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उमा भारती के दबाव में सरकार ने हटाई शराब की दुकान?

उमा भारती के दबाव में सरकार ने हटाई शराब की दुकान?

बीजेपी नेता उमा भारती का शराब विरोधी आंदोलन जोर पकड़ रहा है। उन्होंने कुछ दिनों पहले भोपाल में शराब की जिस दुकान पर पत्थर मारकर शराब की बोतलें तोड़ी थीं, उस दुकान को शिवराज सिंह चौहान सरकार ने हटा दिया है। जिस इलाके में शराब का यह ठेका था, वहां की महिलाएं जश्न मना रही हैं। 

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की तेजतर्रार नेता उमा भारती की ‘दबाव की राजनीति’ काम कर गई है? शिवराज सरकार के आबकारी महकमे ने उमा भारती द्वारा पत्थर बरसाकर बोतलें फोड़ने वाली भोपाल की एक शराब की दुकान को अन्यत्र स्थापित करने का आदेश जारी किया है। यह घटना पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है।

भोपाल के रिहायशी क्षेत्र बरखेड़ा पठानी की एक शराब की दुकान में उमा भारती ने 13 मार्च 2022 को पत्थर फेंका था। उमा भारती द्वारा पत्थर फेंके जाने से इस दुकान में रखीं शराब की बोतलें फूट गई थीं। साध्वी द्वारा पत्थर मारकर शराब की बोतले फोड़े जाने का वीडियो देश भर की मीडिया की सुर्खियां बना था। 

उमा भारती के अप्रत्याशित कदम के बाद साथ चल रही भीड़ भी उद्वेलित हो गई थी। हालांकि हंगामा बड़ा रूप नहीं ले पाया था। पत्थर फेंककर शराब की बोतलें तोड़ने के बाद उमा भारती ने मीडिया से कहा था, ‘बरखेड़ा पठानी के रिहायशी इलाके में स्थापित शराब की दुकान महिलाओं के लिये अनेक तरह की परेशानियों का सबब बनी हुई है। दुकान के आसपास मयकशों के जमघट और शराब पीने के बाद की जाने वाली ओछी हरकतों से महिलाओं का जीवन दूभर हो रहा है।’

महिलाएं रोजगार करती हैं। उनकी आय को निट्ठले पति और परिवार के अन्य लोग दारू पर उड़ा देते हैं। बच्चों के भूखों मरने की नौबत बनती है। उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। पढ़ाई छूट भी जाती है। नित-नए अपराध होते हैं।


- उमा भारती, पूर्व मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश

उमा भारती का यह भी कहना था कि शराब पीने के बाद क्षेत्र में महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाओं में इजाफा हुआ है। शराब पीने के बाद मयकश खुले में और लोगों के घरों के सामने पेशाब करते हैं। अनेक बार महिलाओं को इससे शर्मसार होना पड़ता है।’

उमा भारती के पत्थर फेंककर बोतलें तोड़े जाने की विपक्ष ने प्रशंसा की थी। उमा का हौसला बढ़ाया था। कई लोगों ने सवाल उठाये थे कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा रंगदारी भरे अंदाज में दुकान में पत्थर फेंका जाना कहां तक उचित है? क्यों नहीं उमा भारती के खिलाफ पुलिस ने खुद मुकदमा दर्ज किया!

इस हाई प्रोफाइल और विशुद्ध राजनीतिक मसले पर पुलिस बचाव की मुद्रा में नज़र आयी थी। पुलिस के अफसरों ने यह कहकर अपनी इज्जत बचाई थी कि किसी ने रिपोर्ट ही नहीं कि तो पुलिस मुकदमा किस पर और कैसे कायम कर ले? सत्तारूढ़ दल बीजेपी और सरकार में जिम्मेदार लोग भी गोलमोल जवाब देकर बचते रहे थे।

शिवराज सरकार के आबकारी महकमे ने गत दिवस बरखेड़ा पठानी क्षेत्र की दुकान को मौके से हटाने का आदेश दिया है। विभाग ने कहा है दुकान को अन्यत्र स्थापित कर लिया जाये। विभाग ने अपने आदेश में दुकान को हटाये जाने की वजह, ‘रहवासियों के धरना, प्रदर्शन और लगातार शिकायतों को बताया है।’

विभाग का दावा (रहवासियों की मांग पर दुकान हटाने का आदेश दिया गया है) अपनी जगह है, लेकिन इस सरकारी कदम को छह महीने पुरानी उमा भारती के पत्थरबाजी की घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।

दलील दी जा रही है कि उमा भारती के दबाव के आगे सरकार को ‘झुकना’ पड़ा है। विभाग के आदेश के बाद क्षेत्र की महिलाएं खासी खुश हैं। उन्होंने मिठाइयां बांटी हैं। जश्न मनाया है। उमा भारती को धन्यवाद दिया गया है। हालांकि उमा भारती की प्रतिक्रिया इस मामले में अभी सामने नहीं आयी है।  

शराब बंदी की मांग कर रही हैं उमाः पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने भोपाल की दुकान में पत्थर फेंकने के अलावा ओरछा में भी पिछले दिनों शराब की दुकान में गोबर फेंककर विरोध दर्ज कराया था। उमा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखे हैं। केन्द्र के नेताओं और पार्टी की केन्द्रीय इकाई पदाधिकारियों से भी खतो-खिताबत की है।

उधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शराब बंदी को लेकर तो कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन यह अवश्य कहा है, ‘वे भी नशामुक्ति के पक्षधर हैं।’ मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है, ‘नशामुक्ति के लिये उमा भारती के साथ मिलकर राज्यव्यापी अभियान छेड़ेंगे।’

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