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अंधेरी ईस्ट सीट: आमने-सामने हैं ठाकरे व बीजेपी-शिंदे गुट 

अंधेरी ईस्ट सीट: आमने-सामने हैं ठाकरे व बीजेपी-शिंदे गुट 

बीजेपी और एकनाथ शिंदे के गुट की ओर से यहां पर बीएमसी के पूर्व पार्षद मुर्जी पटेल को चुनाव मैदान में उतारा गया है। जबकि उद्धव ठाकरे ने यहां से रमेश लटके की पत्नी रुतुजा लटके को उम्मीदवार बनाया है। 

इस साल जून में शिवसेना में हुई बगावत के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और बीजेपी व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट पहली बार किसी चुनाव में आमने-सामने हैं। महाराष्ट्र की अंधेरी ईस्ट सीट पर 3 नवंबर को उपचुनाव के लिए मतदान होना है। यह सीट शिवसेना के विधायक रमेश लटके के निधन से खाली हुई है। 

चुनाव आयोग ने सोमवार को देशभर में 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का एलान किया था। इन सीटों पर नामांकन की अंतिम तारीख 14 अक्टूबर है जबकि 3 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे और 6 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। 

बीजेपी और एकनाथ शिंदे के गुट की ओर से यहां पर बीएमसी के पूर्व पार्षद मुर्जी पटेल को चुनाव मैदान में उतारा गया है। जबकि उद्धव ठाकरे ने यहां से रमेश लटके की पत्नी रुतुजा लटके को उम्मीदवार बनाया है। मुर्जी पटेल बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। 

रमेश लटके विधायक बनने से पहले 3 बार पार्षद भी रहे थे। एनसीपी मुखिया शरद पवार ने कहा है कि उनकी पार्टी इस उपचुनाव में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का समर्थन करेगी। 

बताना होगा कि जून में शिवसेना में बड़ी बगावत हुई थी और इसमें पार्टी के 55 में से 40 विधायक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ चले गए थे। बड़ी संख्या में सांसदों, शिवसेना के जिला प्रमुखों ने भी उद्धव का साथ छोड़ दिया था। 

अंधेरी ईस्ट सीट के चुनाव नतीजे का थोड़ा बहुत असर आने वाले बीएमसी के चुनाव पर भी होगा। 

उद्धव की प्रतिष्ठा दांव पर

अंधेरी ईस्ट सीट पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की प्रतिष्ठा भी दांव पर है क्योंकि यह सीट शिवसेना के ही विधायक के निधन से खाली हुई है इसलिए उन पर इस सीट को जीतने का दबाव है। इस उपचुनाव में बीजेपी और एकनाथ शिंदे का गुट एक तरफ है जबकि उद्धव ठाकरे का गुट दूसरी ओर। देखना होगा कि क्या उद्धव ठाकरे शिवसेना की इस सीट को बरकरार रख पाएंगे। 

 - Satya Hindi

नया सियासी समीकरण

महाराष्ट्र में नवंबर 2019 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद जब शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर महा विकास आघाडी सरकार बनाई थी तो एक नए समीकरण का उदय हुआ था। इससे पहले महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना-बीजेपी का गठबंधन होता था लेकिन महा विकास आघाडी के नए गठबंधन के बाद बीजेपी अलग-थलग पड़ गई थी। जून में शिवसेना में हुई बगावत के बाद बीजेपी को राज्य की सत्ता में वापसी करने का मौका मिला है। 

आने वाले दिनों में बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के चुनाव होने हैं। बीएमसी के चुनाव बेहद अहम होते हैं और इस चुनाव में बीजेपी और शिवसेना का शिंदे गुट एक तरफ होंगे जबकि शिवसेना का उद्धव ठाकरे गुट, कांग्रेस और एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं।

बीएमसी चुनाव को लेकर बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट सक्रिय है और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की थी। 

शिंदे-ठाकरे गुट में तनातनी 

बताना होगा कि बगावत के बाद से ही एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के गुटों के बीच तनातनी चल रही है। कुछ दिन पहले ही शिवाजी पार्क से सटे इलाके में उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई थी जिसमें शिंदे गुट के विधायक सदा सरवणकर ने अपनी पिस्टल से फायरिंग कर दी थी। शिवाजी पार्क में दशहरा रैली को लेकर भी शिवसेना के दोनों गुटों के बीच जबरदस्त तनाव चला था। शिवाजी पार्क में 5 अक्टूबर को होने वाली रैली का मामला हाई कोर्ट पहुंचा था और कोर्ट ने उद्धव गुट के पक्ष में फैसला दिया था। 

उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के गुटों के बीच चुनाव आयोग में असली शिवसेना की जंग चल रही है। चुनाव आयोग इस मामले में लगातार सुनवाई कर रहा है और जल्द अपना फैसला सुना सकता है। शिवसेना का चुनाव चिन्ह धनुष बाण है। 

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