
तेलंगाना के कांचा गचीबावली जंगल पर खतराः विरोध में उतरे छात्र और विपक्षी दल
हैदराबाद यूनिवर्सिटी के बगल में मौजूद जंगल कांचा गचीबावली की जमीन आईटी पार्क के लिए दिए जाने का भारी विरोध हो रहा है। बीआरएस और बीजेपी जंगल को बचाने के लिए चल रहे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। करीब चार सौ एकड़ में फैले इस जंगल को काटकर सरकार ने आईटी पार्क बनाने का इरादा किया है।
HCU students have been beaten up multiple times in the past. Rahul Gandhi has spoken against the atrocities faced by students of various universities across India. He cannot remain silent now. @RahulGandhi
— J (@Telugu90) April 2, 2025
Today, the INC government is trashing students with the police force… pic.twitter.com/XVjR34mN2L
हालांकि इस बात पर काफी हंगामा मच गया है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों से लेकर विपक्ष भी तेलंगाना सरकार के विरोध में उतर आया है। सरकार की इस हरकत के खिलाफ़ हैदराबाद कोर्ट में याचिकाएं भी दायर हो गई हैं जिस पर हाई कोर्ट ने भरोसा दिलाया है कि वे मामले की सुनवाई जल्द से जल्द करेंगे।
इस विवाद की शुरुआत 30 मार्च से हुई। उस दिन तेलंगाना सरकार ने कई जेसीबी मशीनों को हैदराबाद यूनिवर्सिटी से सटे इस जंगल में उतार दिया। तेलंगाना सरकार इस जंगल का सफाया कर ज़मीन को समतल बनाना चाहती है ताकि इसकी नीलामी हो सके। इस पर आई टी पार्क तैयार हो सके।
जैसे ही इन भारी मशीनों ने अपना काम शुरू किया जंगल के जानवर डर गये। सोशल मीडिया पर ऐसी कई तस्वीरें घूम रही हैं जिनमें जानवरों की लाशें नज़र आ रही हैं। इस घटना पर हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच भी गुस्सा फैल गया। यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स विरोध करने के लिए उतर आए। हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार बेशर्मी से इस बेशकीमती ज़मीन पर कब्जा जमा रही है। उन्होंने सरकार पर अतिक्रमण का आरोप भी लगाया है।
गचीबावली स्टेडियम के किनारे तक भी बुलडोजर चल रहे हैं। दक्षिण में यह सरकारी अतिक्रमण इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस तक फैल चुका है। कुछ छात्रों का आरोप है कि यह सिर्फ अतिक्रमण नहीं, दिनदहाड़े सार्वजनिक भूमि की लूट है।
कुछ सूत्रों के मुताबिक इस ज़मीन को 75 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से बेचा जाना है। जब यूनिवर्सिटी ने छात्रों ने इस अतिक्रमण का विरोध किया तो तेलंगाना पुलिस उनके साथ काफी सख्ती से पेश आई। पुलिस ने विरोध कर रहे छात्रों पर डंडे बरसाए। कुछ छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया।
इस मामले में रिटायर्ड वैज्ञानिक कलापाला बाबू राव और पर्यावरण संगठन 'वाटा फाउंडेशन' ने जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने अदालत को बताया कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूमि समतलीकरण किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जंगल को साफ करने के लिए भारी संख्या में खुदाई मशीनें (JCB) तैनात की गई हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह क्षेत्र 'डीम्ड फॉरेस्ट' श्रेणी में आता है।
गौरतलब है कि डीम्ड फॉरेस्ट को कानूनी संरक्षण हासिल होता है और उसे काटा नहीं जा सकता है। वैज्ञानिक बाबू राव ने यह भी दावा किया है कि यह जंगल दुर्लभ पौधों, पक्षियों और जानवरों का आश्रय स्थल है। इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया जाना चाहिए।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर सवाल!
इस घटना पर लोग काफी गुस्से में नज़र आ रहे हैं। लोगों का गुस्सा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और उनकी काँग्रेस पार्टी पर भी उतर रहा है। प्रदेश के पूर्व सीएम के. चंद्रशेखर राव की पार्टी बीआरएस ने आरोप लगाया है कि तेलांगना सरकार अपने फायदे के लिए कुछ भी कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार ने जंगल बचाने के लिए जुटे छात्रों के साथ भी बर्बरता की। पार्टी के मुताबिक कई लड़कियों ने तेलंगाना पुलिस की शिकायत की।उनके अनुसार "लड़कियां रो रही थीं कि उनके कपड़े फाड़ दिए गए हैं, लेकिन उन्होंने उनकी अनदेखी की और उन्हें पुलिस स्टेशन ले गए। करीब 200 लोगों को गिरफ्तार किया गया। रविवार को जब पुलिस अधिकारियों ने विश्वविद्यालय की 400 एकड़ जमीन को समतल करने का काम शुरू किया, तो उन्होंने उन छात्रों पर बहुत कठोरता दिखाई जिन्होंने उन्हें रोकने की कोशिश की।"
कुछ लोग काँग्रेस के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साध रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए इसने कहा, "यह मोहब्बत की दुकान नहीं बल्कि विश्वासघात का बाजार है।" लोग सोशल मीडिया पर राहुल गांधी से सवाल कर रहे हैं कि कई विश्वविद्यालयों में छात्रों पर हुए अत्याचार का विरोध करने वाले राहुल गांधी इस मामले पर चुप नहीं रह सकते। इस मामले में अब तक राहुल गांधी या कॉंग्रेस पार्टी की कोई टिप्पणी नहीं आई है।
रिपोर्टः अणुशक्ति सिंह