राफ़ेल डील: भारतीय बिचौलिये को मिला 1 मिलियन यूरो का गिफ़्ट- रिपोर्ट

11:34 am Apr 05, 2021 | सत्य ब्यूरो - सत्य हिन्दी

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले जिस राफ़ेल लड़ाकू विमान की ख़रीद के विवाद की देश में गूंज हुई थी, वह विवाद फिर से जिंदा हो रहा है। भारत ने फ़्रांस से 36 लड़ाकू विमानों को ख़रीदा था। 

फ़्रांस के ही एक ऑनलाइन पोर्टल मीडियापार्ट ने कहा है कि दोनों देशों के बीच हुई इस डील में एक भारतीय बिचौलिया कंपनी शामिल थी और उसे 1 मिलियन यूरो (8.62 करोड़) रुपये दिए गए थे। 

मीडियापार्ट ने कहा है कि इस मामले की जांच की तीन रिपोर्ट हैं और यह पहली रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक़, अक्टूबर, 2018 में फ़्रांस की फ्रेंच एंटी करप्शन एजेंसी (एएफए) को पहली बार इस भुगतान के बारे में पता चला और उसने दसॉ एविएशन से इसके बारे में पूछताछ की। दसॉ एविशेएन ने ही ये राफ़ेल विमान बनाए थे। 

रिपोर्ट कहती है कि 23 सितंबर, 2016 को दोनों देशों के बीच राफ़ेल डील के फ़ाइनल होने के बाद दसॉ एविएशेन भारत में अपनी एक कंपनी- डेफ़सिस सॉल्यूशंस को भुगतान की यह रकम देने के लिए तैयार हो गयी। 

राफ़ेल मामले पर देखिए वीडियो- 

रिपोर्ट के मुताबिक़, दसॉ ने कहा कि यह रकम राफ़ेल विमान के जैसे ही 50 बड़े कार जैसे मॉडल बनाने के लिए नियमित तौर पर दी जाती थी। लेकिन दसॉ इस बारे में कोई भी सुबूत एएफए को नहीं दे सकी कि वास्तव में इस तरह के कोई मॉडल बनाए गए। रिपोर्ट आगे कहती है कि इतनी बड़ी अनिमियतता के बाद भी एएफए ने इस बात को मुक़दमा चलाने के लिए अभियोजकों के पास नहीं भेजा। 

यह रकम जिस कंपनी को देने की बात कही जा रही है यानी डेफ़सिस सॉल्यूशंस- इसके मालिक सुशेन गुप्ता हैं। गुप्ता को मार्च, 2019 में आगुस्ता वेस्टलैंड घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिन्ग के एक मामले में ईडी ने गिरफ़्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

ऑडिट करने का फ़ैसला 

रिपोर्ट कहती है कि हालांकि एएफए को यह गड़बड़ी पहली बार 2017 में पता चली लेकिन अक्टूबर, 2018 आने तक भारत के साथ हुई राफ़ेल डील में गड़बड़ियों की कई रिपोर्ट सामने आ चुकी थीं। इसके बाद एएफए ने दसॉ एविएशन का ऑडिट करने का फ़ैसला किया। 

ऑडिट के दौरान एएफए को दसॉ के खातों में से 5,08,925 यूरो (4.39 करोड़) की रकम के ख़र्च होने का पता चला और इसमें लिखा था कि यह रकम क्लाइंट्स को उपहार देने के लिए ख़र्च की गई। मीडियापार्ट के मुताबिक़, यह ख़र्च इस रिपोर्ट में दर्ज की गई बाक़ी एंट्री के मुक़ाबले बेमेल लग रही थी। 

एएफए के द्वारा इस बारे में पूछे जाने पर दसॉ ने 30 मार्च, 2017 की प्रोफ़ोर्मा इनवॉइस दी और यह इनवॉइस डेफ़सिस सॉल्यूशंस की ओर से दी गई थी। एएफए की रिपोर्ट कहती है कि यह इनवॉइस 1 मिलियन यूरो से ज़्यादा की है और राफ़ेल के जैसे 50 कार जैसे मॉडल्स बनाने के लिए दी गई थी। 

इस बारे में जब एएफए ने दसॉ से पूछा कि आख़िर क्यों उसने एक भारतीय कंपनी से अपने विमान का मॉडल बनाने के लिए कहा और यह भी पूछा कि क्लाइंट्स को गिफ़्ट देने के पीछे क्या कारण रहा, तो दसॉ कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी।

रिपोर्ट के मुताबिक़, हैरान करने वाली बात यह है कि इस तरह के मॉडल बनाए गए हैं, दसॉ इससे जुड़ा एक भी फ़ोटोग्राफ़ एएफए को नहीं दिखा सकी। 

मीडियापार्ट के मुताबिक़, इसके बाद ही एएफए को शक हुआ कि यह एक फर्जी ख़रीद थी और इसे सभी वित्तीय लेन-देन को छुपाने के लिए रचा गया था। हालांकि एएफए के निदेशक, चार्ल्स दुचाइन ने इस बात को संबंधित विभाग के सामने नहीं रखा और इस पूरे मामले को दसॉ एविएशन के ऑडिट की रिपोर्ट में सिर्फ़ दो पैराग्राफ़ में निपटा दिया। 

मीडियापार्ट की ओर से इस बारे में सवाल पूछे जाने पर चार्ल्स दुचाइन ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि दसॉ के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं देगी। 

राफ़ेल मामले में कब क्या हुआ?

2007 : यूपीए सरकार ने भारतीय वायु सेना की मांग पर 126 लड़ाकू विमान ख़रीदने से जुड़ी निविदाएं जारी कीं। 

जनवरी, 2012 : दसॉ एविएशन ने सबसे कम कीमत की निविदा डाली। जिन 126 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की बात कही गई थी, तय हुआ था कि उनमें से 18 जहाज़ को तैयार कर फ़्लाई अवे की स्थिति में फ़्रांस से भारत लाया जाएगा। दसॉ शेष 108 लड़ाकू जहाज़ भारत में सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ मिल कर बनाएगी। 

 

2014 : दसॉ और एचएएल ने एक समझौते पर दस्तख़त किए। बातचीत पूरी हो गई, पर अंतिम क़रार नहीं हुआ था। 

जून, 2015 : रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर 126 लड़ाकू विमान खरीदने की निविदा वापस ले ली। 

अप्रैल, 2015 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस के दौरे पर गए और वहीं 36 राफ़ेल विमान ख़रीदने का एलान कर दिया। 

जनवरी, 2016 : तत्कालीन फ़्रांसीसी राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांद गणतंत्र दिवस पर भारत आए, राफ़ेल विमान खरीदने के मुद्दे पर भारत और फ़्रांस के बीच सहमति पत्र पर दस्तख़त किए गए। 

नवंबर, 2018 : विवाद होने के बाद जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो राफ़ेल विमान खरीद के मुद्दे पर लंबी सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई में बनी खंडपीठ ने फ़ैसला सुरक्षित रखा। 

14 दिसंबर, 2018 : राफ़ेल लड़ाकू विमान ख़रीद मामले में कोर्ट की देखरेख में जांच कराने की मांग की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि लड़ाकू जहाज़ की कीमत तय करना उसका काम नहीं है। 

मई, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और मशहूर वकील प्रशांत भूषण की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई पूरी कर फ़ैसला सुरक्षित रखा। 

 

अक्टूबर, 2019 : भारत को पहला राफ़ेल विमान मिला। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ़्रांस में एक कार्यक्रम में इसे स्वीकार किया। 

नवंबर, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने तमाम पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दीं।