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60 से ऊपर, कोमोर्बिडिटीज वाले 45+ उम्र वालों को वैक्सीन मार्च से 

60 से ऊपर, कोमोर्बिडिटीज वाले 45+ उम्र वालों को वैक्सीन मार्च से 

देश में फिर से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच कोरोना टीकाकरण का दूसरा अभियान 1 मार्च से शुरू होगा। इस चरण में 60 से ज़्यादा उम्र के लोगों और कोमोर्बिडिटीज वाले 45 से ज़्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी। 

देश में फिर से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच कोरोना टीकाकरण का दूसरा अभियान 1 मार्च से शुरू होगा। इस चरण में 60 से ज़्यादा उम्र के लोगों और कोमोर्बिडिटीज वाले 45 से ज़्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी। कोमोर्बिडिटीज से मतलब वैसे लोगों से है जो एक साथ कई बीमारियों से जूझ रहे हों और कोरोना जैसे वायरस के प्रति संवेदनशील हों।

जनवरी की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पहले चरण में देश में क़रीब 3 करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स और स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन लगाई जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि फिर 60 साल से ज़्यादा उम्र के बुजुर्गों और कोमोर्बिडिटीज वाले लोगों को टीका लगाया जाएगा। एक मार्च से अब टीकाकरण अभियान के इस दूसरे चरण में इन्हें ही टीका लगाया जाएगा। 

इस संबंध में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा कि अभी तक टीकाकरण में सबकुछ उम्मीदों के अनुसार चल रहा है इसलिए अब एक मार्च से इसका दूसरा चरण शुरू किया जाएगा। 

जावड़ेकर ने कहा कि 10 हज़ार सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और 20 हज़ार से ज़्यादा निजी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीका लगवाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 10 हज़ार सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीका लगवाने वालों को मुफ़्त में टीका लगाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने साफ़ किया कि प्राइवेट अस्पतालों में टीका लगवाने पर शुल्क देना होगा। इस टीके के लिए कितना पैसा देना होगा, इसके बारे में बाद में सरकार घोषणा करेगी। 

कहा जा रहा है कि इस चरण में क़रीब 27 करोड़ लोगों को टीका लगाया जाएगा। इसमें से 60 से ज़्यादा उम्र के क़रीब 10 करोड़ लोगों को टीका लगाया जाएगा। 

बता दें कि जनवरी की शुरुआत में भारत में दो टीके- कोविशील्ड और कोवैक्सीन को आपात मंजूरी मिली थी। तीन जनवरी को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया यानी डीसीजीआई ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन टीके को मंजूरी दी थी। और जब देश में टीकाकरण अभियान 16 जनवरी से शुरू किया जाने वाला था तब प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत में अगले कुछ महीनों में 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी। पहले चरण में फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाया जाना तय किया गया था। तब समझा गया था कि क़रीब 3 करोड़ लोगों को टीका लगाया जाएगा। आज सुबह तक 1.21 करोड़ लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। 

 - Satya Hindi

टीकाकरण अभियान का दूसरा चरण ऐसे वक़्त में शुरू हो रहा है जब देश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। केंद्र ने 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उच्च स्तरीय टीमें भेजी हैं। केंद्र ने कोरोना फैलने से रोकने के लिए किए गए उपायों और नियमों पर ढिलाई बरतने पर संक्रमण के फिर से तेज़ी से बढ़ने की चेतावनी दी है। वह भी ऐसे वक़्त पर जब नये क़िस्म के कोरोना के संक्रमण देश में आ चुके हैं। भारत में अभी तक कोरोना की दूसरी लहर नहीं आई है और इसलिए इसको लेकर आशंकाएँ भी जताई जा रही हैं। दुनिया के कई देशों में संक्रमण की दूसरी लहर आई है और पहले से कहीं ज़्यादा घातक भी।

इन्हीं हालातों के बीच अलग-अलग विषयों की विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीमों को महाराष्ट्र, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और जम्मू व कश्मीर में भेजा गया है। प्रत्येक टीम का नेतृत्व स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी कर रहे हैं।

इन टीमों को राज्य प्रशासन के साथ मिलकर काम करना है और संक्रमण के मामलों के बढ़ने के कारणों की जानकारी लेनी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि वे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे और उन क़दमों को उठाएँगे जिससे कि संक्रमण फैलने की कड़ी को तोड़ा जा सके। राज्यों को संबंधित ज़िलों के अधिकारियों के साथ उभरती स्थिति की नियमित समीक्षा करने के लिए कहा गया है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब और जम्मू और कश्मीर को पत्र भी लिखा है। उन राज्यों में आरटी-पीसीआर परीक्षणों के अनुपात में गिरावट के बावजूद हर रोज़ संक्रमण के मामलों में वृद्धि हुई है।

केंद्र ने इन राज्यों को आरटी-पीसीआर परीक्षण बढ़ाने और दोनों तरह के परीक्षणों को सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों में प्रमुखता से करने के लिए कहा है।

सरकार का यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे कई राज्यों में फिर से संक्रमण बढ़ रहा है। महाराष्ट्र के अमरावती ज़िले में तो लॉकडाउन भी लगाना पड़ा है। कर्नाटक ने केरल से प्रवेश करने वाले कई मार्गों को बंद कर दिया है। महाराष्ट्र से कर्नाटक में जाने वाले लोगों को कोरोना रिपोर्ट दिखाने के बाद ही प्रवेश करने दिया जा रहा है।

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