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पिता आज़ादी की लड़ाई में शामिल थे, मुख़्तार बन गया अपराधी

पिता आज़ादी की लड़ाई में शामिल थे, मुख़्तार बन गया अपराधी

मुख़्तार अंसारी, ये वो नाम है, जिसका एक वक़्त में उत्तर प्रदेश की राजनीति में ख़ासा रसूख था। सरकार चाहे किसी की भी बने मुख़्तार की तूती बोलती थी। 

मुख़्तार अंसारी, ये वो नाम है, जिसका एक वक़्त में उत्तर प्रदेश की राजनीति में ख़ासा रसूख था। सरकार चाहे किसी की भी बने मुख़्तार की तूती बोलती थी। लेकिन सामान्य जीवन में जिस तरह हर लम्हा ख़ुशनुमा नहीं रहता, ठीक वैसा ही राजनीति में भी होता है। 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री क्या बने, मुख़्तार के बुरे दिन शुरू हो गए। 

मुख़्तार अंसारी पूर्वांचल के मऊ से 5 बार विधायक रहे हैं। आगे बढ़ने से पहले थोड़ा मुख़्तार के पारिवारिक इतिहास के बारे में जानते हैं। मुख़्तार के दादा डॉ. मुख़्तार अहमद अंसारी 1927–28 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे। उनके नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान अंसारी ‘नौशेरा के शेर’ थे और उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 

पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, ओडिशा के पूर्व राज्यपाल शौकत उल्लाह अंसारी, इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज रहे न्यायमूर्ति आसिफ अंसारी से मुख़्तार अंसारी के पारिवारिक रिश्ते हैं। मुख़्तार के पिता सुभान अल्लाह अंसारी ने देश की आज़ादी की लड़ाई में भाग लिया था और वह कम्युनिस्ट नेता थे। मुख़्तार के बेटे अब्बास अंसारी राष्ट्रीय स्तर के शूटर हैं। उनके भाई अफ़ज़ाल अंसारी वर्तमान में ग़ाज़ीपुर सीट से बीएसपी के सांसद हैं। 

तो फिर सवाल यह है कि इतने अच्छे परिवार से आने वाला मुख़्तार आख़िर ज़रायम की दुनिया में क्यों कूद गया। इसके पीछे कारण ज़रायम और सियासत की दुनिया के कॉकटेल से मिलने वाली शौहरत और ताक़त हासिल करने की भूख को बताया जाता है। 

 - Satya Hindi

कृष्णानंद राय की हत्या

मुख़्तार अंसारी ने जब पूर्वांचल की सियासत में क़दम रखा तो उनकी पहचान सीमित थी। लेकिन नवंबर, 2005 में हुए एक हत्याकांड ने मुख़्तार को चर्चा में ला दिया। बीजेपी के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय की बदमाशों ने हत्या कर दी थी। विधायक की पत्नी अल्का राय ने जिन लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई थी, उनमें मुख़्तार के अलावा उनके भाई अफ़ज़ाल अंसारी सहित कई लोगों के नाम शामिल थे। 

बीजेपी ने तब विधायक राय की हत्या को मुद्दा बनाया था। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। 2019 में सीबीआई ने सभी को बरी कर दिया था। 

कायम रहा मुख़्तार का जलवा 

2007 के बाद उत्तर प्रदेश में आई मायावती और 2012 में आई अखिलेश यादव की सरकारों में भी मुख़्तार का जलवा कायम रहा। धीरे-धीरे मुख़्तार अंसारी के गैंग का नाम कई आपराधिक वारदातों- जैसे हत्या, ज़मीनों पर कब्जा करने व कई अन्य मामलों में सामने आया और देखते ही देखते वह पूर्वांचल में ख़ौफ़ का पर्याय बन गया। अंसारी के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश में 52 आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं। 

बृजेश सिंह से अदावत 

लेकिन इस दौरान मुख़्तार अंसारी के दुश्मन बृजेश सिंह से उसकी अदावत बढ़ती गई और पूर्वांचल में इन दोनों के गैंग के बीच मुठभेड़ होती रहीं। मुख़्तार का असर इतना था कि 15 साल जेल में रहने के बाद भी वह विधानसभा का चुनाव जीतता रहा। लेकिन 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने माफियाओं के ख़िलाफ़ शिकंजा कसना शुरू किया और मुख़्तार की कई अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलवा दिया। अंसारी परिवार ने ख़ुद भी कई संपत्तियों को प्रशासन के डर से गिरवा दिया था। 

मुख़्तार की मुश्किलें तब बढ़ीं जब 2018 में उसके ख़ास शूटर मुन्ना बजरंगी की बाग़पत की एक जेल में हत्या कर दी गई। मुख़्तार के ख़िलाफ़ 2019 में पंजाब के एक रियल इस्टेस कारोबारी ने 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पंजाब पुलिस मुख़्तार को बांदा जेल से रोपड़ की जेल में ले आई थी और 2 साल के बाद भी मुख़्तार ने इस मामले में अपनी जमानत नहीं कराई थी। 

इस बीच योगी सरकार ने पूरा जोर लगाया लेकिन मुख़्तार ने यूपी में अपनी जान को ख़तरा बताया और अपने ख़राब स्वास्थ्य का भी हवाला दिया। पंजाब सरकार भी मुख़्तार को यूपी भेजे जाने के ख़िलाफ़ खड़ी रही लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुख़्तार को अंतत: बांदा की जेल में आना ही पड़ा। 

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