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एमपी: विभाग बँटवारे में भी सिंधिया की नहीं चली? जानें किन पर 'मेहरबानी'

एमपी: विभाग बँटवारे में भी सिंधिया की नहीं चली? जानें किन पर 'मेहरबानी'

3 दिसंबर को नतीजे आने के बाद मध्य प्रदेश कैबिनेट को जिम्मेदारी देने तक में आखिर एक महीना कैसे लग गया? जानिए, विभाग बंटवारे में किसको क्या मिला?

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के तमाम दावेदार कद्दावर चेहरों को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री पद की बागडोर तीसरी बार के विधायक डॉ. मोहन यादव को सौंपने के बाद केन्द्रीय नेतृत्व ने विभागों के बँटवारे में भी मोहन यादव को जमकर ‘नवाज़ा’ है। एक दर्जन के लगभग महत्वपूर्ण विभाग मोहन यादव के जिम्मे आये हैं।

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा हो गया है। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात कर लौटे मोहन यादव ने शनिवार देर शाम विभाग ‘बांट’ दिए।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज संसाधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय एवं समस्त ऐसे विभाग जो अन्य मंत्री को न सौंपे गए हों स्वयं के पास ही रखे हैं। यादव ने उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी और उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग का दायित्व सौंपा है।

कैलाश विजयवर्गीय को दिया गया पसंदीदा विभाग

मोहन यादव कैबिनेट के क़द्दावर चेहरे और मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल रहे कैलाश विजयवर्गीय को उनके पसंदीदा विभाग नगरीय विकास एवं आवास के साथ-साथ संसदीय कार्य विभाग का जिम्मा दिया गया है।

इसी तरह मुख्यमंत्री पद के अन्य दावेदार माने जाते रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम विभाग और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष एवं जबलपुर से सांसद रहे राकेश सिंह को लोक निर्माण विभाग की ज़िम्मेदारी दी गई है।

सिंधिया समर्थकों के पर कतरे गए!

विभागों के वितरण में भी केन्द्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं उनके समर्थक मंत्रियों को करारा झटका लगा है। सिंधिया के समर्थक मंत्रियों के पर विभाग वितरण में कतर दिये गये हैं। 

मोहन यादव मंत्रिमंडल में तीन समर्थकों को ही शामिल करवा सके केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खास समर्थक मंत्री गोविन्द राजपूत को एकमात्र खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का दायित्व दिया गया है। शिवराज सरकार में उनके पास परिवहन एवं राजस्व सरीखे भारी भरकम विभाग थे।

सिंधिया के अन्य समर्थक मंत्री तुलसी सिलावट को जल संसाधन विभाग भर से संतोष करना पड़ा है। शिवराज सरकार में सिलावट के पास जल संसाधन के अलावा मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विभाग की जिम्मेदारी भी थी। सिंधिया समर्थक तीसरे मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को पुनः ऊर्जा विभाग (शिवराज सरकार में भी ऊर्जा मंत्री थे) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विभागों के वितरण की पूरी सूची

 - Satya Hindi

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विभाग बांटने में लगे पांच दिन

मंत्रिमंडल विस्तार के पांच दिन बाद मंत्रियों को विभागों का बंटवारा हो पाया। मोहन यादव को विभागों के वितरण के लिए दिल्ली के कई चक्कर लगाना पड़े। शुक्रवार से वे इस कार्य के लिए दिल्ली में थे। शनिवार को वापसी के बाद विभागों के वितरण की सूची जारी हो सकी।

सूची जारी होने के पहले ही खंडवा पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीडिया के घेर लेने पर कहा, ‘सभी मंत्रियों को अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। सभी के काम का विभाजन कर दिया गया है। आने वाले 5 साल सभी डट कर काम करेंगे। और प्रदेश को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।’

मंत्रिमंडल बनने में लग गया एक महीना!

  • तीन दिसंबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आए।
  • आठ दिन बाद विधायक दल की बैठक में 11 दिसंबर को मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री का चयन किया गया।
  • चयन के दो दिन बाद 13 दिसंबर को सीएम और दोनों डिप्टी सीएम ने शपथ ली।
  • सीएम एवं दो डिप्टी सीएम की शपथ के 12 दिनों के बाद 25 दिसंबर को मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। 28 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। कुल 28 में 18 कैबिनेट, 06 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और 4 राज्यमंत्री बनाये गये।
  • मंत्रियों की शपथ के पांच दिनों के बाद 30 दिसंबर को विभागों का वितरण किया गया।

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