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पीएम, राष्ट्रपति, सेना प्रमुख, विपक्ष से लेकर जज तक, 10 हज़ार लोगों के ख़ुफ़िया डेटा इकट्ठा कर रहा है चीन

पीएम, राष्ट्रपति, सेना प्रमुख, विपक्ष से लेकर जज तक, 10 हज़ार लोगों के ख़ुफ़िया डेटा इकट्ठा कर रहा है चीन

चीन के एक बडे नापाक इरादे का खुलासा हुआ है।  चीन की एक कंपनी भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायधीश, सेना अध्यक्ष, सोनिया गांधी, उद्योगपति रतन टाटा समेत तक लगभग 10 हज़ार लोगों के बारे में वो खुफिया जानकारी इकट्ठा कर रही थी। 

चीन के एक बडे नापाक इरादे का खुलासा हुआ है।  चीन की एक कंपनी भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायधीश, सेना अध्यक्ष, सोनिया गांधी, उद्योगपति रतन टाटा समेत तक लगभग 10 हज़ार लोगों के बारे में  खुफिया जानकारी इकट्ठा कर रही थी। इस चीनी कंपनी ने इन लोगों के बारें तमाम तरह की जानकारी इकठ्ठा कर रही थी और उनका डाटा बैंक बना रही थी । इस कंपनी की नज़र कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर भी थी।  इंडियन एक्सप्रेस ने एक ख़बर में यह दावा किया है। 

सब पर थी चीन की निगाहें

ऐसे समय में जब कि सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव है और दोनों सेनाएँ लद्दाख में आमने सामने हैं, और चीन भारत की ज़मीन पर कब्जा किये बैठा है, यह खबर चीनी कंपनी की मंशा पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करती है। यह कंपनी न केवल कि चीफ़ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ़ जनरल बिपिन रावत बल्कि थल सेना और वायुसेना के प्रमुखों के अलावा कम से कम 15 पूर्व सेना प्रमुखों के डाटा भी एकत्रित किए रही थी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबडे से लकर उनके भाई शरद बोबडे और जस्टिस ए. एम. खानविलकर पर भी चीनी कंपनी की नज़र थी। लोकपाल जस्टिस पी. सी, घोष और सीएजी जी. सी. मुर्मू पर भी नज़र रखी गई। उद्योगपति रतन टाटा और गौतम अडानी के डाटा भी खंगाले गये। 

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े हैं तार

मुख्यमंत्रियों में पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी, पंजाब के कैप्टन अमरिंदर सिंह, राजस्थान के अशोक गहलोत, महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे और मध्य प्रदेश के शिवराज सिंह चौहान निशाने पर थे। इसके अलावा लगभग पूरा केंद्रीय मंत्रिमंडल ही निशाने पर था। राजनाथ सिंह, रविशंकर प्रसाद, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी, पीयूष गोयल के डाटा कंपनी ने चुराए। 

शेनजेन की कंपनी ज़ेनहुआ डाटा इनफॉ़र्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनी ने इन तमाम लोगों के ग्लोबल डाटा ले लिए हैं और इन्हें 'फ़ॉरन टार्गेट' कह कर चिन्हित किया है। हालांकि यह कंपनी निजी है, लेकिन इसके तार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े हुए हैं।

बता दें कि चीन की राजनीतिक प्रणाली के अनुसार देश पर शासन इस पार्टी का ही है और दूसरे सभी लोग इससे किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। इस खबर के आने के बाद इस कंपनी की वेबसाइट को हटा लिया गया है।

ज़ेनहुआ के 'फ़ॉरन टार्गेट' में समाज के लगभग हर वर्ग के लोग हैं, राजनेता, जज, वैज्ञानिक, अकादेमी से जुड़े लोग, पत्रकार, खिलाड़ी, एक्टर, धर्म गुरू और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर तक। आतंकवाद, भ्रष्टाचार और तस्करी में जुड़े लोग तक पर नज़र रखी गई है।

चीन का इनकार

दूसरी ओर भारत में चीनी दूतावास ने इसमें सरकार की किसी तरह की भूमिका से इनकार किया है। इंडियन एक्सप्रेस का कहना है कि चीनी दूतावास ने कहा है, 'चीन ने किसी भी कंपनी या व्यक्ति को दूसरे देशो से किसी का डाटा, किसी तरह का आंकड़ा और कोई गुप्त जानकारी लेने से कभी नहीं कहा है न ही यह किसी को ऐसा करने के लिए कह सकता है।'

इंडियन एक्सप्रेस ने कहा है कि इस चीनी कंपनी ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात से भी डाटा चुराए हैं। यह कंपनी गुआंगदांग प्रांत के शेनज़ेन में स्थित है।

शेनजेन में पढ़ा चुके वियतनामी नागरिक क्रिस्टोफ़र बॉल्डिंग ने ये जानकारियाँ द इंडियन एक्सप्रेस, द ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशिल रीव्यू, इटली के अख़बार अल फोगलियो और लंदन के अख़बार द डेली टेलीग्राफ़ को दी है। 

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