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असम: सफीकुल की 'हिरासत में मौत', पत्नी पर यूएपीए, बेटी गिरफ़्तार

असम: सफीकुल की 'हिरासत में मौत', पत्नी पर यूएपीए, बेटी गिरफ़्तार

बीजेपी शासित असम में एक मुसलिम शख्स की हिरासत में मौत का आरोप लगा, आक्रोशित भीड़ ने प्रदर्शन किया, थाने में आग लगा दी तो अब उसकी पत्नी पर सख़्त यूएपीए क्यों लगाया? नाबालिग बेटी को गिरफ़्तार क्यों किया?

असम के नगांव में जिस सफीकुल इसलाम की 'हिरासत में मौत' का आरोप लगाया गया अब उनकी पत्नी सहित पाँच लोगों पर यूएपीए लगाया गया है। पुलिस को उन पर आतंकवादियों से संबंध होने का संदेह है। सफीकुल की नाबालिग लड़की को भी गिरफ़्तार किया गया है। रविवार को इनके घरों पर 'अतिक्रमण के ख़िलाफ़ कार्रवाई' के नाम पर बुलडोजर चलाकर ढहा दिया गया है। दरअसल, पुलिस का आरोप है कि उन्होंने सफीकुल की हिरासत में मौत का आरोप लगाते हुए पुलिस थाने में आग लगा दी थी। मोटे तौर पर उन पर ये कार्रवाइयाँ थाने में आग लगाने के कारण की जा रही हैं। 

यह मामला मछली व्यापारी सफीकुल इसलाम से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार सलोनाबोरी गांव के एक मछली व्यापारी सफीकुल इसलाम को शुक्रवार रात इस शिकायत के आधार पर पुलिस स्टेशन लाया गया था कि वह शराब के नशे में था। बाद में अगले दिन ख़बर आई कि सफीकुल की मौत हो गई है। मौत के कारण बनने वाली घटनाओं पर विवाद है। पुलिस ने दावा किया कि उसकी पत्नी द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद उसकी मृत्यु हो गई। जबकि मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि उसने उसे अस्पताल में मृत पाया।

हिरासत में मौत का आरोप लगाते हुए सफीकुल के गांव सलोनाबोरी के लोगों की भीड़ ने शनिवार दोपहर ढिंग क्षेत्र में बटाद्रवा पुलिस स्टेशन के एक हिस्से में आग लगा दी थी।

अब इस पूरे मामले में तीन एफ़आईआर दर्ज की गई हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, सफीकुल की 'हिरासत में मौत' के संबंध में अप्राकृतिक मौत का मामला; थाने में आगजनी का मामला; और चूँकि पुलिस को संदेह है कि आरोपियों के 'आतंकवाद से संबंध' हैं, इसलिए एक यूएपीए का मामला है। 

पीड़ित की पत्नी और बेटी को गिरफ़्तार किए जाने को लेकर पुलिस अधिकारी ने बयान दिया है। नगांव की एसपी लीना डोले ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'वीडियो फुटेज में पत्नी और बेटी दोनों को पुलिस स्टेशन में आग लगाते देखा जा सकता है। गिरफ्तार किए गए अन्य लोग भी (मृतक के) रिश्तेदार हैं। नाबालिग को किशोर न्याय के नियमों के तहत गिरफ्तार किया गया है। हम उसे कानून के उल्लंघन में एक बच्चे के रूप में मान रहे हैं।'

उन्होंने कहा, 'हमें आरोपी व्यक्तियों की कई आपराधिक गतिविधियों के बारे में सूचित किया गया है… हमें संदेह है आतंकवादी संबंध भी हैं, और यह पुष्टि करने के लिए बारपेटा और बोंगाईगांव जिलों में पुलिस से संपर्क किया है कि क्या उनमें से कोई अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) से जुड़ा हुआ है।' रिपोर्ट के अनुसार एबीटी बांग्लादेश में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है। मार्च के बाद से असम पुलिस ने बारपेटा और बोंगाईगांव जिलों में एबीटी से कथित संबंधों को लेकर कम से कम 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। एनआईए भी मामले की जांच कर रही है। 

एसपी ने कहा है कि सफीकुल की मौत की भी जाँच की जा रही है। लेकिन, अब तक सफीकुल की मौत के मामले में वैसी कोई प्रगति नहीं हुई है जबकि उनकी मौत पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

असम के पुलिस महानिदेशक ने एक बयान में कहा है कि 'सफीकुल को रिहा कर दिया गया और शनिवार सुबह उसकी पत्नी को सौंप दिया गया। उसकी पत्नी ने उसे कुछ खाना-पानी भी दिया। बाद में उसने बीमारी की शिकायत की और उसे एक के बाद एक दो अस्पतालों में ले जाया गया। दुर्भाग्य से उसे मृत घोषित कर दिया गया।'

पुलिस के इस दावे को सफीकुल के परिवार वालों ने खारिज किया है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, उनके परिवार वालों ने दावा किया कि बटाद्रवा स्टेशन पर पुलिस ने उसकी रिहाई के लिए 10,000 रुपये और एक बत्तख की रिश्वत की मांग की थी। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों ने कहा कि सफीकुल की पत्नी शनिवार की सुबह बत्तख लेकर थाने पहुंची थी। ग्रामीणों ने कहा, 'जब वह बाद में पैसे लेकर लौटी, तो उसे पता चला कि उसके पति को नगांव सिविल अस्पताल ले जाया गया है। वहां पहुंचने के बाद उसने उसे मृत पाया।' 

इस बीच विपक्षी एआईयूडीएफ और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने सोमवार को गांव का दौरा किया और राज्य में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एआईयूडीएफ़ विधायक अशरफुल हुसैन ने कहा कि यह घटना पुलिस की 'विफलता' को दर्शाती है और न्यायिक जाँच की मांग की। उन्होंने कहा, 'अगर पुलिस को इस तरह की छूट के साथ क़ानून का दुरुपयोग करने की अनुमति है तो अदालत और संविधान किसलिए हैं?' तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कहा, 'क़ानून को अपना काम करने की अनुमति क्यों नहीं है? यह बीजेपी राज है या हिटलर राज?'

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