+
12वें दौर की सैन्य वार्ता के बाद गोगरा में भारत-चीन के सैनिक पीछे हटे

12वें दौर की सैन्य वार्ता के बाद गोगरा में भारत-चीन के सैनिक पीछे हटे

भारत और चीन के बीच 12वें दौर की बातचीत के बाद पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में गोगरा से दोनों देश के सैनिक डिसइंगेज हो गए हैं यानी पीछे हट गए हैं। सरकार ने कहा है कि इस क्षेत्र में बनाए गए अस्थायी ढाँचे ढहा दिए गए हैं।

भारत और चीन के बीच कोर कमांडरों की 12वें दौर की बातचीत के बाद पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में गोगरा से दोनों देश के सैनिक पीछे हट गए हैं। सरकार ने कहा है कि इस क्षेत्र में बनाए गए अस्थायी ढाँचे ढहा दिए गए हैं। भारतीय गश्ती बिंदु गोगरा पोस्ट यानी पीपी17ए से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया 4 और 5 अगस्त को पूरी की गई। 

लद्दाख में पिछले साल हुई झड़प के बाद से हालात तनावपूर्ण थे और आसपास के क्षेत्रों में दोनों देशों के सैनिकों की तैनाती हो गई थी। इन्हीं मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। 12वें दौर की बातचीत के बाद जारी बयान में कहा गया है कि जैसा कि इस सप्ताह की शुरुआत में बताया गया था, भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच बारहवें दौर की वार्ता 31 जुलाई 2021 को पूर्वी लद्दाख के चुशुल मोल्दो मीटिंग पॉइंट पर हुई थी।

इसमें यह भी कहा गया है कि दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास डिसइंगेजमेंट और बाक़ी क्षेत्रों के समाधान के लिए विचारों का स्पष्ट आदान-प्रदान किया है। बैठक के बाद दोनों पक्ष गोगरा के क्षेत्र में डिसइंगेजमेंट पर सहमत हुए। इस क्षेत्र में सैनिक पिछले साल मई से आमने-सामने की स्थिति में थे।

बयान में यह भी कहा गया है कि समझौते के अनुसार, दोनों पक्षों ने चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित तरीक़े से इस क्षेत्र में फॉरवर्ड तैनाती बंद कर दी है। दोनों पक्षों की सेना अब अपने-अपने स्थायी ठिकानों में है।

इसके साथ ही दोनों पक्षों द्वारा क्षेत्र में बनाए गए सभी अस्थायी ढांचे ध्वस्त कर दिये गये हैं। गतिरोध से पहले की स्थिति को दोनों पक्षों द्वारा बहाल कर दिया गया है। यह समझौता यह सुनिश्चित करता है कि दोनों पक्ष इस क्षेत्र में एलएसी का कड़ाई से पालन करेंगे और उसका सम्मान करेंगे। इसमें यह भी तय किया गया है कि यथास्थिति में एकतरफा परिवर्तन नहीं होगा।

दोनों पक्षों ने वार्ता को आगे बढ़ाने और पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के साथ शेष मुद्दों को हल करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

बता दें कि इससे पहले इसी हफ़्ते सूत्रों से ख़बर आई थी कि लद्दाख में जारी गतिरोध को दूर करने के लिए भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 12वें दौर की बातचीत में एक प्रमुख गश्ती बिंदु पर डिसइंगेजमेंट यानी पीछे हटने पर सहमति बन गई है। जबकि दूसरे कई क्षेत्रों में गतिरोध अभी भी जारी है। एक मीडिया रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि लगभग छह महीने तक चली सीमा वार्ता में गतिरोध को समाप्त करते हुए भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में एक प्रमुख गश्ती बिंदु पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कोर कमांडर स्तर की 12वें दौर की वार्ता के दौरान शनिवार को PP17A पर समझौता हुआ। यह बैठक लद्दाख में 15 महीने के गतिरोध को हल करने के उपायों की शृंखला का हिस्सा थी। यह बैठक भारतीय हिस्से के चुशुल-मोल्दो सीमा क्षेत्र में आयोजित की गई थी। सूत्रों ने कहा कि चीन PP17A से पीछे हटने के लिए सहमत हो गया है, जिसे गोगरा पोस्ट के रूप में भी जाना जाता है, लेकिन वह PP15 या हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र से वापस जाने के लिए 'इच्छुक नहीं' है। रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा कि 'PP15 पर चीन लगातार जोर दे रहा है और दावा कर रहा है कि वह वास्तविक नियंत्रण रेखा के अपने क्षेत्र में है'।

सूत्रों से यह ख़बर आने से पहले सोमवार को जारी संयुक्त बयान में इतना ज़रूर कहा गया था कि भारतीय और चीनी सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख में लंबित मुद्दों को तेजी से हल करने पर सहमति जतायी है और 12वें दौर की सैन्य स्तर की वार्ता को रचनात्मक क़रार दिया है।

सत्य हिंदी ऐप डाउनलोड करें