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आख़िरकार हुआ एलान, सिद्धू बने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष 

आख़िरकार हुआ एलान, सिद्धू बने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष 

कांग्रेस हाईकमान ने आख़िर नवजोत सिंह सिद्धू के नाम का एलान कर ही दिया। सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है।

कांग्रेस हाईकमान ने आख़िरकार नवजोत सिंह सिद्धू के नाम का एलान कर ही दिया। सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है। रविवार रात को किए गए इस एलान में चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की भी घोषणा की गई है। माना जा रहा है कि इस एलान के बाद पंजाब कांग्रेस में चल रहे झगड़े का अंत होगा और पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पूरी ताक़त के साथ जुटेगी क्योंकि सिद्धू बनाम कैप्टन अमरिंदर सिंह के झगड़े का कारण उसे ख़ासा सियासी नुक़सान हो चुका है। 

पंजाब में सात महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं और किसान आंदोलन के कारण राज्य का सियासी माहौल बेहद गर्म है। 

जिन लोगों को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है, उनमें संगत सिंह गिलजियां, सुखविंदर सिंह डैनी, पवन गोयल और कुलजीत सिंह नागरा का नाम शामिल है। 

इससे पहले शुक्रवार और शनिवार को दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक का माहौल बेहद गर्म रहा। शनिवार को राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा के दिल्ली स्थित आवास पर पंजाब कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक हुई और शुक्रवार को बाजवा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी मिले थे। अमरिंदर ने अपने समर्थकों की बैठक बुलाई जबकि दूसरी ओर सिद्धू भी पंजाब कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष सुनील जाखड़ सहित कई विधायकों से मुलाक़ात कर रहे थे। 

 - Satya Hindi

कैप्टन ने जताई थी नाराज़गी

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को ख़त लिखा था और इसमें कहा था कि पार्टी हाईकमान पंजाब सरकार के कामकाज और राज्य की राजनीति में जबरन दख़ल दे रहा है। इस ख़त के सामने आने के बाद राज्य में पार्टी के प्रभारी हरीश रावत आनन-फ़ानन में चंडीगढ़ पहुंचे थे और उन्होंने अमरिंदर सिंह से मुलाक़ात की थी। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ख़त में नवजोत सिंह सिद्धू को राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाए जाने की ख़बरों पर नाराज़गी जाहिर की थी। 

हालांकि अमरिंदर सिंह से मुलाक़ात के बाद हरीश रावत ने पत्रकारों से कहा था कि अमरिंदर सिंह ने इस बात को दोहराया है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जो भी फ़ैसला लेंगी, वह उसे मानेंगे। कुछ दिन पहले जब अमरिंदर सिंह दिल्ली आए थे और सोनिया गांधी से मिले थे तब उन्होंने पत्रकारों से यही बात कही थी कि वे कांग्रेस अध्यक्ष के आदेश को मानेंगे। 

सिद्धू की सिफ़ारिश की थी 

कैप्टन बनाम सिद्धू का यह झगड़ा जब बहुत ज़्यादा बढ़ गया था तो पंजाब कांग्रेस के विधायकों-मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाया गया था और यहां कांग्रेस हाईकमान की ओर से बनाए गए पैनल के सामने सबने अपनी बात रखी थी। इस पैनल में वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत और दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जय प्रकाश अग्रवाल शामिल थे। 

पैनल ने सोनिया गांधी को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि नवजोत सिंह सिद्धू को नज़रअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पैनल ने सिद्धू को पार्टी में अहम पद दिए जाने की सिफ़ारिश की थी। 

क्यों शुरू हुआ था विवाद?

सिद्धू सहित कुछ नेताओं की शिकायत थी कि 2015 में गुरू ग्रंथ साहिब के बेअदबी मामले और कोटकपुरा गोलीकांड के दोषियों को सत्ता में आने के साढ़े चार साल बाद भी नहीं पकड़ा जा सका है। इस मामले में अमरिंदर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बेअदबी मामले में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके परिवार को बचाने की पूरी कोशिश की है और ऐसा करके जनता से धोखा किया गया है। क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने पंजाब में जनता से वादा किया था कि वह इस मामले के दोषियों को सजा दिलाएगी। लेकिन सत्ता में आने के साढ़े चार बाद भी कुछ नहीं हुआ। 

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