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शाह-अखिलेश की रैलियों से गर्माया यूपी का चुनावी माहौल

शाह-अखिलेश की रैलियों से गर्माया यूपी का चुनावी माहौल

ABP-C Voter का ताज़ा सर्वे इस बात को दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को अखिलेश यादव से कड़ी चुनौती मिलेगी। 

चुनाव के मुहाने पर खड़े उत्तर प्रदेश में इन दिनों ताबड़तोड़ रैलियां हो रही हैं। बीजेपी और एपसी के साथ ही कांग्रेस, बीएसपी, राष्ट्रीय लोकदल सहित तमाम राजनीतिक दलों ने अपनी सियासी फ़ौज़ को मैदान में उतार दिया है। शनिवार के दिन में बीजेपी की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रैलियां की तो एसपी की ओर से अखिलेश यादव ने मोर्चा संभाला। 

शाह ने अखिलेश यादव के गढ़ आज़ममढ़ में चुनावी रैली की और अखिलेश यादव के जिन्ना वाले बयान को लेकर उन्हें निशाने पर लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बात का संकेत दिया कि आज़मगढ़ का नाम बदलकर आर्यमगढ़ किया जा सकता है। 

योगी को फिर सीएम बनाएंगे शाह?

शाह की चुनावी रैलियों को देखकर यह साफ लगता है कि वह योगी आदित्यनाथ के पीछे पूरी ताक़त के साथ खड़े हैं। हाल ही में उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि अगर आप 2024 में नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं तो 2022 में योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाएं। लेकिन इसके बाद प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शाह के उलट बयान दिया था। मौर्य ने साफ कहा था कि बीजेपी कमल के फूल के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। 

आज़मगढ़ की रैली में भी शाह ने लोगों से कहा कि वे यहां की सारी सीटें बीजेपी को जिताएं जिससे योगी आदित्यनाथ दुबारा मुख्यमंत्री बन सकें। 

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दूसरी ओर, अखिलेश यादव प्रदेश भर में "समाजवादी विजय यात्रा" निकाल रहे हैं। शनिवार को वह गोरखपुर और कुशीनगर पहुंचे। यहां उनकी रैलियों में जन सैलाब उमड़ा। इस दौरान अखिलेश ने कहा कि 2022 में बदलाव होना तय है। उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोज़गारी से जनता बुरी तरह त्रस्त है। 

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साफ है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी मैदान सज चुका है। अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव यात्राएं निकाल रहे हैं जबकि बीएसपी ब्राह्मण सम्मेलनों और कांग्रेस प्रतिज्ञा यात्राओं के जरिये जनता के बीच पहुंच रही है। इसके अलावा एआईएमआईएम प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी भी लगातार चुनावी रैलियां कर रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश का चुनाव कितना अहम है, यह बताने की ज़रूरत नहीं है। इस चुनाव के नतीजे 2024 के आम चुनाव पर सीधा असर डालेंगे। इसलिए बीजेपी ने सत्ता में वापसी के लिए और बाक़ी दलों ने बीजेपी को रोकने के लिए पूरा जोर लगा दिया है।

जोरदार मुक़ाबले की उम्मीद

इस बीच, ABP-C Voter का ताज़ा सर्वे इस बात को दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की एसपी बीजेपी को कड़ी चुनौती दे रही है। सर्वे के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश में बीजेपी फिर से सरकार बनाती दिख रही है लेकिन वह 2017 के चुनाव जैसा करिश्मा नहीं दोहरा पाएगी। 

403 सीटों वाली उत्तर प्रदेश की विधानसभा में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को 213-221 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है जबकि 2017 में यह आंकड़ा 325 था। एसपी गठबंधन को 152 से 160 जबकि बीएसपी को 16 से 20, कांग्रेस को 6 से 10 और अन्य को 2 से 6 मिलने की बात कही गई है। 

उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के लिए ज़रूरी विधायकों का आंकड़ा 202 है, ऐसे में बीजेपी के पास बहुत ज़्यादा लीड नहीं है और एसपी इस आंकड़े से बहुत ज़्यादा दूर नहीं है। ऐसे में सर्वे के मुताबिक़, चुनाव बेहद रोमांचक होने जा रहा है। 

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