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'अग्निपथ योजना' की आलोचना क्यों कर रहे विपक्षी नेता?

'अग्निपथ योजना' की आलोचना क्यों कर रहे विपक्षी नेता?

सेना में भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। इस बदलाव के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा की गई है। सरकार ने इसके फ़ायदे बताए हैं तो फिर विपक्ष को इनमें क्या खामियाँ दिखती हैं?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा अग्निपथ योजना की घोषणा किए जाने के बाद ही कांग्रेस, राजद जैसे दलों ने इस योजना पर चिंता जताई। कांग्रेस ने थल सेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिकों की भर्ती की इस योजना को उनकी गरिमा और अनुशासन के साथ खिलवाड़ करार दिया। इसने कहा कि सरकार का यह क़दम सेना की कार्यक्षमता और निपुणता से समझौता करने वाला है। राजद ने कहा है कि इस योजना में युवाओं के भविष्य का ख्याल नहीं रखा गया है और यह योजना आधी अधूरी है।

इस योजना को लेकर विपक्षी दलों ने प्रतिक्रिया में क्या-क्या कहा और किन-किन पक्षों को लेकर सवाल उठाए हैं, आइए हम आपको बताते हैं।

  • कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार भारतीय सेना की गरिमा, परंपरा, अनुशासन की परिपाटी से खिलवाड़ कर रही है। 
  • उन्होंने कहा- 4 साल के ठेके पर फौज में भर्ती देश की सुरक्षा के लिए सुखद संदेश नहीं है। चार साल की नौकरी के बाद भर्ती हुए युवाओं के भविष्य का क्या होगा?
  • सुरजेवाला ने सवाल किया, ‘एक तरफ पाकिस्तान की सीमा और दूसरी तरफ चीन की सीमा है तो क्या नियमित भर्ती पर पाबंदी लगाकर चार साल की ठेके की भर्ती करना देशहित में है?’

  • सुरजेवाला ने कहा, रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह निर्णय कहीं न कहीं तीनों सेनाओं की कार्यक्षमता, निपुणता, योग्यता, प्रभावशीलता व सामर्थ्य से समझौता करने वाला है।
  • उन्होंने यह भी पूछा,‘चार साल के बाद 22 से 25 साल की उम्र में बगैर किसी अतिरिक्त योग्यता के ये युवा अपने भविष्य का निर्माण कैसे करेंगे?’

  • आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि चार साल तक अगर कोई छात्र नौकरी कर लेता है तो उसके बाद उसके भविष्य की चिंता केंद्र सरकार के द्वारा नहीं की गई है।
  • आरजेडी नेता ने कहा कि न तो उनके लिए पेंशन का कोई प्रावधान है और न ही आगे एकोमोडेशन कैसे किया जाएगा, यह बताया गया है। सिर्फ़ इतना कहा गया है कि उनमें से केवल 25% को ही नियमित किया जाएगा।

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कैप्टन अमरिंदर की आपत्ति

  • पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने भी सैनिकों की नई भर्ती योजना पर गंभीर आपत्ति जताई है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अमरिंदर सिंह ने इस फ़ैसले की आलोचना की। 
  • कैप्टन सिंह ने कहा कि सैनिक भर्ती की नई प्रक्रिया सिख रेजिमेंट, सिख लाइट इन्फैंट्री, गोरखा राइफल्स, राजपूत रेजिमेंट, जाट रेजिमेंट, आदि सिंगल क्लास रेजिमेंटों के लिए मौत की घंटी बजाने जैसा है। 

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  • राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा, ‘वो नौजवान कौन होगा? आरएसएस या बीजेपी का कार्यकर्ता होगा। लोग बेरोजगारी से परेशान हैं और यह नया शिगूफा छोड़ दिया गया।’
  • छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, ‘इसका मतलब है कि जवानों को बंदूक चलाना सिखा दो और समाज में छोड़ दो। क्या करना चाहते हैं? यह नौजवानों को भटकाने की कोशिश हो रही है।'

बता दें कि केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी रक्षा भर्ती प्रक्रिया में मंगलवार को बड़ा बदलाव करते हुए थलसेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिकों की भर्ती के लिए ‘अग्निपथ’ योजना की घोषणा की है। इसके तहत सैनिकों की भर्ती चार साल की अवधि के लिए संविदा पर की जाएगी। इसमें नौकरी पाने वालों को ‘अग्निवीर’ कहा जाएगा। इनका मासिक वेतन 30,000 रुपये होगा, लेकिन हाथ में केवल 21,000 रुपये ही आएंगे। हर महीने 9,000 रुपये सरकार के समान योगदान वाले एक कोष में जाएंगे। इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष में मासिक वेतन 33,000 रुपये, 36,500 रुपये और 40,000 रुपये होगा। हर अग्निवीर को ‘सेवा निधि पैकेज’ के रूप में 11.71 लाख रुपये की राशि मिलेगी। कर छूट भी मिलेगी।

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