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यूपी में घटती बेरोजगारी के दावों के बीच 60 हजार सिपाही भर्ती के लिए 50 लाख आवेदन

यूपी में घटती बेरोजगारी के दावों के बीच 60 हजार सिपाही भर्ती के लिए 50 लाख आवेदन

उत्तर प्रदेश में घटती बेरोजगारी दर के दावों के बीच यह खबर चौंकाने वाली है कि राज्य में पुलिस भर्ती के लिए निकली 60 हजार पोस्ट के लिए 50 लाख आवेदन आए हैं। अभी अक्टूबर में यूपी में रोजगार मुहैया कराने पर एक रिपोर्ट जारी की गई थी। जानिए पूरी बात।

शुक्रवार, 3 जून को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उत्तर प्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स शिखर सम्मेलन के ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह में बोलते हुए, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया था कि उनके शासन में राज्य में बेरोजगारी दर 18 प्रतिशत से गिरकर 2.9 प्रतिशत हो गई है। योगी ने 2017 में यूपी की कमान संभाली थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा फिर से जीती और योगी दोबारा सीएम बने। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले यूपी सरकार ने 60,244 सिपाहियों की भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। 50 लाख से ज्यादा युवकों ने आवेदन किया है। ये भर्ती ऐसे में यूपी सरकार के बेरोजगारी घटने के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है।

यूपी सरकार ने सिपाही भर्ती के आवेदन 17 जनवरी तक मांगे थे। जो आंकड़े अभी तक सामने आए हैं, उसके मुताबिक 1 सिपाही की पोस्ट के 83 दावेदार हैं। करीब 15 लाख महिलाओं ने भी आवेदन किया है। हालांकि महिला सिपाहियों के लिए कुल 12 हजार पद हैं। इस तरह महिला सिपाही के एक पद के लिए 125 दावेदार हैं।

यूपी भर्ती बोर्ड ने अंदाजा लगाया था कि करीब 32 लाख आवेदन आ सकते है और एक या दो पाली में लिखित परीक्षा करा दी जाएगी लेकिन अब कम से कम दो दिनों तक चार पालियों में परीक्षा कराना पड़ेगी। 

यूपी में इतनी बड़ी तादाद में सिपाही भर्ती के लिए आवेदनों का आना बताता है कि राज्य में बेरोजगारी दर घटने के दावों में दम नहीं है। भारत में रोजगार पर मासिक और त्रैमासिक डेटा जारी करने वाले सेंटर फॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार मार्च 2017 में बेरोजगारी दर 2.4 प्रतिशत थी, जब योगी ने मुख्यमंत्री का पद संभाला था।

सीएमआईई डेटा के अप्रैल 2022 का आंकड़ा बताता है कि यूपी में 2.9 प्रतिशत बेरोजगारी दर थी। इससे पता चलता है कि जब आदित्यनाथ ने कार्यभार संभाला था तब बेरोजगारी दर कम थी। इससे पहले, COVID-19 महामारी के बीच, अप्रैल 2020 में बेरोजगारी दर बढ़कर 21.5 प्रतिशत हो गई थी।

हालांकि वार्षिक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के मुताबिक यूपी में 2017-2018 में बेरोजगारी दर 6.2 प्रतिशत थी। सीएमआईई के आंकड़ों से पता चलता है कि यूपी में बेरोजगारी दर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है, लेकिन यह जून 2016 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार के तहत और योगी के सत्ता में आने से कुछ महीने पहले थी। मार्च 2017 में जब भाजपा ने यूपी की सत्ता संभाली तो यह दर 2.4 फीसदी थी। यानी योगी आदित्यनाथ को विरासत में 2.4 फीसदी बेरोजगारी दर मिली थी।

सीएमआईई के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि राज्य में बेरोजगारी दर अप्रैल 2020 में COVID-19 महामारी और लॉकडाउन के दौरान बढ़कर 21.5 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। बेरोजगारी दर में इसी तरह की वृद्धि कई अन्य राज्यों में देखी गई। लेकिन अगर हम महामारी की वजह से यूपी को छूट भी दें दें तो भी दिसंबर 2019 में बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी।

अप्रैल 2022 के बाद से बेरोजगारी दर बढ़कर 3.1 फीसदी हो गई। अगर मार्च 2017 की बेरोजगारी दर की तुलना मई 2022 से करें तो पता चलता है कि बीजेपी सरकार में इसमें बढ़ोतरी हुई है। यह तथ्य सही है कि हरियाणा में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। जहां दिसंबर 2022 में 37.4 फीसदी बेरोजगारी दर है। लेकिन यूपी में सिपाही भर्ती के लिए आए आवेदन से साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी को लेकर किए गए तमाम प्रयास सफल नहीं हो पाए हैं।

यूपी में मौजूदा सिपाही भर्ती प्रक्रिया अगले साल तक चलेगी। लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान इसकी वेकैंसी निकलना और आवेदन मांगा जाना, भी सवाल खड़े कर रहा है। जिस तरह से यूपी में भाजपा सरकार द्वारा रोजगार देने को उछाला जा रहा है, उसकी वास्तविकता यही है कि सिपाहियों की भर्ती अगले साल होगी, लेकिन अभी प्रचार जमकर हो रहा है। इस बीच अगर मामला किसी अदालत में नहीं जाता है या परीक्षा होने के बाद अदालत में जाता है तो भी सिपाहियों की भर्ती लंबे समय तक लटकी रहेगी। क्योंकि राज्य में सरकारी नौकरियों की कई प्रतियोगी परीक्षाएं हुईं लेकिन पर्चा लीक हो जाने या मामला कोर्ट में जाने पर सारी नियुक्ति प्रक्रिया अभी तक रुकी हुई है। 

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