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मोदी के मंत्री के घर क्यों गए कांग्रेस के मीडिया को-ऑर्डिनेटर?

मोदी के मंत्री के घर क्यों गए कांग्रेस के मीडिया को-ऑर्डिनेटर?

एक तरफ़ जहाँ राहुल गाँधी पीएम मोदी और उनके मंत्रियों से दो-दो हाथ कर रहे हैं वहींं कांग्रेस के एक मीडिया को-ऑर्डिनेटर मोदी के एक मंत्री के बंगले पर हाथों में गुलदस्ता लिए देखे गए।

एक तरफ़ जहाँ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी रफ़ाल विमान ख़रीद, बेरोज़गारी और किसानों की समस्याओं को लेकर पीएम मोदी और उनके मंत्रियों से दो-दो हाथ कर रहे हैं वहींं कांग्रेस के एक मीडिया को-ऑर्डिनेटर मोदी के एक मंत्री के बंगले पर हाथों में गुलदस्ता लिए देखे गए। इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है। कांग्रेस के मीडिया विभाग से इस सवाल का जवाब देते नहीं बन रहा कि पार्टी के मीडिया को-ऑर्डिनेटर मोदी के मंत्री के बंगले पर क्या करने गए थे। मोदी के मंत्री के बंगले पर गुलदस्ते के साथ कैमरे में क़ैद होने वाले कांग्रेस के मीडिया को-ऑर्डिनेटर यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं कि वह वहाँ ग़लती से पहुँच गए थे। उनका यह दावा किसी को पच नहीं रहा। इससे कांग्रेस की अच्छी ख़ासी किरकिरी हो रही है।

'सत्य हिंदी' से बातचीत में रोहन गुप्ता ने बताया कि वह वहाँ अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। इस बीच वहाँ रूट लग गया और सुरक्षाबलों ने उन्हें अंदर जाने को कह दिया। वह अंदर चले गए। जैसे ही उन्हें यह एहसास हुआ कि वह ग़लत जगह आ गए हैं वह फौरन ही वापस बाहर आ गए। लेकिन वह यह नहीं बता पाए कि उन्हें किसी की शादी में जाना था या और कहीं। जब उन्हें याद दिलाया गया कि कुछ देर पहले वह कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल के साथ उनके बंगले में मौजूद थे तो उन्होंने सफ़ाई दी कि वह अहमद पटेल से मिलकर बाहर आए और वहाँ अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। लेकिन अहमद पटेल के घर से वह निकलते वक़्त उनके हाथ में गुलदस्ता नहीं था। जब उनकी गाड़ी उनके पास नहीं थी तो गुलदस्ता उनके पास कहाँ से आया। उनका कहना है कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से कांग्रेस से जुड़ा हुआ है। लिहाज़ा उनकी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्हें इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि कोई उनके बारे में क्या बात कर रहा है। वहीं मंत्री घर कार्यक्रम को कवर करने पहुँचे मीडिया कर्मियों का कहना है कि वहाँ उस समय कोई रूट नहीं लगा था। अगर रूट लगा होता तो मीडिया कर्मियों को भी वहाँ से हटा दिया जाता। ये विरोधाभासी दावे शक पैदा कर रहे हैं।

कांग्रेस मीडिया को-ऑर्डिनेटर वाली घटना गुरुवार रात की है। इस दिन मोदी सरकार के कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के घर पर राजस्थान के सभी बीजेपी सांसदों का डिनर था। इस कार्यक्रम में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को भी आना था। इस लिहाज़ से घटना महत्वपूर्ण थी।

सफ़ाई : ग़लती से चला गया था

लिहाज़ा वहाँ मीडिया का जमावड़ा था। रात को क़रीब 9 और 9:30 के बीच कांग्रेस के मीडिया को-ऑर्डिनेटर रोहन गुप्ता बंगले में गुलदस्ते के साथ मीडिया के कैमरों में कैद हो गए। 9 सेकंड का यह विडियो कांग्रेस कवर करने वाले कुछ पत्रकारों ने ट्वीट कर दिया तो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस पर रोहन गुप्ता ने सफ़ाई दी कि वह गजेंद्र सिंह शेखावत के बगल में रहने वाले कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल से मिलने गए थे। सड़क पर ही थे कि वहाँ पीएम रूट लग गया। सिक्योरिटी फ़ोर्स ने उनसे अंदर जाने के लिए कहा तो ग़लती से वह गजेंद्र सिंह शेखावत के घर चले गए। जैसे ही उन्हें ग़लती का एहसास हुआ वह वहाँ से वापस आ गए। 9 सेकंड के इस विडियो में गजेंद्र सिंह फ़ोन पर बात करते हुए बंगले के अंदर से बाहर आते हुए दिखते हैं और अचानक वापस लौट जाते हैं। इस विडियो में वह बंगले के दरवाजे से बाहर निकलते हुए नहीं दिखे।

