महात्मा गांधी की तरह, मैं इस वक्फ बिल को फाड़ता हूँ: ओवैसी

02:25 am Apr 03, 2025 | सत्य ब्यूरो

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक मोदी सरकार द्वारा देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा है। उन्होंने लोकसभा में बिल का विरोध करते हुए कहा कि वह इस विधेयक को फाड़ रहे हैं। ओवैसी लोकसभा में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री व संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किए जाने के बाद बोल रहे थे। सदन में इस पर आठ घंटे तक बहस तय थी, लेकिन बाद में इसको विधेयक पारित होने तक के लिए बढ़ा दिया गया। इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के सहयोगी इसको समर्थन कर रहे हैं तो इंडिया गठबंधन सहित कई विपक्षी दल इसका विरोध किया। 

  • असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "अगर आप इतिहास पढ़ेंगे तो पाएंगे कि महात्मा गांधी ने श्वेत दक्षिण अफ्रीका के कानूनों के बारे में कहा था, 'मेरी अंतरात्मा इसे स्वीकार नहीं करती' और उन्होंने इसे फाड़ दिया। गांधी की तरह मैं भी इस कानून को फाड़ रहा हूं। यह असंवैधानिक है। भाजपा इस देश में मंदिर और मस्जिद के नाम पर विभाजन पैदा करना चाहती है। मैं इसकी निंदा करता हूं और आपसे 10 संशोधनों को स्वीकार करने का अनुरोध करता हूं।'

  • हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में कहा कि यह विधेयक मोदी सरकार द्वारा देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा है। ओवैसी ने आगे कहा कि यह विधेयक सभी धर्मों की समानता के संवैधानिक प्रावधान के खिलाफ है। 
  • उन्होंने कहा कि गैर-मुस्लिम शासी निकाय का हिस्सा होंगे, जबकि अन्य धर्मों के मामले में ऐसा नहीं है। ओवैसी ने कहा, 'आज हमने गृह मंत्री को यह कहते हुए सुना कि बोर्ड और परिषद इस्लाम से अलग हैं। अगर यह सच है, तो इस कानून की कोई जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ एक वैधानिक निकाय बनाना चाहिए। यह विधेयक अनुच्छेद 26 का गंभीर उल्लंघन है।' 
  • ओवैसी ने कहा, "इस संशोधन के पारित होने के बाद केवल प्राचीन मंदिर ही संरक्षण में रहेंगे, प्राचीन मस्जिदें नहीं।' सांसद ने कहा, 'मेरे हितों की रक्षा कौन करेगा...अगर मैं राज्य और केंद्रीय वक्फ बोर्ड पर निर्भर नहीं रह सकता।' 
  • उन्होंने बताया कि विधेयक में प्रस्तावित बदलावों से बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को प्रमुख पदों पर बिठाया जाएगा। पांच साल तक इस्लाम का पालन करने वाले व्यक्ति को वक्फ घोषित करने का अधिकार देने के प्रावधान की भी ओवैसी ने आलोचना की।

जानिए, लोकसभा में कैसे चला घटनाक्रम 

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'वक्फ में गैर-मुस्लिम सदस्यों को नियुक्त करने का कोई प्रावधान नहीं है, न ही हम ऐसा करने का इरादा रखते हैं। मुस्लिम धार्मिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। विपक्ष केवल वोट बैंक तुष्टिकरण के लिए इसका विरोध कर रहा है।'

  • उन्होंने आगे कहा कि प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए बोर्ड और परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की जा सकती है। उन्होंने कहा, 'क्या हिंदू, जैन या सिख चैरिटी कमिश्नर दूसरे धर्म से नहीं हो सकते? आप देश को तोड़ देंगे। अगर उन्होंने 2013 में बिल में संशोधन करके इसे चरमपंथी नहीं बनाया होता तो इस बिल की ज़रूरत नहीं होती।'

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ विधेयक के समर्थन में कहा, 'विपक्षी सांसद या तो अनजाने में या राजनीतिक कारणों से गलत सूचना फैला रहे हैं। वक्फ का मतलब है अल्लाह के नाम पर धार्मिक दान के लिए दिया जाने वाला दान- एक अपरिवर्तनीय धर्मार्थ बंदोबस्ती। दान केवल अपनी संपत्ति से ही किया जा सकता है, सरकारी जमीन से नहीं।' 

