया है।
आरजेडी का यह हमला तब आया है जब वक्फ संशोधन विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराने में नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड ने इसका समर्थन किया। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ाने का दावा करता है, लेकिन विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों पर हमला मानता है। लंबे समय से बिहार में मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के वोटबैंक पर निर्भर रहने वाले नीतीश का इस बिल को समर्थन देना उनके लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। जेडीयू के दो मुस्लिम नेताओं, डॉ. मोहम्मद कासिम अंसारी और मोहम्मद नवाज मलिक ने इसके विरोध में इस्तीफा दे दिया, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष साफ़ झलक रहा है।
राजद का नीतीश को 'चीटीश कुमार' कहना और उन्हें आरएसएस की वर्दी में दिखाना एक सोची-समझी राजनीतिक चाल है। बिहार में मुस्लिम आबादी क़रीब 17% है, और यह समुदाय पारंपरिक रूप से जेडीयू और राजद दोनों के लिए अहम वोटबैंक रहा है।
वक्फ बिल के समर्थन से नीतीश की सेक्युलर छवि को नुक़सान पहुंचने की संभावना को भुनाने की कोशिश में राजद ने यह हमला बोला है। तस्वीर और 'चीटीश' शब्द नीतीश को 'Cheat' से जोड़कर उनपर विश्वासघात का आरोप लगाता है। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या यह हमला नीतीश को कमजोर कर पाएगा?
नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में बिहार में एक सेक्युलर और विकासोन्मुखी नेता की छवि बनाई है। मुस्लिम समुदाय के बीच उनकी स्वीकार्यता का एक कारण उनकी इफ्तार पार्टियां और अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएं रही हैं। लेकिन वक्फ बिल का समर्थन और बीजेपी के साथ गठबंधन ने इस छवि को धूमिल किया है। राजद का यह तंज ठीक इसी कमजोरी पर निशाना साधता है। हालांकि, नीतीश का तर्क है कि उन्होंने विधेयक का समर्थन जेपीसी की सिफारिशों के बाद और रेट्रोस्पेक्टिव प्रभाव को हटाने की शर्त पर किया था। जेडीयू नेता संजय झा ने कहा, 'नीतीश जी ने मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत काम किया है। हमारा समर्थन सुधार के लिए था, न कि किसी के खिलाफ।'
यहां असली सवाल यह है कि इस पूरे घटनाक्रम से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा। बीजेपी के लिए वक्फ बिल उसकी हिंदुत्व नीति का हिस्सा है, जो हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण में मदद कर सकता है। नीतीश का समर्थन बीजेपी को यह संदेश देने में मदद करता है कि यह विधेयक सिर्फ एक धार्मिक एजेंडा नहीं, बल्कि सुधार का कदम है। लेकिन नीतीश के लिए यह समर्थन उनके मुस्लिम वोटबैंक को नाराज कर सकता है, जिसे राजद अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि नीतीश यह जोखिम इसलिए ले रहे हैं क्योंकि उनकी प्राथमिकता बीजेपी के साथ गठबंधन को मजबूत रखना है, ताकि 2025 के विधानसभा चुनावों में उनकी सत्ता बरकरार रहे।
राजद का यह हमला भले ही सतही तौर पर प्रभावी लगे, लेकिन यह नीतीश की रणनीति को पूरी तरह कमजोर नहीं कर सकता। नीतीश का लंबा राजनीतिक अनुभव और बिहार की जटिल जातिगत-धार्मिक गणित को संभालने की उनकी क्षमता उन्हें एक मज़बूत खिलाड़ी बनाती है।
नीतीश कुमार का वक्फ बिल को समर्थन देने की घटना नीतीश की सेक्युलर छवि पर सवाल तो उठाती है, लेकिन उनकी राजनीतिक चतुराई को कम करके नहीं आंका जा सकता। बिहार के आगामी चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नीतीश इस विवाद से उबर पाते हैं, या राजद की यह आलोचना उनकी सत्ता को सचमुच चुनौती दे पाती है।