 - Satya Hindi

कांग्रेस के मीडिया को-ऑर्डिनेटर रोहन गुप्ता का सोशल मीडिया पर जवाब।

कहीं बहाना तो नहीं बना रहे

दरअसल, गजेंद्र सिंह शेखावत मदर टेरेसा मदर क्रीसेंट पर 22 नंबर के बंगले में रहते हैं। उनके बगल में ही कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल 23 नंबर बंगले में रहते हैं। अहमद पटेल के बंगले के सामने गाड़ियों के खड़ी होने की जगह कम है लिहाज़ा ज़्यादातर गाड़ियाँ 22 नंबर बंगले के सामने ही खड़ी होती हैं। कांग्रेस के सूत्रों का दावा है कि रोहन गुप्ता गजेंद्र सिंह शेखावत से मिलने ही गए थे लेकिन कैमरे में कैद हो जाने के बाद वह ग़लती से वहाँ जाने का बहाना बना रहे हैं। कांग्रेस के प्रत्यक्षदर्शी सूत्रों के मुताबिक़ इस घटना से क़रीब एक घंटा पहले रोहन गुप्ता कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल के साथ उनके बंगले में मौजूद थे और क़रीब 8:30 बजे अहमद पटेल के साथ ही बंगले से बाहर निकले थे। 

  • कांग्रेस के सूत्रों का दावा है कि रोहन गुप्ता की गाड़ी अहमद पटेल के बंगले के अंदर जाती है। लिहाज़ा उनके बाहर उतरने का और ग़लती से शेखावत के घर जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। 
  • यह तर्क इसलिए भी लचर है कि जब वह एक घंटा पहले ही अहमद पटेल से मिल चुके थे तो फिर गुलदस्ता लेकर क्यों उनके पास दोबारा आए। अहमद पटेल के घर कोई ऐसा कार्यक्रम नहीं था जहाँ गुलदस्ते की ज़रूरत हो।

राजनीतिक कार्यक्रम था

वैसे तो राजनीतिक दलों के नेताओं के एक-दूसरे के साथ व्यक्तिगत संबंध होते हैं। पारिवारिक और सामाजिक समारोहों में एक-दूसरे के यहाँ शरीक होना और विशेष मौक़ों पर घर पर आना-जाना लगा रहता है। यह सामान्य शिष्टाचार है। लेकिन उस दिन गजेंद्र सिंह शेखावत के घर ना कोई पारिवारिक कार्यक्रम था और ना ही कोई सामाजिक। यह खाँटी राजनीतिक कार्यक्रम था। राजस्थान के सभी बीजेपी सांसदों को डिनर पर बुलाया गया था। साथ ही इस बात पर चर्चा होनी थी कि पार्टी विधानसभा चुनाव कैसे हारी और लोकसभा चुनाव जीतने के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को भी इस कार्यक्रम में शरीक होना था। यह अलग बात है कि शाह इस दावत में नहीं पहुंचे थे। सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि आख़िर कांग्रेस के मीडिया को-ऑर्डिनेटर को ऐसे मौक़े पर मोदी के मंत्री के घर जाने की क्या ज़रूरत थी। इस सवाल पर कांग्रेस के तमाम प्रवक्ताओं को साँप सूँघ गया है। किसी से जवाब देते नहीं बन रहा।
  • सोशल मीडिया पर अपनी सफ़ाई पेश करने के बाद रोहन गुप्ता भी फँस गए हैं। कांग्रेस के अन्य मीडिया को-ऑर्डिनेटर्स का मानना है कि भले ही उनके गजेंद्र सिंह शेखावत से अच्छे ताल्लुकात होंं लेकिन ऐसे मौक़े पर उन्हें उनके घर नहीं जाना चाहिए था।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जब ख़ुद पीएम मोदी और उनके मंत्रियों से संसद से सड़क तक आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं। तमाम कांग्रेस प्रवक्ता टीवी चैनलों पर बीजेपी के प्रवक्ताओंं के साथ तीखी बहस कर रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रफ़ाल विमान ख़रीद, बेरोज़गारी और किसानों के मुद्दे पर जगह-जगह सवाल पूछ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के मीडिया को-ऑर्डिनेटर जैसे ज़िम्मेदार व्यक्ति का मोदी के मंत्री के बंगले पर मौजूद होना कई तरह के सवाल खड़े करता है। पार्टी नेताओं का मानना है कि ऐसे हालात में राजनीतिक विरोधियों के घर पर जाने में एहतियात बरतनी चाहिए। इस मामले में रोहन गुप्ता के ख़िलाफ़ किसी तरह की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस के अन्य मीडिया को-ऑर्डिनेटर्स का कहना है कि यह मामला पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग के अध्यक्ष रणदीप सुरजेवाला के संज्ञान में लाया जाएगा। किसी भी को-ऑर्डिनेटर के ग़लत आचरण पर कार्रवाई करने का अधिकार आलाकमान के पास सुरक्षित है।

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