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एमपी में शोध: कोरोना संक्रमित हुए बच्चों में हेपेटाइटिस बीमारी 

एमपी में शोध: कोरोना संक्रमित हुए बच्चों में हेपेटाइटिस बीमारी 

कोरोना संक्रमण ठीक होने के बाद भी इसके बेहद ख़तरनाक असर की रिपोर्टें लगातार आ रही हैं। जानिए, मध्य प्रदेश के एक शोध में बच्चों में हेपेटाइटिस बीमारी को लेकर क्या जानकारी सामने आई है।

ऐसी रिपोर्टें कम ही आई हैं कि कोरोना संक्रमण बच्चों के लिए घातक साबित हुआ हो, लेकिन अब एक शोध में सामने आया है कि कोरोना संक्रमित हुए बच्चों में हेपेटाइटिस के मामले सामने आए हैं। हेपेटाइटिस बीमारी भी अलग तरह की सामने आई है। यानी कोरोना ठीक होने के उनमें दूसरी बीमारियों का ख़तरा पैदा हो गया है। 

यह शोध मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में किया गया है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च, चंडीगढ़ के मेडिक्स की एक टीम ने कहा है कि 2021 में अप्रैल-जुलाई में कोविड पॉजिटिव आए 475 बच्चों की जाँच में 37 यानी क़रीब 8% हेपेटाइटिस से संक्रमित पाए गए। इस हेपेटाइटिस को कोविड एक्वायर्ड हेपेटाइटिस यानी CAH नाम दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 बच्चों में यह गंभीर बीमारी थी।

क्या हैं लक्षण

रिपोर्टों में कहा गया है कि कोविड एक्वायर्ड हेपेटाइटिस यानी सीएएच दूसरी हेपेटाइटिस से अलग तरह की बीमारी है।

सीएएच में लक्षणों में मतली, भूख न लगना, कमजोरी और हल्का बुखार शामिल हैं। इसमें सूजन को साफ़ तौर पर चिह्नित नहीं किया गया है, हालांकि ट्रांसएमिनेस नामक यकृत एंजाइम का एक उच्च स्तर देखा गया है। सामान्य हेपेटाइटिस में मिलने वाले वायरस सीएएच में नहीं पाए गए हैं। 37 बच्चों में से सभी ठीक हो गए। हालाँकि गंभीर हेपेटाइटिस जैसे कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, रिहाइड्रेशन, बुखार नियंत्रण और विटामिन के लिए नियमित उपचार लगभग सभी के लिए पर्याप्त थे।

हालाँकि पिछले दो वर्षों में भारत के विभिन्न हिस्सों से छिटपुट रिपोर्टें हेपेटाइटिस के मामले की आती रही हैं, लेकिन इस ताज़ा शोध को देश में सिंड्रोम के पैमाने को निर्धारित करने वाली पहली व्यवस्थित जांच बताया गया है।

'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर और शोध के लेखक सुमित रावत ने कहा, 'हमने हेपेटाइटिस के मामलों में एक अजीबोगरीब वृद्धि देखी। आमतौर पर मानसून की शुरुआत से हेपेटाइटिस के मामलों में वृद्धि होती है। लेकिन पिछले साल हमने इसे अप्रैल, या गर्मियों में, कोविड पॉजिटिव बच्चों में देखना शुरू किया। उनमें से ज़्यादातर वास्तव में अपने कोविड से उबर चुके थे।'

उन्होंने कहा कि 'हेपेटाइटिस ए और ई के मामले कुछ गांवों या क्षेत्रों में आते हैं, बी साल भर मौजूद रहता है और डी आमतौर पर माता-पिता से या रक्त चढ़ाने से होता है। पिछले साल डेल्टा लहर के बाद हमने सामान्य घटना से अलग पूरे राज्य से ऐसे मामले देखे।'

शोध कर्ताओं की टीम ने कई अलग-अलग जाँचों के बाद अनुमान लगाया कि हेपेटाइटिस संभवतः उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली के असामान्य व्यवहार के कारण था। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों में जो सामान्य था, वह बहुत उच्च स्तर का कोविड-एंटीबॉडी था। रावत और उनके सहयोगियों ने पिछले हफ्ते प्री-प्रिंट रिपोजिटरी, बायोरेक्सिव में अपने निष्कर्षों की सूचना दी है, और वे एक पीअर रिव्यू जर्नल में प्रकाशन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

बता दें कि ऐसे ही मामलों को लेकर डब्ल्यूएचओ ने पिछले हफ्ते कहा था कि 'अज्ञात मूल के हेपेटाइटिस के 348 संभावित मामलों की पहचान की गई, और इसके मुख्य संदिग्ध कारण कोविड​​​-19 संक्रमण के साथ एडेनोवायरस को माना गया।

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