+
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद: बेलगावी में तोड़फोड़, तनाव 

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद: बेलगावी में तोड़फोड़, तनाव 

महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच जारी सीमा विवाद के बीच एक बार फिर तनाव का माहौल बन रहा है। विवाद तब भड़का जब बुधवार रात को छत्रपति शिवाजी की मूर्ति पर किसी ने इंक फेंक दी। 

महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच जारी सीमा विवाद के बीच एक बार फिर तनाव का माहौल बन रहा है। विवाद तब भड़का जब बुधवार रात को छत्रपति शिवाजी की मूर्ति पर किसी ने इंक फेंक दी। 

इसके बाद महाराष्ट्र के कुछ कार्यकर्ताओं ने बीती रात बेलगावी में प्रदर्शन किया और इंक फेंकने वालों को गिरफ़्तार करने की मांग की। लेकिन यह प्रदर्शन तब हिंसक हो गया जब एक दर्जन से ज़्यादा गाड़ियों को पत्थरबाज़ी कर चकनाचूर कर दिया गया। 

इस दौरान स्वतंत्रता सेनानी संगोली रायन्ना की मूर्ति को भी खंडित कर दिया गया। तनाव को देखते हुए बेलगावी में ज़्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। 

पुराना है विवाद

बता दें कि 1947 से पहले महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्य अलग नहीं थे। तब बॉम्बे प्रेसीडेंसी और मैसूर स्टेट हुआ करते थे। आज के कर्नाटक के कई इलाक़े उस समय बॉम्बे प्रेसीडेंसी में थे। आज के बीजापुर, बेलगावी (पुराना नाम बेलगाम), धारवाड़ और उत्तर कन्नड जिले बॉम्बे प्रेसीडेंसी में ही थे। 

बॉम्बे प्रेसीडेंसी में मराठी, गुजराती और कन्नड भाषाएं बोलने वाले लोग रहा करते थे। आज़ादी के बाद भाषा के आधार पर राज्यों का बँटवारा शुरू हुआ। बेलगाम में मराठी बोलने वालों की संख्या कन्नड़ बोलने वालों की संख्या से ज्यादा थी। लेकिन बेलगाम नगरीय निकाय ने 1948 में माँग की कि इसे मराठी बहुल होने के चलते प्रस्तावित महाराष्ट्र राज्य का हिस्सा बनाया जाए।

1983 में बेलगाम में पहली बार नगर निकाय के चुनाव हुए। इन चुनावों में महाराष्ट्र एकीकरण समिति के प्रभाव वाले उम्मीदवार ज्यादा संख्या में जीतकर आए। 

नगर निकाय और 250 से ज़्यादा मराठी बहुल गाँवों ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा कि उन्हें महाराष्ट्र में मिला लिया जाए। इसके विरोध में 1986 में कर्नाटक में कई जगह हिंसा हुई, जिनमें 9 लोग मारे गए थे।

बेलगाम के लोगों ने माँग की कि उन्हें सरकारी आदेश मराठी भाषा में दिए जाएं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और विवाद चलता रहा। मामला अदालतों तक पहुंच गया।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने कहा था कि कर्नाटक की एक इंच जमीन भी किसी राज्य को देने का सवाल नहीं उठता। 

सत्य हिंदी ऐप डाउनलोड करें