+
नूंह हिंसा की वजह क्या? जानें शोभायात्रा से पहले क्या हुआ

नूंह हिंसा की वजह क्या? जानें शोभायात्रा से पहले क्या हुआ

हरियाणा के नूंह में हिंसा के पीछे आख़िर वजह क्या रही? क्या तनाव पहले से था और यदि ऐसा था तो पुलिस ने तैयारी क्या थी? जानिए, शोभायात्रा निकलने से पहले क्या हुआ था। 

नूंह में विहिप और बजरंग दल की शोभायात्रा निकाली जानी थी तो प्रशासन ने दो समूहों के बीच बैठक कराई थी। आश्वस्त होने के बाद परमिशन दी गई। इसके बावजूद हिंसा हो गई। दरअसल, प्रशासन इसको लेकर पहले से ही आशंकित था। और ऐसी आशंका के पीछे वजह भी खास थी।

इस साल फरवरी में नासिर व जुनैद की हत्या का आरोप लगाया गया। रिश्तेदार द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में मोनू मानेसर का नाम आया था। उन दोनों को कथित तौर पर राजस्थान से अपहरण कर लिया गया था। बाद में जिस कार में वे यात्रा कर रहे थे, उसमें हरियाणा के लोहारू में उनके जले हुए शव पाए गए थे। इस हत्या के बाद बढ़ते तनाव के बावजूद हरियाणा के नूंह में सोमवार की बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा की अनुमति दी गई। हालाँकि हरियाणा पुलिस के इस फैसले के पीछे यह आश्वासन था कि जुलूस में हथियार शामिल नहीं किए जाएँगे।

एक रिपोर्ट के अनुसार 27 जुलाई को नूंह पुलिस व जिला अधिकारियों, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधियों और क्षेत्र के निवासियों के बीच एक बैठक हुई थी। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उपायुक्त प्रशांत पंवार ने कहा, 'जब हमने अनुमति दी थी तो हमने उनसे यात्रा के दौरान किसी भी हथियार से सख्ती से बचने के लिए कहा था।' रिपोर्ट के अनुसार जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सदस्य मौलाना याहिया करीमी ने भी कहा, 'यात्रा को अब तीन साल हो गए हैं... हमने कहा कि हम हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ हैं।'

इस बैठक के बाद ही सोशल मीडिया पर मोनू मानेसर का एक वीडियो संदेश आ गया और फिर इससे तनाव बढ़ने लगा था। सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चा है जिससे संकेत मिलते हैं कि मोनू मानेसर की संभावित भागीदारी भी एक वजह रही जिसके कारण धार्मिक शोभायात्रा में बवाल हुआ। 

मोनू मानेसर बजरंग दल का सदस्य और गुड़गांव में हरियाणा सरकार की गाय संरक्षण टास्क फोर्स का चेहरा है। उसका असली नाम मोहित यादव है, लेकिन उसे मोनू मानेसर के नाम से भी जाना जाता है। मोनू मानेसर उर्फ मोहित यादव बजरंग दल का सदस्य और गौरक्षक है। उस पर नासिर व जुनैद की हत्या का आरोप है। 

शोत्रायात्रा से पहले मोनू मानेसर का वीडियो संदेश आया था। जिसमें कहा गया था कि वह यात्रा में भाग लेगा। 29 जुलाई को अपने वाट्सऐप स्टेटस पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में मोनू मानेसर ने कहा, 'मैं व्यक्तिगत रूप से यात्रा में रहूंगा और मेरी पूरी टीम भी मौजूद रहेगी।'

मोनू मानेसर का वीडियो पोस्ट होते ही इलाक़े का माहौल बदल गया। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार जमीयत के एक सदस्य मुफ्ती सलीम सकरस ने कहा, 'मोनू पर जुनैद और नासिर की हत्या का आरोप है। वह कहता है कि वह मेवात में ऐसे आ रहा है जैसे इसका कोई मतलब नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि इससे निवासियों में गुस्सा है। हालाँकि, बजरंग दल के सदस्यों ने मोनू का बचाव किया। अंग्रेजी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार गुड़गांव बजरंग दल के सदस्य अमित हिंदू ने कहा, 'मोनू ने अभी एक वीडियो पोस्ट किया है, इससे लोगों को गुस्सा क्यों आता है? यात्रा विहिप या बजरंग दल के बारे में नहीं है, यह हिंदू समुदाय के बारे में है।' हालांकि, यात्रा में मोनू नहीं आया। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि वीएचपी और बजरंग दल के नेताओं ने उनसे यात्रा छोड़ने के लिए कहा था।

बहरहाल, इस हिंसा को लेकर अब कम से कम 17 एफआईआर दर्ज की गई है और 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। नूंह पुलिस इस मामले की व्यापक जांच कर रही है। भिवानी एसपी नरेंद्र बिजारनिया ने कहा, 'स्थानीय लोगों के पास बंदूकें, लाठियां और तलवारें भी थीं। हम क्षेत्र में बंदूक लाइसेंस की समीक्षा कर रहे हैं और तदनुसार कार्रवाई की जाएगी।'

सत्य हिंदी ऐप डाउनलोड करें