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अदालत : पुलिस ने दिल्ली दंगे के अभियुक्त के बचाव में साक्ष्य गढ़ा

अदालत : पुलिस ने दिल्ली दंगे के अभियुक्त के बचाव में साक्ष्य गढ़ा

दिल्ली के सत्र न्यायालय ने एक बेहद अहम फ़ैसले में दिल्ली पुलिस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि उसने दिल्ली दंगा के दौरान गोली चलाने के अभियुक्तों के बचाव में साक्ष्य गढ़ा था। 

दिल्ली के सत्र न्यायालय ने एक बेहद अहम फ़ैसले में दिल्ली पुलिस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि उसने दिल्ली दंगे के दौरान गोली चलाने के अभियुक्तों के बचाव में साक्ष्य गढ़ा था। 

अदालत ने दिल्ली पुलिस की एक याचिका को खारिज करते हुए आदेश दिया कि वह घौंडा निवासी नसीर की शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज करे। 

अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने एक दूसरे एफ़आईआर में इस मामले के अभियुक्त के बचाव के लिए साक्ष्य गढा। अदालत ने इसके साथ ही पुलिस की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वह अपने कर्तव्य के निर्वाह में बुरी तरह नाकाम रही है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने भजनपुरा के थाना प्रभारी पर 25 हज़ार रुपए का ज़ुर्माना भी लगा दियाया। 

क्या है मामला?

घौंडा के निवासी नसीर ने 19 मार्च 2021 को शिकायत की थी कि दिल्ली दंगे 2020 के दौरान 24 फरवरी को उन पर गोली चलाई गई, जो उनकी आँख में लगी थी। उन्होंने इस मामले में नरेश त्यागी, उत्तम त्यागी, सुभाष त्यागी, सुशील त्यागी और नरेश गौड़ का नाम लिया था। 

लेकिन पुलिस ने इसकी शिकायत दर्ज नहीं की थी। उसके बाद वे इस मामले को लेकर अदालत गए। 

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने अक्टूबर 2020 में इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिल्ली पुलिस को दिया था।लेकिन दिल्ली पुलिस ने एक दूसरी एफ़आईआर दर्ज की और कहा कि एक दूसरे मामले में नसीर को गोली लगी थी और उस मामले में नरेश और उत्तम दिल्ली में नहीं थे।

 - Satya Hindi

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि नसीर पर गोली 24 फरवरी को चलाई गई थी, लेकिन पुलिस ने जो एफ़आईआर दर्ज की थी, वह 25 फ़रवरी को मोहनपुर के एक मामले की थी।

अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया है। अदालत ने कहा है कि दिल्ली पुलिस ने बहुत ही 'लापरवाही, हास्यास्पद और कामचलाऊ' तरीके से जाँच की है। 

सत्र न्यायालय की इस टिप्पणी से यह साफ होता है कि दिल्ली दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस ने निष्पक्ष भूमिका नहीं निभाई थी। उसके ऊपर भेदभाव के कई आरोप लगाए गए थे, अब अदालत भी उसके ख़िलाफ़ टिप्पणी कर रही है। 

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दिल्ली दंगा

बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में पिछले साल 23 फरवरी को दंगे शुरू हुए थे और ये तीन दिन यानी 25 फ़रवरी तक चले थे।

इस दौरान यह इलाक़ा बुरी तरह अशांत रहा और दंगाइयों ने वाहनों और दुकानों में आग लगा दी थी। जाफराबाद, वेलकम, सीलमपुर, भजनपुरा, गोकलपुरी और न्यू उस्मानपुर आदि इलाक़ों में फैल गए इस दंगे में 53 लोगों की मौत हुई थी और 581 लोग घायल हो गए थे। 

अदालत की फटकार

इसके पहले दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली दंगों के दौरान मसजिद पर हमले और आगजनी के एक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि इस मामले में जाँच के दौरान दिल्ली पुलिस ने जल्दबाज़ी की और उसका रवैया बेहद कठोर रहा। 

मदीना मसजिद में आगजनी के मामले में हाशिम अली ने शिकायत की थी और पुलिस ने उन्हें ही गिरफ़्तार कर लिया था। पुलिस ने हाशिम की शिकायत को एक स्थानीय व्यक्ति की शिकायत के साथ जोड़ दिया था और दावा किया था कि यह चार्जशीट का ही हिस्सा है। 

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