अमेरिका की संसदीय समिति की सुनवाई के दौरान कश्मीर पर तीखी नोंकझोंक

06:00 pm Oct 23, 2019 | सत्य ब्यूरो - सत्य हिन्दी

अनुच्छेद 370 में बदलाव कर कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने के बाद की स्थिति पर जिस तरह भारत में ध्रुवीकरण हुआ है और इसके पक्ष-विपक्ष में लोग बिल्कुल आमने सामने आ गए हैं, उसकी गूंज अमेरिकी संसद में भी सुनी गई है। अमेरिकी संसद में मंगलवार की रात विदेश मामलों की समिति की सुनवाई हुई। वहाँ अमेरिकी सरकार का पक्ष विदेश मंत्रालय की उपसचिव एलिस वेल्स ने रखी, जिसका तीखा विरोध कई  सदस्यों ने किया।

हिन्दुस्तान टाइम्स ने यह ख़बर देते हुए कहा है कि अमेरिकी कांग्रेस यानी संसद की सदस्य इलहान उमर इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक थीं और उन्होंने प्रशासन से तीखे सवाल पूछे। वेल्स ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि कश्मीर में अभी भी इंटरनेट कनेक्शन नहीं है, पूर्व मुख्य मंत्रियों समेत कई बड़े नेता जेल में हैं या नज़रबंद हैं। पर शिमला समझौते के तहत भारत-पाकिस्तान बात करें तभी उनके बीच का रिश्ता सुधर सकता है। दोनों देशों के रिश्ते में सबसे बड़ी अड़चन पाक-प्रायोजित आतंकवाद है। जब तक पाकिस्तान इसे नहीं रोकता, रिश्ते नहीं सुधर सकते। 

एनडीटीवी की ख़बर के मुताबिक़, भारतीय पत्रकार आरती टिक्कू सिंह भी उस सुनवाई में मौजूद थीं और उमर से उनकी ज़बरदस्त नोंकझोंक हुई। इसकी शुरुआत टिक्कू सिंह के बयान से हुई। 

समिति की सुनवाई के दौरान सिंह ने पाकिस्तान पर ज़बरदस्त हमला बोलते हुए कहा कि पाक-प्रायोजित आतंकवाद के सबसे ज़्यादा शिकार कश्मीरी मुसलमान ही हुए हैं, लेकिन पश्चिमी मीडिया इसकी अनदेखी कर रहा है। 

आरती टिक्कू सिंह ने समिति की सुनवाई की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि 'यह पूरी तरह एकतरफा, पूर्वग्रह से ग्रसित और पाकिस्तान के पक्ष में है। यह जानबूझ कर भारत के ख़िलाफ़ रखा गया है।'

उन्होंने कहा, 'कश्मीर में बहुत सारे कश्मीरी मुसलमान मारे गए हैं और वे पाकिस्तान के राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के शिकार हैं। पश्चिमी मीडिया ने कश्मीर में 30 साल से चल रहे इसलामी आतंकवाद को पूरी तरह नज़रअंदाज किया है।'

इलहाम उमर ने इस पर प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने टिक्कू सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह सरकार का पक्ष रख रही हैं, जो किसी पत्रकार के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा :

रिपोर्टर का काम किसी मामले की तह में जाकर सच्चाई का पता लगाना और उसे जनता के बीच लाना है। आप अपने देश के लोगों को ध्यान में रख कर यहाँ इस तरह की बातें कर रही हैं। आप यह बेहद अविश्वसनीय दावा कर रही हैं कि कश्मीर पर पाबंदियाँ मानवाधिकार के लिए अच्छा है। किसी पत्रकार के लिए सबसे बुरी बात है कि वह सरकार की बात करे।


इलहाम उमर, सदस्य, अमेरिकी कांग्रेस

उमर ने इसके आगे जोड़ा, 'आपके कहे मुताबिक़, कश्मीर में जो कुछ हो रहा है वह सिर्फ़ उनकी वजह से हो रहा है जो भारत से अलग होना चाहते हैं और उन्हें पाकिस्तान का समर्थन है।' 

सिंह ने इस पर पलटवार करते हुए उमर से कहा, 'मैंने कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन और गोमांस के मामले में हमेशा अपनी बातें निष्पक्ष होकर रखी हैं और अलग-अलग समय में सरकारों की आलोचना की है।

सिंह ने कहा कि पश्चिमी मीडिया ने कश्मीर की स्थिति को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। उन्होंने इसके आगे कहा, 'हालांकि पश्चिमी मीडिया ने भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से होने वाले मानवाधिकार उल्लंघनों की बात उठा कर ठीक ही किया है, पर उन्होंने ऐसा नैरेटिव बना दिया, उससे कश्मीर में आतंक फैलाने वालों को ही मदद मिलती है, इससे मानवाधिकारों की रक्षा को कोई बल नहीं मिलता है।'

आरती टिक्कू सिंह ने कश्मीरी पत्रकार शुजात बुख़ारी की हत्या की भी चर्चा की और कहा कि उनकी हत्या इसलिए कर दी गई कि वह शहर-शहर घूम कर कश्मीर में शांति की बात कह रहे थे।

इस भारतीय पत्रकार ने कहा कि बुख़ारी की हत्या लश्कर-ए-तैयबा ने की, जिसे अमेरिका ने 2008 में मुंबई हमलों के बाद प्रतिबंधित कर दिया। 

इलहान उमर सोमालिया मूल की अमेरिकी हैं। वह खबरों में तब आई थीं जब राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने तंज करते हुए कहा था कि जो लोग मेरी आलोचना करते हैं वे वहाँ चले जाएँ जहाँ से आए हैं। बता दें कि उमर का जन्म अमेरिका में ही हुआ है, उनके माता पिता सोमालिया से अमेरिका गए थे।