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गुजरात में विपुल चौधरी की गिरफ्तारी के पीछे क्या राजनीति है?

गुजरात में विपुल चौधरी की गिरफ्तारी के पीछे क्या राजनीति है?

उत्तरी गुजरात के प्रमुख नेता विपुल चौधरी को करप्शन के एक बहुत पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। गुजरात में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। विपुल कांग्रेस से बीजेपी में आए थे। इन दिनों उनके वापस कांग्रेस में जाने की चर्चा थी। उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ गुजरात के कुछ इलाकों में प्रदर्शन भी हुए है। इस राजनीतिक गिरफ्तारी के बारे में पढ़िए रिपोर्ट।

उत्तरी गुजरात के प्रमुख नेता विपुल चौधरी की गिरफ्तारी के खिलाफ गुजरात के कुछ हिस्सों में आंदोलन शुरू हो गया है। पूर्व गृह मंत्री चौधरी को बुधवार देर रात एक पुराने कथित घोटाले में हिरासत में एंटी करप्शन ब्यूरो ने हिरासत में लिया था, उसके बाद उन्हें गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। गुजरात में इस गिरफ्तारी को गुजरात में होने वाले चुनाव से जोड़ा जा रहा है। चौधरी समाज और अरबुदा सेना ने उनके समर्थन में प्रदर्शन किए हैं। विधायक जिग्नेश मेवानी ने उनके समर्थन में ट्वीट किया है। 

विपुल चौधरी शंकर सिंह बाघेला के मुख्यमंत्री काल में मंत्री रह चुके हैं। उन्हें उस समय के एक कथित घोटाले में लपेटा गया है। मेहसाणा जिला सहकारी उत्पादक संघ लिमिटेड (दूधसागर डेयरी) के पूर्व अध्यक्ष विपुल चौधरी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने उनके गांधीनगर आवास से कथित भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया।

एसीबी ने एक बयान में कहा कि मई में, विपुल चौधरी और उनके निजी सचिव के खिलाफ एसीबी मेहसाणा शाखा के साथ डेयरी के पैसे की हेराफेरी करने के लिए एक कथित शिकायत दर्ज की गई थी। चौधरी पर विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में उनके निजी सचिव चार्टर्ड शैलेश पारिख को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों के खिलाफ कार्रवाई बुधवार देर रात की गई।

कथित तौर पर आरोप लगाया गया कि दूधसागर डेयरी के साथ कारोबार करने वाली एक एजेंसी के नाम पर दूधसागर डेयरी के लगभग 300 करोड़ रुपये को डायवर्ट किया गया है।

यह कार्रवाई उस समय हुई जब आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दूधसागर डेयरी क्षेत्र के चुनाव के लिए विपुल चौधरी अपने समर्थकों के साथ प्रचार कर रहे थे। चौधरी फिलहाल बीजेपी नेता हैं और अंजन चौधरी (पटेल उप जाति) का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसका उत्तरी गुजरात में कम से कम एक दर्जन विधानसभा सीटों पर प्रभुत्व है। चर्चा थी कि विपुल चौधरी कांग्रेस से चुनाव लड़ सकते हैं। खुद उनके समर्थकों का कहना था कि विपुल चौधरी इस बार बीजेपी से नहीं, बल्कि अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस से चुनाव लड़ेंगे।

विधायक जिग्नेश मेवानी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि गुजरात के पूर्व गृह मंत्री विपुल चौधरी की देर रात उनके घर से गिरफ्तारी हुई है। उत्तर गुजरात में बढ़ते हुए उनके प्रभाव को रोकने का यह एक राजनीतिक षड्यंत्र है। भाजपा की यह बौखलाहट देख, राष्ट्रकवि दिनकर की एक पंक्ति याद आती है: 

जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।

अरबुदा सेना के कार्यकर्ता विपुल चौधरी की गिरफ्तारी के विरोध में बनासकांठा के अधिकारी को ज्ञापन दिया।  सोशल मीडिया पर गुजरात और वहां से जुड़े लोग भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह एक राजनीतिक गिरफ्तारी है। इस गिरफ्तारी से विपुल चौधरी को फिक्स किया गया है। उन्हें कांग्रेस में जाने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। लेकिन बीजेपी को इसका नुकसान होगा, फायदा नहीं।

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