सिद्धारमैया, शिवकुमार के साथ खड़गे की बैठक के बाद भी सहमति नहीं!

10:01 pm May 16, 2023 | सत्य ब्यूरो

कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के दो दावेदारों- सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने मंगलवार को राज्य में सरकार गठन पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे से अलग-अलग मुलाकात की। समझा जाता है कि अभी तक बैठक बेनतीजा रही क्योंकि पार्टी प्रमुख की ओर से सीएम के नाम पर कोई फ़ैसला नहीं किया गया है। उम्मीदवार के नाम पर कल यानी बुधवार को दोनों सीएम उम्मीदवारों के साथ दूसरे दौर की बैठक होगी।

इससे पहले खड़गे ने मंगलवार को राहुल गांधी के साथ करीब डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में बैठक की। कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक में पार्टी मामलों के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला और कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल भी उस बैठक में उपस्थित थे।

राहुल से मुलाक़ात के बाद पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने आज शाम को ही सीएम पद के दोनों दावेदारों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री पद नहीं दिए जाने पर पार्टी से इस्तीफा देने की ख़बरों पर पूछे जाने पर, डीके शिवकुमार ने आज दिन में कहा, 'मेरी मां मेरी पार्टी है, हमने इस पार्टी का निर्माण किया है। इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं है।' समझा जाता है कि सीएम पद की दौड़ में सिद्धारमैया सबसे आगे उभरे हैं, अधिकांश नवनिर्वाचित विधायकों ने उन्हें अपनी पसंद के रूप में नामित किया है। 

इससे पहले कर्नाटक के सीएम को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बैठक हुई। खड़गे के घर पर कर्नाटक के कुछ विधायक भी मौजूद थे। खड़गे और राहुल किस नतीजे पर पहुंचे, अभी मीडिया को इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। 

कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अब बुधवार को फैसला ले सकता है। कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार को लेकर तमाम तरह की कयासबाजियों का अंत हो गया है और वो आज दिल्ली पहुंचे हैं। डीके ने आज एएनआई को दिए इंटरव्यू में साफ कर दिया,

हम एकजुट हैं। आलाकमान जो तय करेगा, वो फैसला माना जाएगा। मैं सिद्धारमैया का बहुत सम्मान करता हूं। मैं पार्टी की पीठ में छुरा नहीं घोपूंगा।


डीके शिवकुमार, कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष

इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पहुंचे थे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री के फैसले पर कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा- "कांग्रेस अध्यक्ष पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेंगे। इसमें कोई देरी नहीं है, हम प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।

पीटीआई के मुताबिक डीके के भाई और कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने आज सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। डीके सुरेश ने कहा था कि शिवकुमार मंगलवार को दिल्ली में राज्य में सरकार गठन पर पार्टी नेतृत्व के साथ चर्चा के लिए आ रहे हैं। 

दिल्ली रवाना होने से पहले डीके शिवकुमार ने एएनआई से कहा था - हमारा एक घर है, हमारी संख्या 135 है। मैं यहां किसी को बांटना नहीं चाहता। वे मुझे पसंद करें या न करें, मैं एक जिम्मेदार आदमी हूं। मैं पीठ में छुरा नहीं मारूंगा और न ही ब्लैकमेल करूंगा। 

मुख्यमंत्री पद के लिए जोरदार पैरवी के बीच, कांग्रेस नेतृत्व ने सोमवार को चर्चा के लिए शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया था। सिद्धारमैया सोमवार दोपहर दिल्ली पहुंचे, लेकिन शिवकुमार ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अंतिम समय में अपनी यात्रा रद्द कर दी थी।

बाद में शाम को बेंगलुरु ग्रामीण से कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे से उनके आवास पर मुलाकात की और उसके बाद संवाददाताओं से कहा कि उनके भाई मंगलवार को दिल्ली आएंगे। पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में डीके सुरेश ने कहा, 'हां, वह कल आएंगे।'

दरअसल, सोमवार को ही खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बैठक में इस मुद्दे को हल किया जाना था लेकिन यह बैठक नहीं हो पाई। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस बैठक को डीके शिवकुमार की गैरमौजूदगी की वजह से टाल दिया था।

खड़गे ने सोमवार को अपने द्वारा भेजे गए तीन पर्यवेक्षकों और राज्य के एआईसीसी प्रभारी रणदीप सुरजेवाला से रात को मुलाकात की। उन्होंने संगठन के प्रभारी एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ भी बैठक की। पर्यवेक्षकों - सुशील कुमार शिंदे, एआईसीसी महासचिव जितेंद्र सिंह और पूर्व महासचिव दीपक बाबरिया ने खड़गे को "गुप्त मतदान" के नतीजे से अवगत कराया, जो उन्होंने रविवार रात बेंगलुरु में विधायकों के बीच आयोजित किया था।

सूत्रों ने कहा कि अधिकांश विधायकों ने सिद्धारमैया को अपनी पसंद के रूप में उद्धृत किया है। विधायकों को या तो अपनी पसंद का एक नाम लिखने के लिए कहा गया था, या अपनी पसंद के क्रम के अनुसार एक से अधिक नाम, या सिर्फ 'हाईकमान' अगर वे चाहते थे कि नेतृत्व तय करे। आधी रात के बाद भी यह सब चलता रहा। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया के एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे होने की एक वजह तो वह है जिसमें 2022 के मध्य में उनके समर्थकों द्वारा 75वें जन्मदिन के एक विशाल उत्सव की योजना बनाई जा रही थी। कहानी यह है कि यदि सीएम पद के बारे में विचार नहीं किया जाता तो सिद्धारमैया 2023 के चुनाव लड़ने से दूर रहने के बारे में सोच रहे थे। 

राज्य पार्टी के सूत्रों के अनुसार, 135 विधायकों में से 90 ने सिद्धारमैया के समर्थन का संकेत दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने विधायकों की व्यक्तिगत राय लेने के लिए कांग्रेस पर्यवेक्षकों पर दबाव डाला था। बताया जाता है कि शिवकुमार समूह ने राय व्यक्त करने से परहेज किया है और निर्णय को आलाकमान पर छोड़ दिया है।

कर्नाटक में 224 सीटों में से 135 सीटें जीतकर कांग्रेस की शानदार वापसी के बाद अब पार्टी के सामने मुख्यमंत्री चुनने की चुनौती है।

रविवार को बेंगलुरु में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पार्टी अध्यक्ष खड़गे को अपना नेता चुनने के लिए अधिकृत किया गया, जो मुख्यमंत्री होगा।