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राजस्थान में रिश्वतखोरी के आरोप में 2 अधिकारी गिरफ्तार

राजस्थान में रिश्वतखोरी के आरोप में 2 अधिकारी गिरफ्तार

बड़े-बड़े नेताओं को गिरफ़्तार करने और छापे मारने के लिए सुर्खियों में रहे ईडी के अधिकारी ही अब राजस्थान में गिरफ्तार हो गए। जानिए, किस आरोप में राजस्थान की एसीबी ने कार्रवाई की।

राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने गुरुवार को केंद्रीय एजेंसी ईडी के एक अधिकारी और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर 15 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है।

कांग्रेस शासित राजस्थान में भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी एसीबी ने कहा है कि एसीबी की एक टीम ने दो ईडी निरीक्षकों को 15 लाख रुपये लेते हुए पकड़ा। एसीबी ईडी निरीक्षकों के परिसरों की तलाशी ले रही है। एसीबी के अतिरिक्त महानिदेशक हेमंत प्रियदर्शी के अनुसार एक व्यक्ति ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि इंफाल, मणिपुर में ईडी के एक प्रवर्तन अधिकारी यानी ईओ नवल किशोर मीणा 17 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे।

रिपोर्ट के अनुसार इंफाल में एक चिटफंड घोटाले में शिकायतकर्ता की संपत्ति कुर्क न करने और उसे गिरफ्तार न करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी। प्रियदर्शी ने कहा कि शिकायत की पुष्टि करने के बाद जयपुर में एसीबी के उप महानिरीक्षक डॉ. रवि के नेतृत्व में एक टीम ने मीणा और उसके साथी बाबूलाल मीणा को 15 लाख रुपये की रिश्वत लेते समय गिरफ्तार कर लिया। 

नवल किशोर और बाबूलाल मीणा दोनों जयपुर के बस्सी के मूल निवासी हैं। कांग्रेस ने भी कहा है कि राजस्थान में ईडी के अधिकारी घूस लेते पकड़े गए। 

कांग्रेस ने ट्वीट किया है, 'ये दोनों 15 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए। ये ईडी से जुड़े एक मामले को रफा-दफा करने के लिए 17 लाख की घूस मांग रहे थे।

कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है, "जयपुर में ईडी का अफसर 15 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ़्तार हुआ है। इसीलिए मैं बार-बार कह रहा हूँ कि गलियों-गलियों में घूम रहे इन ईडी अफ़सरों की गाड़ी की जरूर जाँच की जाए। छापों की आड़ में कहीं ये 'कमल छाप के स्टार प्रचारक' बनकर तो नहीं घूम रहे हैं?"

बता दें कि ईडी ने गुरुवार को ही राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बेटों को समन भेजा है। इसने कुछ दिन पहले ही खुद डोटासरा के घर की तलाशी ली थी। विदेशी मुद्रा नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में 30 अक्टूबर को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव से नौ घंटे तक पूछताछ की थी।

25 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक एक महीने पहले ईडी की कार्रवाई को गहलोत सरकार ने राजनीतिक प्रतिशोध बताया था। गहलोत ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा कथित दुरुपयोग के कारण केंद्रीय एजेंसियों ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है।

उन्होंने कहा था, 'केंद्रीय एजेंसियों की अब कोई विश्वसनीयता नहीं रह गई है। यह चिंताजनक स्थिति है। यह मेरे बेटे या राज्य कांग्रेस अध्यक्ष के बारे में नहीं है। इसने आतंक मचा रखा है देश में।'

राष्ट्रीय राजधानी की शराब नीति मामले में ईडी की पूछताछ का सामना करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित विपक्षी दलों और नेताओं ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार 2024 में चुनाव से पहले उन्हें निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।

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