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कभी हवा के झोंके से, कभी बिना उद्घाटन बिहार में गिर रहे हैं पुल

कभी हवा के झोंके से, कभी बिना उद्घाटन बिहार में गिर रहे हैं पुल

बिहार के बेगुसराय में एक पुल उद्घाटन से पहले गिर गया। इसे लेकर करप्शन के तमाम आरोप हैं। इसमें घटिया क्वॉलिटी का क्रंकीट और सीमेंट इस्तेमाल हुआ। बिहार इस समय तमाम वजहों से चर्चा में है। यहां कभी पूरा रेलवे पुल चोरी हो जाता है तो कभी जहरीली शराब से सौ से ज्यादा लोग मर जाते हैंः

जहरीली शराब से मौतों के बाद अब बिहार एक पुल गिरने से चर्चा में है। बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल में बूढ़ी गंडक नदी पर बने पुल का एक हिस्सा रविवार को इसी नदी में गिर गया। इस पुल का अभी उद्घाटन नहीं हुआ था। इस हादसे में किसी की मौत नहीं हुई और न ही कोई घायल हुआ। बिहार में इन्फ्रास्ट्रक्चर में फैले भ्रष्टाचार का यह पुल भी एक नमूना है। इस काम को देखने वाले विभाग आरडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने खुद माना है कि ठेकेदार ने इस पुल के निर्माण में घटिया क्वॉलिटी का कंक्रीट और सीमेंट का इस्तेमाल किया। बिहार सरकार ने फिलहाल इस मामले में कोई एक्शन नहीं लिया है। यह वही बिहार है जहां भागलपुर में मई 2022 में निर्माणाधीन अगुवानी पुल का एक हिस्सा हवा के तेज झोंके से गिर गया था। 

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 206 मीटर लंबे पुल में दो दिन पहले दरारें दिखाई दी थीं। इसके बाद रविवार को पिलर नंबर 2 और 3 के बीच पुल का अगला हिस्सा गिर गया। पुल 13 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाया गया था और इसका उद्घाटन होना बाकी था। 

पुल का निर्माण 2022 में हुआ था, लेकिन लिंक रोड नहीं होने के कारण इसका उद्घाटन नहीं हुआ था। पुल का निर्माण मुख्यमंत्री राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) योजना के तहत किया गया था। वन मां भगवती कंस्ट्रक्शन्स वह फर्म थी जिसने परियोजना को अंजाम दिया था।

एप्रोच रोड न होने से यह पुल क्षेत्र के अधिकांश लोगों के लिए वस्तुतः अनुपयोगी था। हालांकि, इलाके के कुछ लोगों ने ट्रैक्टरों और मोटरसाइकिलों से पुल की ओर जाने वाली मिट्टी की सड़क की मदद से पुल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था।

द टेलीग्राफ के मुताबिक सूत्रों ने कहा कि जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों के कारण इसका एप्रोच रोड नहीं बन पाया है। गनीमत यह रही कि यह हादसा सुबह हुआ, जब कोई भी पुल का इस्तेमाल नहीं कर रहा था। अगर यह दिन में गिरा होता तो शायद कुछ लोगों की मौत हो सकती थी। विष्णुपुर आहो पंचायत के मुखिया सुबोध यादव ने कहा, तथ्य यह है कि रविवार होने की वजह से ट्रैफिक कम था। वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

कुछ दिन पहले पुल के 25 मीटर लंबे पिलर में से एक में दरारें आ गई थीं। राज्य ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) ने इसकी जांच के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भेजी। हालांकि, इससे पहले कि कोई इंतजाम उन दरारों को रोकने या सपोर्ट लगाने का नहीं किया गया। इस वजह से पिलर पर रखे स्पैन नीचे गिर गए।  

आरडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया कि विशेषज्ञों की हमारी टीम ने पुल की जांच की और पाया कि निर्माण में खराब क्वॉलिटी वाले कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया था।एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर द टेलीग्राफ को बताया कि इसमें इस्तेमाल की जाने वाली स्टील की छड़ें एक-दूसरे के ऊपर ठीक से नहीं लगी थीं। वाइब्रेटर मशीन का इस्तेमाल भी नहीं किया गया। यह मशीन यह तय करती है कि ताजा कंक्रीट बिना किसी गैप के अच्छी तरह से बैठ जाए।

अधिकारी ने कहा कि निर्माण फर्म का स्थानीय ग्रामीणों के साथ कुछ विवाद था उसके रोड रोलर को नदी में फेंक दिया गया था। फर्म ने तीन क्रेनें लगाई जिन्होंने नदी से 10 टन के रोड रोलर को तोड़कर बाहर निकाला। अधिकारी ने खुलासा किया, पुल को नुकसान पहुंचने के पीछे यह भी एक कारण था। 

इस बीच, सूत्रों ने कहा कि आरडब्ल्यूडी के अधिकारी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने और खराब गुणवत्ता वाले काम के लिए मामला दर्ज करने की प्रक्रिया में हैं। इसे मरम्मत भी किया जा रहा है।

अगुवानी पुल का किस्सा

मई में भागलपुर के सुल्तानगंज में अगुवानी पुल का एक हिस्सा हवा के तेज झोंके में गिर गया था। यह गंगा नदी पर बनाया जा रहा है। अभी तक अधूरा है। उसका एक हिस्सा गिरने के बाद निर्माण कार्य ठप हो गया है। नवंबर में कनाडा के विशेषज्ञों की टीम इस पुल की जांच करने आई थी। तीन किलोमीटर से भी लंबे इस पुल का शिलान्यास 2014 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। इस प्रोजेक्ट की लागत 1710 करोड़ है। यह पुल पूरा होने के बाद उत्तर बिहार को झारखंड से जोड़ेगा। बहरहाल, आठ साल हो चुके हैं पुल का काम रुका हुआ है। 

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