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अंबिका सोनी ने मुख्यमंत्री पद ठुकराया, बोलीं- सिख नेता ही पंजाब सीएम बने

अंबिका सोनी ने मुख्यमंत्री पद ठुकराया, बोलीं- सिख नेता ही पंजाब सीएम बने

अंबिका सोनी पंजाब की नयी मुख्यमंत्री नहीं हो सकती हैं, उन्होंने खुद ही उस पद को लेने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। आख़िर वह किसको मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में हैं?

पंजाब में नये मुख्यमंत्री के लिए चल रही गहमागहमी के बीच कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी ने मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा है कि पंजाब में मुख्यमंत्री सिख समुदाय से ही होना चाहिए। अंबिका सोनी का नाम उन नेताओं में से है जिनके नाम उस पद के दावेदारों में लिया जा रहा है। 

पंजाब में चल रही विधायक दल की बैठक के बीच रविवार को सोनी राहुल गांधी से मिलने पहुँचीं। पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'मैंने पंजाब का अगला मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। चंडीगढ़ में पार्टी की कवायद महासचिव के साथ चल रही है और पर्यवेक्षक सभी विधायकों से राय ले रहे हैं'। मेरा मानना ​​है कि पंजाब के मुख्यमंत्री का चेहरा सिख होना चाहिए।'

पंजाब कांग्रेस में चल रही राजनीतिक सरगर्मियों के बीच ही अन्य नेताओं के साथ अंबिका सोनी ने शनिवार देर रात को राहुल गांधी के आवास पर बैठक की थी। 

अंबिका सोनी पंजाब के होशियारपुर ज़िले की रहने वाली हैं और कई बार पंजाब से राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं। अंबिका सोनिया को कांग्रेस की वफादार नेता माना जाता है। उनको 1969 में इंदिरा गांधी ने पार्टी में शामिल किया था। उनके पिता विभाजन के दौरान अमृतसर के ज़िला कलेक्टर थे और नेहरू के साथ मिलकर काम करते थे। अंबिका सोनी ने संजय गांधी के साथ भी काम किया था और पार्टी के अग्रणी संगठनों का नेतृत्व किया। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफ़े के बाद से ही मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सुनील जाखड़, प्रताप सिंह बाजवा और रवनीत सिंह बिट्टू के अलावा अंबिका सोनी का नाम भी लिया जा रहा था। मीडिया में सूत्रों के हवाले से ख़बर यह भी है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने अंबिका सोनी को मुख्यमंत्री पद के लिए राजी करने के लिए बात भी की थी।

समझा जाता है कि पंजाब में नये मुख्यमंत्री के नाम को लेकर ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने शनिवार देर रात तक बैठकें की थीं जिसमें देर रात को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और अंबिका सोनी शामिल हुए थे।

इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफ़े से पहले पंजाब कांग्रेस विधायक दल की बैठक होनी तय थी। उस बैठक में अमरिंदर सिंह ने भाग नहीं लिया था। बैठक का एलान पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने शुक्रवार को किया था। उन्होंने कहा था कि इस बैठक में हर विधायक का मौजूद रहना अनिवार्य है। 

पंजाब कांग्रेस विधायक दल की शनिवार को हुई बैठक में 78 विधायक मौजूद थे, जिनमें से कई कैप्टन अमरिंदर सिंह के समर्थक भी थे। बैठक से सिर्फ कैप्टन अमरिंदर और एक अन्य विधायक ही दूर थे। पंजाब में कांग्रेस के 80 विधायक हैं। 

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