महाराष्ट्र में ख़रीद -फ़रोख़्त से सरकार बनाने को तैयार थी बीजेपी : अठावले

07:48 pm Dec 01, 2019 | नीलू व्यास - सत्य हिन्दी

‘राजनीति में कोई नैतिकता नहीं बची है, सब कुछ जायज है, साम-दाम-दंड-भेद, सब कुछ चलता है।’ विश्लेषकों और पर्यवेक्षकों के मुँह से आपने ये बातें सुनी होंगी। पर यदि यही बातें कोई नेता कहे और वह भी कैमरा के सामने तो आप यकीन करेंगे 

महाराष्ट्र में जब बीजेपी सरकार बनाने में अंत में नाकाम हो ही गई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पर अंगुलियाँ उठने लगीं। बाहर के लोग तो उनकी 'चाणक्य नीति' पर सवाल उठा ही रहे थे और उन पर तंज कस ही रहे थे, पार्टी के अंदर भी सुगबुगाहट होने लगी। लोग दबी ज़ुबान से ही सही, उनकी आलोचना करने लगे हैं।

अठावले ने विस्तार से बताया कि किस तरह बीजेपी महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन लोटस’ चला रही थी, जिसके तहत किसी भी सूरत में बीजेपी को सरकार बनानी थी। इसके तहत ही राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार को अपनी ओर लाया गया। वे अपने साथ 54 विधायकों का समर्थन पत्र भी ले आए थे। अठावले ने खुल कर कहा कि विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त होती और पार्टी को इसमें कोई दिक्क़त नहीं थी। उन्होंने कहा : 

यदि अदालत ने हस्तक्षेप नहीं किया होता और खुले मतदान और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का आदेश नहीं दिया होता तो पार्टी विधायकों की ख़रीद फ़रोख़्त कर सरकार बनाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थी।


रामदास अठावले, केंद्रीय, मंत्री

अठावले ने एनसीपी पर पीठ में छुरा भोंकने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी माना कि संवैधानिक रूप से ग़लत काम किया गया और कैबिनेट की मंज़ूरी के बग़ैर ही रातोंरात चीजें बदल गईं। अठावले ने कवि के अंदाज में कहा : ‘रात के अंधेरे में उजाले करने की कोशिश कर रहे थे।’ 

मोदी सरकार के इस मंत्री ने कहा कि राजनीति में ख़ास कर चुनावी राजनीति में अंत में जो चीज मायने रखती है, वह है संख्या। अठावले के मुताबिक़, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस भी इसी खेल में थीं, वे ज़रूरी संख्या जुटाने की कोशिश में थीं, कोई नैतिकता का ख्याल उन्हें नहीं था।

'बीजेपी भी वही संख्या जुटाने में लगी हुई थी, उसके लिए भी नैतिकता का कोई ख़ास महत्व नहीं था। दोनों का मक़सद एक ही था और दोनों एक तरीके से ही काम कर रहे थे।'

अठावले ने विस्तार से बताया कि आख़िर अंत में क्यों बीजेपी सरकार बनाने में नाकाम रही। उन्होंने इसके लिए बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की आलोचना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया। अठावले ने कहा,

मैंने सलाह दी थी कि मुख्यमंत्री का पद तीन साल तक बीजेपी के पास रहे और दो साल तक शिवसेना के पास, इस फ़ॉर्मूले पर काम किया जाए। पर केंद्रीय नेतृत्व ख़ास कर प्रधानमंत्री इस बात पर अड़ गए कि मुख्यमंत्री पद किसी हाल में शिवसेना को नहीं देना है, बस, इसी बात पर मामला ख़त्म हो गया।


रामदास अठावले, केंद्रीय, मंत्री

उन्होंने यह भी ज़ोर देकर कहा कि मौजूदा सरकार अस्थायी होगी। शिवसेना कुछ दिन में ही टूट कर अलग हो जाएगी और बीजेपी के पास चली आएगी। अठावलने का मानना है कि एनसीपी के विधायक टूट कर अलग हो जाएंगे और सरकार गिर जाएगी और ऐसा जल्द ही होगा।