एमपी में अंडे का फंडा, दो सरकारी विभाग भिड़े !

05:31 pm Sep 04, 2022 | संजीव श्रीवास्तव । भोपाल

अंडे और चिकन को लेकर मध्य प्रदेश के दो विभाग आमने-सामने हैं। राज्य के बाल आश्रय और संप्रेषण गृहों में रहने वाले बच्चों को खाने में अंडा और चिकन परोसने का आदेश महिला एवं बाल विकास विभाग ने पिछले सप्ताह जारी किया। प्रदेश के गृह मंत्री और शिवराज सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा ने रविवार को कहा- मध्य प्रदेश में अंडे का फंडा कतई नहीं चलने दिया जायेगा।

अंडा और चिकन परोसने का आदेश 25 अगस्त 2022 को जारी किया गया था। 681 पेजों का आदेश राज्य के गजट में प्रकाशित हुआ है। तमाम दिशा-निर्देशों के साथ बच्चों के खान-पान से जुड़ी व्यवस्था को भी इस गजट नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है। विभाग ने अपने आदेश में बच्चों को सप्ताह में एक बार प्रति बच्चा 115 ग्राम चिकन अथवा चार दिन अंडा देने की बात कही है। आदेश यह भी कहा गया, ‘बच्चा यदि शाकाहारी है तो उसे सप्ताह में एक बार 60 ग्राम पनीर अथवा गुड़-मूंगफली और न्यूट्री नगेट्स परोसा जायेगा।’

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बच्चों को अंडा-चिकन परोसे जाने के आदेश से राज्य में ‘बवाल’ मच गया है। गृह मंत्री और सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा से मीडिया ने जब रविवार को इस बारे में सवाल किया तो मिश्रा ने सबसे पहले कहा, ‘सरकार के पास बच्चों को चिकन-अंडा परोसने का कोई प्रस्ताव न तो विचाराधीन है और ना ही ऐसा कोई निर्णय होने की जानकारी है।’ महिला एवं बाल विकास विभाग के आदेश का राजपत्र में प्रकाशन हो जाने की ओर ध्यान दिलाये जाने पर मिश्रा ने कहा, ‘कुछ भ्रम की स्थिति है। ऐसा कोई आदेश नहीं हुआ है।’

मध्य प्रदेश में अंडे का फंडा नहीं चलेगा। नॉनवेज किसी भी हालत में बच्चों को परोसा नहीं जायेगा।


- नरोत्तम मिश्रा, गृह मंत्री, मध्य प्रदेश, रविवार को मीडिया से

सीएम के पास है विभाग

 मिश्रा की दो टूक प्रतिक्रिया के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसर बेहद सकते में हैं। दरअसल यह विभाग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास है। विभाग में कोई राज्य मंत्री भी नहीं है। बड़ा सवाल यह पैदा हो रहा है कि बिना सीएम की जानकारी के बच्चों को अंडा-चिकन परोसे का निर्णय संभव नहीं है! यदि अफसरों ने अपने तईं निर्णय ले लिया है तो मामला, और भी गंभीर एवं पेचीदा हो जायेगा। इस पेचीदा मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोई भी प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आयी है। 

पिछली सरकार में भी अंडे पर हुआ था बवाल!

 कमल नाथ सरकार में राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री रहीं इमरती देवी ने आंगन बाड़ियों में बच्चों को अंडा परोसे जाने का निर्णय लिया था तो जमकर बवाल मचा था। ज्योतिरादित्य सिंधिया कोटे से नाथ सरकार में वे मंत्री बनाई गई थीं। तत्कालीन मंत्री इमरती देवी के अंडा परोसने के फैसले पर बीजेपी के साथ कई हिन्दूवादी संगठनों ने न केवल तीखी आपत्तियां कीं थीं, बल्कि विभाग के खिलाफ कतिपय संगठन सड़कों पर उतरे थे। आंदोलन-प्रदर्शन किये गये थे।

हालांकि कमल नाथ सरकार फैसले पर अमल नहीं कर पायी थी। दरअसल अधिसूचना जारी होने के बाद भी आंगनबाड़ियों में अंडा परोसा नहीं जा सका था। बाद में नाथ की सरकार चली गई थी।

