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असली शिवसेना कौन? चुनाव आयोग की कार्यवाही को SC में चुनौती

असली शिवसेना कौन? चुनाव आयोग की कार्यवाही को SC में चुनौती

शिवसेना पर किसका हक है? एकनाथ शिंदे खेमे का या फिर उद्धव ठाकरे खेमे का? जानिए चुनाव आयोग ने क्या कहा है और इसके ख़िलाफ़ उद्धव खेमा सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुँचा है?

उद्धव ठाकरे गुट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर चुनाव आयोग की उस कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की है जिसमें यह तय किए जाने की बात है कि असली शिवसेना कौन है। 'असली शिवसेना' को लेकर चल रही खींचतान चुनाव आयोग तक पहुँच गई है। उद्धव गुट और शिंदे गुट दोनों पार्टी पर दावा कर रहे हैं।

दरअसल, चुनाव आयोग के समक्ष चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के तहत कार्यवाही शुरू की गई थी। ठाकरे खेमे ने अपनी पिछली याचिका में एक आवेदन दायर कर एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने के लिए आमंत्रित करने के राज्यपाल के फ़ैसले को चुनौती दी थी।

उद्धव खेमे ने अपनी याचिका में कहा कि जब तक विधायकों की अयोग्यता का पहलू पहले तय नहीं हो जाता, तब तक चुनाव आयोग यह तय नहीं कर सकता कि असली शिवसेना कौन है। याचिका में कहा गया है कि यदि ईसीआई को 22 जुलाई को उसके द्वारा शुरू की गई कार्यवाही के साथ आगे बढ़ने की अनुमति दी जाती है तो इस न्यायालय के समक्ष लंबित बड़े संवैधानिक मुद्दों को बढ़ाएगा।

उद्धव ठाकरे खेमा ने निर्देश जारी करने के लिए कहा कि चुनाव आयोग को इस स्तर पर मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।

वरिष्ठ वकील राजेश इनामदार, हर्ष पांडे और अनीश शाह द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि ईसीआई के समक्ष इस तरह की कार्यवाही भी तय क़ानून के तहत होनी है और एक मामले की जाँच जो न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप के बराबर है और इस तरह यह अदालत की अवमानना के बराबर है।

याचिका में कहा गया है कि शिंदे गुट हताशा में और किसी तरह बहुमत दिखाने के लिए संगठन में अवैध रूप से संख्या बढ़ाने और दिखावटी बहुमत बनाने की कोशिश कर रहा है। 

इससे पहले चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे दोनों को यह साबित करने के लिए दस्तावेजी सबूत पेश करने के लिए कहा था कि उनके पास शिवसेना में बहुमत के सदस्य हैं।

दोनों गुटों को 8 अगस्त की दोपहर 1 बजे तक जवाब देने को कहा गया है। इसके बाद चुनाव आयोग शिवसेना के दोनों गुटों के दावों और विवादों को लेकर सुनवाई करेगा।

बता दें कि चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को भेजे गए नोटिस में कहा है कि शिवसेना में विभाजन हुआ है और एक गुट का नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व उद्धव ठाकरे। नोटिस में कहा गया है कि दोनों ही गुट उनकी शिवसेना के असली होने और पार्टी के प्रमुख होने का दावा करते हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि उसे इस संबंध में दस्तावेजी सबूत और लिखित बयान मिलने के बाद ही आगे का फैसला होगा। 

एकनाथ शिंदे के गुट ने महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर के सामने दी गई अर्जी में कहा था कि वह उद्धव ठाकरे गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित कर दें। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि 11 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान स्पीकर राहुल नार्वेकर से कहा था कि वह विधायकों की अयोग्यता के संबंध में अभी कोई फैसला ना लें। 

एकनाथ शिंदे और उनके समर्थक विधायकों की बगावत के बाद शिवसेना पर किसका हक है, आज की तारीख़ में यह सवाल महाराष्ट्र की सियासत में सबसे चर्चित है। बड़ी संख्या में विधायक, पार्षद और सांसद भी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ आगे आए हैं। 

बीते दिनों में एकनाथ शिंदे गुट ने पुरानी राष्ट्रीय कार्यकारिणी को खत्म कर नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी चुनी और एकनाथ शिंदे को इसका नेता बनाया गया। बहरहाल, यह तय तो सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद ही होगा।

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