बिहार राजग टूटेगा? बीजेपी से दूर होंगे कुशवाहा, पासवान?

06:01 pm Nov 27, 2018 | सत्य ब्यूरो - सत्य हिन्दी

सीट बंटवारे पर फंसा था पेच

बिहार में लंबे समय से इस बात को लेकर पेच फंसा था कि कौन सा राजनीतिक दल कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा। दरअसल, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से गठबंधन टूटने के बाद बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने वाली जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के साथ आने के बाद से ही सीटों के बंटवारे को लेकर अनिश्चितता का माहौल था। इससे राजग गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा), लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) बेहद परेशान थे। 2014 में जदयू राजग गठबंधन के साथ नहीं थी।रालोसपा और लोजपा की परेशानी तब और ज्यादा बढ़ गई जब 26 अक्टूबर को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और सीएम नीतीश कुमार ने दिल्ली में बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। अब रालोसपा और लोजपा इस बात को लेकर परेशान हैं कि कहीं उन्हें पिछले बार से कम सीटों पर तो चुनाव नहीं लड़ना पड़ेगा।

तेजस्वी से मिले कुशवाहा

अमित शाह और सीएम नीतीश कुमार की घोषणा के बाद रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात कर बीजेपी पर दबाव बढ़ा दिया। लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के बेटे और सांसद चिराग पासवान ने भी तेजस्वी यादव से फ़ोन पर बातचीत की है। लोजपा की बिहार इकाई के प्रमुख पशुपति कुमार पारस ने कहा है कि उनकी पार्टी को वही सात सीटें चाहिए जो उन्हें पिछली बार मिली थीं। रालोसपा के राष्ट्रीय महासचिव माधव आनंद ने भी उम्मीद जताई है कि उन्हें तीन से ज़्यादा सीटें मिलेंगी।

इससे यह साफ़ है कि बीजेपी के लिए बिहार में हालात आसान नहीं होंगे। साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 22 सीटों पर जीत मिली थी। जबकि लोजपा ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 6 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। रालोसपा ने 3 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 3 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। लेकिन अब जदयू के साथ आने से सारी बात बिगड़ गई है।

कम सीटें नहीं चाहते सहयोगी

रालोसपा और लोजपा की मांग है कि उन्हें पिछली बार के कम सीटें नहीं दी जानी चाहिए। लेकिन जदयू के साथ आने के बाद ऐसा संभव नहीं है। बीजेपी की मुसीबत यह भी है कि आखिर वह अपने कितने सांसदों का टिकट काटेगी। 40 सीटों में से 2014 के फार्मूले पर अगर रालोसपा को 3 और लोजपा को 7 सीटें दी जाती हैं तो बचती हैं 30 सीटें। अब इसमें से 22 सांसद उसके अपने हैं और जदयू से बातचीत आधी-आधी सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर हुई है। ऐसे में यह तय है कि बीजेपी को भयंकर बगावत का सामना करना पड़ेगा।पिछले लोकसभा चुनाव में जदयू ने कांग्रेस और राजद गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और उसे महज 2 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। यह तय है कि अगर रालोसपा और लोजपा को उनके मनमुताबिक सीटें नहीं मिलती हैं तो दोनों राजग का साथ छोड़ देंगे। अगर बीजेपी उन्हें मनमुताबिक सीटें देती है तो उसे अपने सांसदों का टिकट काटना पड़ेगा और वे बगावत कर मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में उसे लोकसभा सीटों को लेकर नुकसान होना तय है।