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मायावती ने हरिशंकर तिवारी के बेटे सहित तीन को निकाला, सपा में जाने की चर्चा

मायावती ने हरिशंकर तिवारी के बेटे सहित तीन को निकाला, सपा में जाने की चर्चा

मायावती ने कुछ और बड़े नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया है। रामअचल राजभर, लाल जी वर्मा सहित तमाम बड़े नेताओं के बाद बारी तिवारी परिवार के सदस्यों की है।

बीते कई दिनों से पूर्वांचल के बाहुबली और असरदार ब्राह्मण चेहरे हरिशंकर तिवारी के परिवार के सदस्यों के समाजवादी पार्टी में जाने की चर्चाओं के बीच बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने इन्हें निष्कासित कर दिया है। हरिशंकर तिवारी के बेटे व गोरखपुर की चिल्लूपार सीट से विधायक विनय शंकर तिवारी, बड़े बेटे व पूर्व सांसद कुशल शंकर तिवारी सहित भतीजे गणेश शंकर पांडे को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। 

इन सभी के बीते दिनों सपा मुखिया अखिलेश यादव से मिलने व दलबदल की बातें सामने आयी थीं। तिवारी परिवार के बसपा से बाहर होने के बाद पार्टी की ब्राह्मणों को जोड़ने की मुहिम को बड़ा धक्का लगा है, वहीं सपा को पूर्वांचल में मुख्यमंत्री योगी के विरोध में एक बड़ा नाम मिल गया है। 

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में हरिशंकर तिवारी का कुनबा सपा में दिखेगा और पूर्वांचल में प्रचार करेगा।

तिवारी परिवार की राजनीति 

पूर्वांचल के बाहुबली हरिशंकर तिवारी बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं। उनके परिवार में खुद हरिशंकर तिवारी कई बार विधायक व राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं तो वर्तमान में छोटे बेटे विनयशंकर तिवारी चिल्लूपार विधानसभा सीट से बसपा विधायक हैं। बड़े बेटे भीष्म शंकर तिवारी उर्फ कुशल तिवारी पूर्वांचल की खलीलाबाद सीट से दो बार सांसद रह चुके हैं और 2014 व 2019 में बसपा के टिकट पर हार कर दूसरे स्थान पर रहे हैं। बीते डेढ़ दशक से विनयशंकर तिवारी व कुशल तिवारी बसपा में रह कर पूर्वांचल में ब्राह्मणों को जोड़ने की मुहिम में लगे थे। 

वर्तमान में पूरे गोरखपुर जिले से विनय शंकर तिवारी विपक्ष के इकलौते विधायक हैं। हरिशंकर तिवारी के भतीजे गणेश शंकर पांडे विधान परिषद के उपसभापति रह चुके हैं। गणेश कई बार स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य का चुनाव जीत चुके हैं।

 - Satya Hindi

योगी से रही है अदावत 

गोरखपुर व पूर्वांचल की राजनीति में हरिशंकर तिवारी परिवार की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पुरानी अदावत रही है। योगी के मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश सरकार ने हरिशंकर तिवारी के घर व दफ्तर पर छापे डलवा दिए थे। गोरखपुर में हाता के नाम से जाने जाने वाले हरिशंकर तिवारी के निवास पर भारी पुलिस बल के छापा डालने के बाद पूर्वांचल के ब्राह्मणों में उबाल आ गया था। 

छापों के विरोध में गोरखपुर में विरोध प्रदर्शन हुआ था और खुद हरिशंकर तिवारी ने विरोध मार्च की अगुवाई जिलाधिकारी कार्यालय तक की थी। गोरक्षनाथ पीठ और तिवारी परिवार की इस अदावत का असर पूर्वांचल के ब्राह्मणों में साफ देखा जा सकता है और भाजपा को इससे कई सीटों पर परेशानी होगी।

ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं 

ब्राह्मण बनाम ठाकुर की राजनीति में फंसी भाजपा के लिए तिवारी परिवार का सपा में जाना परेशानी का सबब हो सकता है। सपा के पास पूर्वांचल में कोई असरदार ब्राह्मण चेहरा नहीं था। पूरे पूर्वांचल में योगी के ठाकुर कार्ड के खिलाफ ब्राह्मणों की लामबंदी सपा, बसपा से लेकर कांग्रेस तक कर रहे हैं। बसपा के पास जहां तिवारी जैसा चेहरा था वहीं सपा के पास इस तरह का कोई बड़ा नाम नहीं था। 

अगर हरिशंकर तिवारी का परिवार सपा में आता है तो पार्टी को न केवल पूर्वांचल में मजबूती मिलेगी बल्कि मध्य यूपी में भी ब्राह्मणों के बीच अपनी पैठ बनाने में फायदा मिलेगा।

चार दर्जन सीटों पर होगा असर 

हरिशंकर तिवारी परिवार के सपा के साथ होने का असर गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बस्ती, संतकबीरनगर, महराजगंज, बलिया, सिद्धार्थनगर से लेकर गोंडा व बलरामपुर की सीटों पर पड़ सकता है। इन जिलों में ब्राह्मणों के बीच हरिशंकर तिवारी जाना पहचाना व प्रतिष्ठित चेहरा हैं। 

योगी सरकार में खुद के व पूरे ब्राह्मण समाज के उत्पीड़न का मुद्दा उठा कर वह भाजपा के लिए परेशानी खड़ी करेंगे। खुद परिवार के सदस्य कम से कम पूर्वांचल की तीन सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं।

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