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डीएसजीपीसी चुनाव में जीत से पंजाब में अकाली दल को होगा फ़ायदा?

डीएसजीपीसी चुनाव में जीत से पंजाब में अकाली दल को होगा फ़ायदा?

दिल्ली में सिख समुदाय जिसके साथ खड़ा रहता है, उसका असर पंजाब में भी थोड़ा-बहुत ज़रूर होता है। 

पंजाब के विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (बादल) को बूस्टर डोज मिली है। पार्टी ने सिख राजनीति के लिहाज से बेहद अहम दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) के चुनाव में जीत हासिल की है। उसे 46 में से 27 सीटों पर जीत मिली है। मंजीत सिंह जीके की जागो पार्टी को तीन सीटों पर जीत मिली जबकि अकाली दल (दिल्ली) को 14 सीटों पर। पंजाब में छह महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं और अकाली दल ने जीत के लिए पूरा जोर लगाया हुआ है।

क्यों अहम हैं डीएसजीपीसी चुनाव?

दिल्ली में एक बड़ी आबादी सिखों और पंजाबियों की है। इनकी बहुत बड़ी रिश्तेदारी पंजाब में है और कारोबारी रिश्ते भी हैं। डीएसजीपीसी के नतीजों को इस बात का संकेत भी माना जाता है कि दिल्ली का सिख समुदाय किसके साथ खड़ा है। हालांकि डीएसजीपीसी चुनाव में सिखों को ही वोट देने का हक़ है। 

दिल्ली में सिख समुदाय जिसके साथ खड़ा रहता है, उसका असर पंजाब में भी थोड़ा-बहुत ज़रूर होता है। इसलिए अकाली दल तो खुलकर और कांग्रेस, बीजेपी भी हमेशा से पीछे दरवाज़े से अपने सिख उम्मीदवारों को जिताने के लिए पूरा जोर लगाते हैं। 

किसान आंदोलन में डीएसजीपीसी 

दिल्ली के बॉर्डर्स पर चल रहे किसानों के आंदोलन में डीएसजीपीसी पिछले 9 महीने से लगातार लंगर चला रही है। डीएसजीपीसी के चुनाव में जीत को पंजाब के चुनाव में यह कहकर भुनाया जाता है कि पंथक या धार्मिक मसलों पर सिख इस पार्टी के साथ हैं और चूंकि ये लोग विधानसभा चुनाव में भी वोट देते हैं, इसलिए दिल्ली में भी इनकी अहमियत बढ़ जाती है। 

अकाली दल की जीत के बाद इसके प्रधान सुखबीर सिंह बादल भी बेहद ख़ुश दिखाई दिए और उन्होंने कहा कि ये तो बस तूफ़ान की शुरुआत है और पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी बहुत पीछे रह जाएंगे। 

हालांकि डीएसजीपीसी के चुनाव में अकाली दल को बड़ी हार मिली क्योंकि निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा चुनाव हार गए। उन्हें अकाली दल (दिल्ली) के नेता हरविंदर सिंह सरना ने पंजाबी बाग सीट से हराया। हालांकि वह फिर से अध्यक्ष बन सकते हैं क्योंकि उनके दल के ज़्यादा सदस्य चुनाव जीते हैं। 

सुखबीर बादल ने कहा कि अकाली दल (दिल्ली) को पंजाब की कांग्रेस सरकार मदद कर रही थी जबकि मंजीत सिंह जीके की जागो पार्टी को बीजेपी का समर्थन हासिल था।

बादल ने दावा किया कि कांग्रेस ने पंजाब के पुलिस अफ़सरों को यहां तैनात किया था क्योंकि परमजीत सरना मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के पंथक सलाहकार हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के बूथ मैनेजरों को डराया गया और छापेमारी की गई। 

डीएसजीपीसी दिल्ली के गुरुद्वारों की देखरेख के अलावा कई शिक्षण संस्थान भी चलाती है और सिख धर्म से जुड़े पंथक मसलों को उठाती है। 

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