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कोरोना: 5 माह में आए थे 5.85 लाख केस, जुलाई में आए 10 लाख से ज़्यादा मामले

कोरोना: 5 माह में आए थे 5.85 लाख केस, जुलाई में आए 10 लाख से ज़्यादा मामले

कोरोना संक्रमण अब इतनी तेज़ी से फैलने लगा है कि जहाँ 30 जनवरी से लेकर जून माह तक पाँच महीनों में क़रीब 5 लाख 85 हज़ार केस आए थे वहीं अकेले जुलाई में ही 10 लाख से ज़्यादा केस आ चुके हैं।

कोरोना संक्रमण अब इतनी तेज़ी से फैलने लगा है कि जहाँ 30 जनवरी से लेकर जून माह तक पाँच महीनों में क़रीब 5 लाख 85 हज़ार केस आए थे वहीं अकेले जुलाई में ही 10 लाख से ज़्यादा केस आ चुके हैं। इसमें से जुलाई के आख़िरी 15 दिनों में ही क़रीब साढ़े छह लाख केस आ गए। 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के समय क़रीब साढ़े पाँच सौ केस दर्ज करने वाले भारत में आख़िर इतने मामले कैसे बढ़ गए?

संक्रमण की रफ़्तार का पता इससे भी चलता है कि हर रोज़ संक्रमण के मामले लगातार दूसरे दिन 50 हज़ार से ज़्यादा आए। स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार सुबह जो आँकड़े जारी किए हैं उसके अनुसार 24 घंटे में 55 हज़ार नये केस आए। इसके साथ ही भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 16,38,871 हो गयी है। अब तक कुल 35,747 लोगों की मौत हो चुकी है। 

देश में संक्रमण बढ़ने की इस रफ़्तार को शुरुआत से देखें तो पॉजिटिव केस लगातार बढ़ते हुए दिखते हैं। 30 जनवरी को पहला मामला आने के बाद 31 फ़रवरी तक सिर्फ़ 3 मामले थे। 24 मार्च को जब प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन की घोषणा की थी तब सिर्फ़ 564 कोरोना वायरस पॉजिटिव मामले थे। 31 मार्च तक क़रीब 1400 मामले आए थे। लेकिन अप्रैल के आख़िर में यह संख्या बढ़कर क़रीब 35 हज़ार के पास पहुँच गई थी। मई के आख़िर में संक्रमण के कुल मामले 1 लाख 90 हज़ार हो गए। जून के आख़िर में क़रीब 5 लाख 85 हज़ार पॉजिटिव केस हो चुके थे। और जुलाई के आख़िर में क़रीब 16 लाख 39 हज़ार मामले आ चुके हैं। 

किस महीने कितने पॉजिटिव केस आए

  1. 30 जनवरी को पहला केस आया
  2. पूरी फ़रवरी में 2 केस आए
  3. मार्च माह में क़रीब 1390 केस आए
  4. अप्रैल में क़रीब 33400 मामले आए
  5. मई में क़रीब 1 लाख 55 हज़ार केस आए
  6. जून में क़रीब 4 लाख पॉजिटिव केस आए
  7. 1-30 जुलाई तक क़रीब 10 लाख केस आए

संक्रमण की रफ़्तार का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पहला मामला आने के बाद 1 लाख तक पहुँचने में क़रीब 110 दिन लगे थे। भारत में पिछले दो दिनों में संक्रमण के 1 लाख 6 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आए हैं। यानी अब दो दिन में ही एक लाख से ज़्यादा केस आने लगे हैं। 

भले ही सबसे ज़्यादा संक्रमण के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है, लेकिन सबसे तेज़ गति से संक्रमण फैलने के मामले में भारत पहले स्थान पर आ गया है। भारत में औसत रूप से 3.6 फ़ीसदी की दर से मामले बढ़ रहे हैं जबकि अमेरिका में यह दर 1.7 और ब्राज़ील में 2.4 है। यदि ऐसी ही दर बनी रही तो सबसे ज़्यादा संक्रमण के मामले में भी भारत जल्द ही अमेरिका से भी आगे निकल सकता है। 

भारत में संक्रमण के इन मामलों में तेज़ी आने की वजह है कुछ राज्यों में संक्रमण के मामले ज़्यादा बढ़ना। इन राज्यों में तमिलनाडु, आँध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र जैसे राज्य शामिल हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना जैसे राज्यों में भी मामले ज़्यादा आने लगे हैं। 

देश में कोरोना संक्रमण की ऐसी स्थिति होने के बावजूद सरकार की ओर से दावे किए जा रहे हैं कि दूसरे देशों की अपेक्षा भारत अच्छी स्थिति में है।

कोरोना संक्रमण की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री ने हाल में यह दावा किया कि 'सही समय पर सही फ़ैसले लेने के कारण भारत दूसरे देशों की अपेक्षा बेहतर स्थिति में है।'

लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और ही कहानी कहती है। भारत से ज़्यादा संक्रमण के मामले अब सिर्फ़ दो देशों में हैं और कोरोना मरीज़ों की मौत के मामले में भी भारत पाँचवें स्थान पर पहुँच गया है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार, अमेरिका में 44 लाख 95 हज़ार संक्रमण के मामले आ चुके हैं और 1 लाख 52 हज़ार लोगों की मौतें हुई हैं। ब्राज़ील में 26 लाख 10 हज़ार संक्रमण के मामले आए हैं और 91 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जानें गई हैं। पूरी दुनिया में 1 करोड़ 73 लाख से ज़्यादा संक्रमण के मामले आ चुके हैं और 6 लाख 73 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है। हालाँकि अच्छी ख़बर यह है कि 1 करोड़ से ज़्यादा लोग ठीक हो चुके हैं। अच्छी ख़बर यह भी है कि इस साल के आख़िर तक कोरोना वैक्सीन आ जाने की पूरी उम्मीद है। 

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