यूपी पुलिस ने शुरू की अपने ही लोगों की जाँच, पुलिसकर्मियों से पूछताछ

02:44 pm Jul 05, 2020 | सत्य ब्यूरो - सत्य हिन्दी

अपने 8 जवानों को गंवाने, पूरी फ़ोर्स का मनोबल गिराने और काफी फजीहत होने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने ही लोगों की जाँच शुरू कर दी है। चौबेपुर थाने के पुलिसकर्मियों की जाँच शुरू की जा चुकी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अपराधी को गिरफ़्तार करने की योजना उन तक किसने पहुँचाई थी। 

चौबेपुर थाना प्रभारी विनय तिवारी को निलंबित कर दिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा पूरे थाने की ही जाँच की जा रही है, यानी हर पुलिसकर्मी से पूछताछ की जा रही है।

इस मामले में पुलिस ने विकास दुबे गैंग के दयाशंकर अग्निहोत्री को गिरफ़्तार कर लिया है। गिरफ़्तार बदमाश ने पुलिस को बताया कि गैंग को संभावित पुलिस कार्रवाई की जानकारी पहले ही मिल गई थी।

एनडीटीवी ने कानपुर पुलिस प्रमुख मोहित अग्रवाल के हवाले यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि चौबेपुर थाने के हर कर्मचारी की जाँच हो रही है उनकी कॉल डिटेल का पता लगाया जा रहा है। अगर कोई भी घर का भेदी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। 

उन्होंने एनडीटीवी से कहा, 

'डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्र की अगुवाई में छापामारी के लिए पुलिस की टीम में विनय तिवारी शामिल तो हुए लेकिन उसके घर पहुँचने से पहले ही टीम छोड़कर भाग गए। इसलिए वह शक के दायरे में हैं और उनकी भूमिका की जाँच की जा रही है।'


मोहित अग्रवाल, डीएसपी, कानपुर पुलिस

अग्रवाल ने कहा कि 'अगर पूर्व थाना इंचार्ज विनय तिवारी या चौबेपुर थाने का कोई भी पुलिस कर्मचारी विकास के लिए मुखबिरी करने का दोषी पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ पुलिस कर्मियों की हत्या की साजिश में शामिल होने का भी मुकदमा भी चलाया जाएगा।'  

अग्रवाल ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई को बताया कि पुलिस की 25 टीमें विकास दुबे और उसके साथियों की तलाश में जुटी हुई हैं। ये टीमें उत्तर प्रदेश के कई जिलों में और दूसरे राज्यों में भी भेजी गई हैं। उन्होंने विकास दुबे के बारे में सूचना देने वाले शख़्स के लिए 50 हज़ार का नक़द इनाम भी घोषित किया है। 

दुबे के बारे में कहा जाता है कि उसकी सभी राजनीतिक दलों में अच्छी पकड़ है और वह जिला पंचायत का सदस्य भी रह चुका है। कई पार्टियों के नेता पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनावों में दुबे की मदद लेते रहे हैं।

दुबे का कानपुर के आसपास के इलाक़ों में ख़ौफ़ माना जाता है और कहा जाता है कि उसके पास बदमाशों की एक अच्छी-खासी टीम है। दुबे को कानपुर के रिटायर्ड प्रिंसिपल सिद्धेश्वर पांडे की हत्या में उम्र क़ैद की सजा हो चुकी है। विकास दुबे पर 60 आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं।