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जहांगीरपुरी: यथास्थिति बनी रहेगी, 2 हफ्ते बाद होगी अगली सुनवाई

जहांगीरपुरी: यथास्थिति बनी रहेगी, 2 हफ्ते बाद होगी अगली सुनवाई

जहांगीरपुरी में अतिक्रमण हटाए जाने के मामले में सुनवाई के दौरान क्या-क्या दलीलें दोनों ओर से रखी गईं और अदालत ने क्या कहा, जानिए। 

जहांगीरपुरी में अतिक्रमण हटाए जाने के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक यथा स्थिति को बनाए रखने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 2 हफ्ते बाद होगी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि उत्तरी एमसीडी के मेयर ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने में देर की। 

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उत्तरी एमसीडी फुटपाथ और सड़कों पर हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई कर रही थी। इससे पहले ऐसी कार्रवाई जनवरी और फरवरी में भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जहां तक घरों के अतिक्रमण की बात है इस मामले में नोटिस जारी किए गए थे। याचिकाकर्ताओं के वकीलों की ओर से कार्रवाई के दौरान एक समुदाय को निशाना बनाने की बात भी कही गयी। 

मेहता ने कहा, इस तरह के आरोप कि एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है पूरी तरह गलत हैं। मध्य प्रदेश के खरगोन में जितने लोगों की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है उसमें से 88 मामले हिंदुओं के हैं। उन्होंने अदालत से कहा कि मध्य प्रदेश में भी 2021 और 2022 में नोटिस जारी किए गए थे। 

दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस राव ने पूछा कि बुधवार को हुई कार्रवाई क्या सिर्फ स्टॉल, कुर्सियों, मेज आदि पर की गई थी। जस्टिस गवई ने पूछा क्या इसके लिए आपको बुलडोजर की जरूरत थी? 

जस्टिस गवई ने कहा कि कानून में किसी काम को करने का एक तरीका होता है, यह अपील करने का मौका देता है और इसके लिए कम से कम 5 से 15 दिन का समय दिया जाता है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि घरों के बारे में भी नोटिस जारी किए गए थे।

जस्टिस राव ने कहा कि हम अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ी जानकारियां मांगेंगे और आप भी अपना जवाब दाखिल कीजिए तब तक बुधवार को जो आदेश दिया गया है वह जारी रहेगा। 

जस्टिस राव ने यह भी कहा कि उत्तरी एमसीडी के मेयर को जानकारी दिए जाने के बाद भी हुई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को हम गंभीरता से लेंगे।

बुधवार को क्या हुआ था?

बुधवार को जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई थी तो इस मामले में याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंचे थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा था। 

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई उत्तरी दिल्ली नगर निगम की ओर से की जा रही थी। बुधवार को अदालत के आदेश के बाद भी एमसीडी की कार्रवाई कुछ देर तक जारी रही थी जिसका लोगों ने विरोध किया था। 

जबकि दिल्ली पुलिस और उत्तरी एमसीडी के मेयर राजा इकबाल सिंह ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जहांगीरपुरी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रोक दी गई है।

अदालत के आदेश के बाद भी कार्रवाई जारी रहने पर याचिकाकर्ताओं के वकील दुष्यंत दवे ने सीजेआई के सामने फिर से इस मामले को रखा था। सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से कहा था कि वह संबंधित अफसरों तक अदालत के इस आदेश को पहुंचाएं। इस तरह कुछ ही देर में अदालत ने दो बार इस मामले में निर्देश जारी किया था। 

बता दें कि जहांगीरपुरी में बीते गुरुवार को हनुमान जयंती के मौके पर निकाले गए जुलूस के दौरान हिंसा हुई थी।

एमसीडी के बुलडोजर ने इस दौरान कई दुकानों और अवैध रूप से बने हुए कुछ ढांचों को गिरा दिया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों के कर्मचारी तैनात रहे।

इससे पहले उत्तरी एमसीडी की ओर से उत्तर पश्चिम जिले के डीसीपी को पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने के अभियान के लिए 400 पुलिसकर्मियों की तैनाती करने की मांग की गई थी। 

मंगलवार को दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने उत्तरी एमसीडी के मेयर को पत्र लिखकर अवैध निर्माणों को चिन्हित करने और उन्हें गिराने की मांग की थी। 

बता दें कि रामनवमी के जुलूस के मौके पर हुई हिंसा के दौरान मध्य प्रदेश के खरगोन व बड़वानी में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चल चुका है।

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