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महाराष्ट्र: मुंडे मंत्री नहीं बनीं तो बीजेपी के क़रीब 50 पदाधिकारियों का इस्तीफ़ा

महाराष्ट्र: मुंडे मंत्री नहीं बनीं तो बीजेपी के क़रीब 50 पदाधिकारियों का इस्तीफ़ा

केंद्रीय मंत्रिमंडल में औरंगाबाद के डॉ. भागवत कराड को जगह मिलने से गोपीनाथ मुंडे की पुत्री सांसद प्रीतम मुंडे के खेमे में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। मुंडे समर्थक पार्टी पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफ़ा देना शुरू कर दिया है। 

केंद्र सरकार ने अपनी छवि सुधारने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े पैमाने पर बदलाव तो कर लिए लेकिन महाराष्ट्र में इस बदलाव को लेकर अलग तस्वीर नज़र आ रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में औरंगाबाद के डॉ. भागवत कराड को जगह मिलने से गोपीनाथ मुंडे की पुत्री सांसद प्रीतम मुंडे के खेमे में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। मुंडे समर्थक पार्टी पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफ़ा देना शुरू कर दिया है। दर्जनों बीजेपी पदाधिकारियों, ज़िला परिषद सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों, नगरसेवकों और पदाधिकारियों ने अपने इस्तीफ़े पार्टी के बीड ज़िलाध्यक्ष को सौंप दिए हैं। यह नाराज़गी किस हद तक जाएगी, यह अभी कहा नहीं जा सकता, लेकिन एक बात तो साफ़ है कि पिछले दो साल से महाराष्ट्र बीजेपी में पंकजा मुंडे की वजह से उपजी कलह एक बार फिर से भड़क सकती है। अब देखना है कि इस मामले में पंकजा मुंडे क्या रणनीति अपनाती हैं?

क्या पंकजा मुंडे फिर से कोई विरोध प्रदर्शन करने वाली हैं? दरअसल डॉ. कराड भी बंजारा समाज से आते हैं। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता जाने के बाद से पंकजा मुंडे ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कई बार निशाने पर लिया था। फडणवीस और पार्टी की कार्य शैली पर बयानबाज़ी के चलते भाजपा ने उन्हीं के समाज के डॉ. कराड को जब राज्यसभा सदस्य के लिए चुना था उसी समय यह कहा जाने लगा था कि यह कार्रवाई पंकजा मुंडे या मुंडे परिवार का कद या प्रभाव कम करने के उद्देश्य से की गयी है। 

पार्टी में अपनी आवाज़ कमजोर होते देख पंकजा मुंडे ने अपने पिता गोपीनाथ मुंडे द्वारा बनायी गयी एक संस्था के माध्यम से अपनी नयी पारी शुरू करने की घोषणा भी की थी। लेकिन कुछ महीनों बाद उनका यह विरोध शांत हो गया। लेकिन इस बार उन्हें पूरा भरोसा था कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उनकी बहन प्रीतम को मंत्री पद देगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और बीड ज़िले में बीजेपी में नाराज़गी के स्वर प्रबल होते जा रहे हैं।

क़रीब पचास पदाधिकारियों ने पिछले दो दिनों में अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। बीड ज़िले के सभी 11 तालुका (तहसील) अध्यक्षों और उनकी कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने अपने इस्तीफ़े जिलाध्यक्ष को सौंप दिए हैं।

ज़िला महासचिव सर्जेराव तांदले ने भी अपना इस्तीफ़ा दे दिया है। पूर्व ज़िला परिषद की पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान सदस्य सविता गोल्हार, ज़िला अध्यक्ष की पत्नी व ज़िला परिषद सदस्य जयश्री म्हस्के सहित 4 ज़िला परिषद सदस्यों ने भी अपने इस्तीफ़े सौंप दिए हैं। पाथर्डी पंचायत समिति में बीजेपी की विद्यमान सभापति सुनीता दौंड और उनके पति बीजेपी ज़िला उपाध्यक्ष गोकुल दौंड ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। 3 पंचायत समिति सदस्य, छह नगरसेवकों ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दिया है। ज़िले में बीजेपी पदाधिकारियों के इस्तीफ़े का सिलसिला जारी है। सोशल मीडिया पर पार्टी पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर रहे हैं। बीजेपी प्रदेश नेतृत्व इस नाराज़गी को लेकर खामोश है। इस नाराज़गी पर उसकी रणनीति क्या होगी यह देखना है? 

पंकजा के पहले के रुख को देखकर शायद पार्टी नेतृत्व इंतज़ार के मूड में है। क्योंकि अभी तक पंकजा मुंडे की तरफ़ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सवाल ये खड़े हो रहे हैं कि क्या पंकजा मुंडे कोई बड़ा क़दम उठाने की तैयारी में हैं? क्योंकि जब से डॉ. कराड को बीजेपी ने राज्यसभा में भेजा है तबसे पंकजा मुंडे सहज नज़र नहीं आती हैं। पिछले साल पंकजा ने पार्टी में अपने समर्थक नेताओं और विधायकों को गोलबंद करने की कवायदें शुरू की थी। उन्होंने अपने पिता गोपीनाथ मुंडे की जयन्ती पर बंजारा समाज के तीर्थ क्षेत्र भगवान गढ़ पर शक्ति प्रदर्शन भी किया था। उस शक्ति प्रदर्शन में बीजेपी नेता एकनाथ खडसे सहित गोपीनाथ मुंडे के क़रीबी विधायक भी उपस्थित हुए थे। अब देखना यह है कि पंकजा मुंडे कौनसा रुख अख्तियार करती हैं।

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