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अलग पार्टी बनाने से कांग्रेस में बौखलाहट: आज़ाद

अलग पार्टी बनाने से कांग्रेस में बौखलाहट: आज़ाद

गुलाम नबी आज़ाद ने कुछ दिन पहले नयी पार्टी बनाने की जो घोषणा की थी, आज उसकी शुरुआत क्यों नहीं हुई? जानिए जम्मू रैली में आज़ाद ने क्या कहा।

कांग्रेस से जुदा होने के बाद जम्मू में अपनी पहली रैली में गुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मेरी अलग पार्टी बनाने से उन्हें बौखलाहट हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस कंप्यूटर, ट्विटर एसएमएस से नहीं बनी है, बल्कि ये खून-पसीने से बनी है। उन्होंने कहा, 'हमने कांग्रेस को बनाया है'। 

आज़ाद आज जम्मू में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। माना जा रहा था कि वह आज अपनी पार्टी को लॉन्च कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज़ाद ने कहा, 'मैंने अभी तक अपनी पार्टी के लिए नाम तय नहीं किया है। जम्मू-कश्मीर के लोग पार्टी के लिए नाम और झंडा तय करेंगे। मैं अपनी पार्टी को एक हिंदुस्तानी नाम दूंगा जिसे हर कोई समझ सके।' उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी के मुख्य मुद्दे होंगे- पूर्ण राज्य का दर्जा, भूमि का अधिकार और मूल निवासी को रोजगार की बहाली। बता दें कि इस नयी पार्टी के साथ ही वह अपने करियर की नयी शुरुआत करेंगे।

कांग्रेस छोड़ने के बाद से वह कांग्रेस और ख़ासकर राहुल गांधी पर हमलावर रहे हैं। 26 अगस्त को कांग्रेस के साथ अपने पांच दशक लंबे जुड़ाव को ख़त्म करते हुए आज़ाद ने पार्टी को 'पूरी तरह से ख़त्म' करार दिया और राहुल गांधी पर इसके पूरे सलाहकार तंत्र को 'ध्वस्त करने के लिए हमला किया था। इसी क्रम में उन्होंने आज एक बार फिर से कांग्रेस पर हमला जारी रखा।

जनसभा में गुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस में अपने योगदान को गिनाते हुए कहा, 'कांग्रेस हमने बनाई है। अपने खून-पसीने से बनाई है। हमारे खिलाफ गलत अफवाहें फैलाने से नहीं बनी है। हमारे गरीब, किसान, नौजवान, बहू-बेटियाँ हमारी नस-नस में हैं। जो हमें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं उनकी पहुंच केवल ट्वीट, एसएमएस और कम्प्यूटर तक है। वो डिबेट में खुश रहें, उन्हें वही नसीब हो।'

आज़ाद की जम्मू में होने वाली रैली में क़रीब 20 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है। आज़ाद उस समय नयी पार्टी शुरू कर रहे हैं जब जम्मू-कश्मीर में कुछ ही महीनों के अंदर विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में आजाद की पार्टी निश्चित रूप से विधानसभा चुनाव में उतरेगी।

गुलाम नबी आजाद के जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में उतरने से निश्चित रूप से राज्य के सियासी समीकरणों पर असर पड़ेगा। कहा जा रहा है कि इससे सबसे ज़्यादा नुक़सान कांग्रेस को होगा। 

यह आजाद के इस्तीफे के साथ दिख भी गया था। आजाद के समर्थन में जम्मू-कश्मीर में इस्तीफों की झड़ी लग गई थी। कई नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने वालों में पूर्व उपमुख्यमंत्री, कई पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक शामिल हैं।

कांग्रेस के कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि गुलाम नबी आजाद का डीएनए 'मोदी-युक्त' हो गया है। उन्होंने उनके इस्तीफ़े को राज्यसभा के कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाने से जोड़कर देखा।

बहरहाल, आजाद ने शनिवार को कांग्रेस के इस आरोप का जवाब दिया कि वह पीएम मोदी और भाजपा के साथ तालमेल बिठा रहे हैं, उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से मिलने और बात करने से किसी का डीएनए नहीं बदलता है।

आजाद कांग्रेस में बागी नेताओं के गुट G-23 के नेता रहे हैं और यह माना जा रहा है कि उनके पार्टी छोड़ने के बाद इस गुट के कुछ और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।

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