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झारखंड: 'जय श्री राम' के नारे लगाती भीड़ ने मुसलिम युवकों को पीटा

झारखंड: 'जय श्री राम' के नारे लगाती भीड़ ने मुसलिम युवकों को पीटा

रांची में हिंदुवादी नारे लगा रही भीड़ ने आख़िर पिज्जा लेने गए दो मुसलिम युवकों को क्यों पीटा? जानिए, किन हालातों में उन पर हमला हुआ।

झारखंड की राजधानी राँची में दो मुसलिम युवकों की पिटाई किए जाने का मामला सामने आया है। युवकों का आरोप है कि 'जय श्री राम' के नारे लगाती हुई भीड़ ने उनके साथ मारपीट की जिससे दोनों के सिर में गंभीर चोटें आईं। आरोपियों के परिजनों ने राँची के चुटिया थाने में शिकायत दी है।

यह घटना उसी राँची में हुई जहाँ बीजेपी नेताओं की पैगंबर मोहम्मद साहब पर टिप्पणी को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था और जिस हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई थी। यह घटना 11 नवंबर को दिन में हुई थी और मुसलिम युवकों की पिटाई का मामला भी 11 नवंबर को ही हुआ था, लेकिन रात में।

एक रिपोर्ट के अनुसार 11 जून की रात 8 बजे 24 वर्षीय जीशन और 21 वर्षीय फैजान रांची के सुजाता चौक के पास के डोमिनोज से पिज्जा लेने गए थे। जब वे अपने ऑर्डर लिए जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे तभी एक हिंदुत्ववादी भीड़ वहाँ पहुँची। द वायर की रिपोर्ट के अनुसार जीशन ने कहा, 'जब हम पहुँचे ही थे तो वे 'जय श्री राम' जैसे कुछ नारे लगा रहे थे, लेकिन जब उन्होंने हमें देखा तो वे चिल्लाने लगे कि 'उनका पीछा करो, उनका पीछा करो'।

रिपोर्ट के अनुसार जीशन ने कहा, 'वहाँ कम से कम 30 लोग थे, शायद अधिक, और वे हथियार लिए हुए थे। हमें देखते ही उन्होंने हमें घेर लिया और हमसे हमारा नाम पूछने लगे और फिर उन्होंने हमें पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने मेरे भाई को कई बार मारा जब तक कि उसका सिर फट नहीं गया। खून बहता दिखा तो वे दौड़ पड़े। मेरा भी बहुत ख़ून बह रहा था, इसलिए हम भी भाग खड़े हुए... बाद में हमें सदर अस्पताल ले जाया गया।'

जीशन के चाचा नसीम अख्तर ने चुटिया पुलिस स्टेशन में थाना प्रभारी को शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया कि उनके भतीजे की जान पर 30-40 अज्ञात व्यक्तियों द्वारा हमला किया गया था, जबकि वह सुजाता सिनेमा परिसर में डोमिनोज में पिज्जा के लिए बाहर गए थे।

उसी दिन इकरा चौक पर नमाज के बाद बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया था। पुलिस की कड़ी कार्रवाई के साथ, सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में दिखता है कि कैसे पथराव की ख़बरों के बीच भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। उस दौरान दो लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल भी हो गए।

रिपोर्ट के अनुसार जीशन और फैजान ने दावा किया है कि दोनों उस दिन शाम को हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं थे। फिर भी उन्हें निशाना बनाया गया।

जीशन का कहना है कि अस्पताल में टाँके लगने के बाद वे घर लौट आए। उनका कहना है कि उनकी स्कूटी अभी भी थाने में है, जहां उन्हें लेने के लिए बुलाया गया है। 

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