कमलनाथ सरकार में महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री रहीं इमरती देवी ने अंडा परोसे जाने की मुखालफत को बीजेपी और हिन्दूवादी संगठनों की संकीर्ण मानसिकता करार दिया था। दिलचस्प बात यह है कि इमरती देवी भी अपने राजनीतिक आका ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आज बीजेपी में हैं। उनकी भी इस ताजा मामले पर कोई प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आयी है।

अफसरों ने नहीं दिया जवाब

 सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा के ताजा बयान के बाद ‘सत्य हिन्दी’ ने राज्य के अपर मुख्य सचिव अशोक शाह (महिला एवं बाल विकास विभाग के मुखिया हैं) और संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग आर.आर.भोंसले से संपर्क साधा। दोनों ने मोबाइल फोन नहीं उठाये।  व्हाट्सएप और एसएमएस संदेश भी भेजे, लेकिन खबर लिखे जाने तक दोनों से ही कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पायी।

ये है पूरा मेन्यूः महिला एवं बाल विकास विभाग ने मप्र किशोर न्याय नियम की अधिसूचना में मेन्यू को शामिल किया है। अधिसूचना के अनुसार दाल, राजमा, चना, नाश्ते में दूध, पत्तेदार सब्जियां, दही या छाछ, सप्ताह में एक बार 115 ग्राम चिकन या चार दिन अंडे, गुड़-मूंगफली या पनीर 100 ग्राम, स्वीट डिश, चाय या कॉफी, सूजी या पोहा, खिचड़ी और ब्रेड, अरहर, मूंग, हरे चने या काबुली चना बच्चों को परोसा जाना सुनिश्चित हुआ है।

मेथी, पालक, सरसों के साग के साथ सप्ताह में एक बार पत्तेदार सब्जियां देनी होंगी। यदि किसी संस्था के पास जमीन है तो वह इन सब्जियों को उगा भी सकेगी। मौसमी फल भी मिलेंगे। दिन में चार बार खाना दिये जाने की बात भी अधिसूचना में कही गई है। 

कपड़ों के मापदंड

 यह भी बताया गया है कि लड़कियां - इंडो वेस्टर्न, स्कर्ट, जींस, पेंटस, सलवार-कुर्ता, ऊनी स्वेटर-शाल पहनेंगी। यह सब प्रवेश के समय के साथ ही तीन और छह महीने बाद दो मिलेंगे। स्वेटर साल में दो और शाल एक मिलेगी। जूते, बैग एवं स्कूल ड्रेस भी इन्हें मिलेगी। 

लड़कों को लेकर स्पष्ट किया गया है उन्हें कमीज, टी-शर्टस, हॉफ पैंट, जींस, जैकेट्स, कुर्ता-पायजमा, जूते, बैग, स्कूल ड्रेस आदि दिये जायेंगे। यह प्रवेश के समय तीन और छह महीने बाद दो मिलेंगे। जैकेट साल में दो और ऊनी टोपी भी दी जायेगी। हर छह महीने में एक बार कुर्ता-पायजामा मिलेगा। 

कांग्रेस ने ली मिश्रा की चुटकी

 मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता के.के.मिश्रा ने नरोत्तम मिश्रा की चुटकी ली है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा है, ‘असल में लड़ाई अंडे के फंडे की नहीं है।’ उन्होंने आगे कहा है, ‘महिला एवं बाल विकास विभाग मुख्यमंत्री के पास है, पूरे मामले को सुर्खियों में लाकर मिश्रा जहां तक संदेश पहुंचाना चहाते थे, वह पहुंच गया है। बिना सीएम के हस्ताक्षर के फाइल ओके नहीं हो सकती है। अधिसूचना वाली फाइल पर भी विभाग के प्रभारी होने के नाते सीएम ही दस्तख्त होंगे।’ 

मिश्रा ने कहा, ‘अंडे के फंडे का एक दुःखद पक्ष यह है कि सूबे में बड़ी तादाद में बच्चे कुपोषित हैं। सरकार उनकी सुध तो ले नहीं रही है, पहले बालगृह-संप्रेषण गृहों (अपराधी बच्चों) में अंडा-चिकन? सरकार की बुद्धिहीनता का परिचायक है।’