  • शाह ने दावा किया कि तिरुचेंदूर मंदिर की 400 एकड़ जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में सौंप दी गई। शाह ने कहा, 'वे हमसे इन दानों का हिसाब न रखने के लिए कहते हैं। यह धन गरीब मुसलमानों का है, अमीर बोर्ड का नहीं।'

  • एलजेपी (रामविलास) नेता अरुण भारती ने विधेयक का समर्थन किया, जबकि वाईएसआरसीपी के पीवी मिधुन रेड्डी और आरजेडी के सुधाकर सिंह ने इसका विरोध किया। 

बीजेपी अध्यक्ष पद पर अखिलेश बनाम शाह

  • समाजवादी पार्टी के मुखिया और सांसद अखिलेश यादव ने वक़्फ बिल का विरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहती है, वह अभी तक अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पाई है।'

जवाब में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'मेरे सामने जितनी भी पार्टियाँ हैं, उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कुछ परिवार के लोग ही करेंगे। हमें 12-13 करोड़ सदस्यों में से प्रक्रिया के बाद चुनना है। इसलिए इसमें समय लगता है। आपके मामले में तो ज्यादा समय नहीं लगेगा। मैं तो कह रहा हूं कि आप 25 साल तक अध्यक्ष बने रहेंगे।'

  • गौरव गोगोई ने दावा किया कि 2023 में 5 बार माइनॉरिटी अफेयर्स कमेटी की बैठक हुई। लेकिन किसी एक भी बैठक में- नए वक्फ़ संशोधन विधेयक का जिक्र भी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि 'मैं सरकार से मांग करता हूं कि इन बैठकों के मिनट्स टेबल पर रखें।'

  • कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, 'हमारा मार्गदर्शक भारत का संविधान है। यह विधेयक संविधान पर हमला है। इस विधेयक का उद्देश्य अल्पसंख्यकों को बदनाम करना और अल्पसंख्यकों से मताधिकार छीनना है।'
  • कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला का कहना है, 'विपक्ष ने कहा है कि इस विधेयक में कुछ संशोधन ठीक नहीं हैं और इस विधेयक पर आम सहमति नहीं बन पाई।'

  • केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करते हुए पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि अगर 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में नहीं आई होती, तो आज संसद भवन सहित कई सरकारी संपत्तियाँ वक्फ बोर्ड की संपत्ति के रूप में दावे का हिस्सा बन सकती थीं।

  • रिजिजू ने कहा, 'दिल्ली में 1970 से एक मामला चल रहा है, जिसमें सीजीओ कॉम्प्लेक्स और संसद भवन जैसी संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति बताया था। यह मामला कोर्ट में था, लेकिन उस समय की सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।' उन्होंने आगे कहा कि पुराने वक्फ अधिनियम 1995 के तहत वक्फ बोर्ड को ऐसे व्यापक अधिकार प्राप्त थे, जिनका दुरुपयोग सरकारी संपत्तियों पर दावा करने के लिए हो सकता था।
  • केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक इसी तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए ज़रूरी है। उन्होंने यूपीए सरकार पर आरोप लगाया कि उनकी नीतियों के कारण देश की महत्वपूर्ण संपत्तियाँ खतरे में पड़ सकती थीं। रिजिजू ने यह भी कहा, 'अगर मोदी जी की सरकार नहीं आती, तो आज हम वक्फ बोर्ड के संसद भवन में खड़े होते।' उन्होंने कहा है कि विपक्ष इस विधेयक पर लोगों को गुमराह कर रहा है।

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को नियंत्रित करने के लिए लाया गया ये बिल सरकार का दावा है कि पारदर्शिता लाने वाला है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, "हम इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड में फैले भ्रष्टाचार और माफिया राज को खत्म करना चाहते हैं। विपक्ष बेवजह डर फैला रहा है।" लेकिन विपक्ष इसे पूरी तरह खारिज कर रहा है। कांग्रेस, टीएमसी और अन्य दलों का कहना है कि ये बिल संविधान के खिलाफ है और मुस्लिम समुदाय की धार्मिक आजादी पर हमला है। मंगलवार को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर अपना विरोध जताया।