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रूस-यूक्रेन संघर्ष से क्या भारतीय व्यापार प्रभावित होगा?  

रूस-यूक्रेन संघर्ष से क्या भारतीय व्यापार प्रभावित होगा?  

रूस-यूक्रेन का संघर्ष अगर लंबा चलता है और रूस पर अमेरिका सहित सारे देश कड़े सुरक्षा प्रतिबंध लागू करते हैं तो भारत का व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा।

रूस-यूक्रेन में संघर्ष की वजह से भारत के व्यापार को लेकर तमाम सवाल उठ खड़े हुए हैं। ताजा हालात ये हैं कि रूस पर अमेरिका और अन्य देशों ने अभी प्रतिबंध पूरी तरह से नहीं लगाए हैं लेकिन अगर ये प्रतिबंध बढ़ते हैं तो निश्चित रूप से भारत का व्यापार प्रभावित होगा। वैसे ब्रिटन ने गुरुवार शाम को रूस के खिलाफ अब तक सबसे बड़ा आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में इस कायदे से समझाया गया है। उस रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 के पहले नौ महीने में रूस के साथ 6 अरब 90 करोड़ का आयात और दो अरब 5 करोड़ का निर्यात किया है। इस तरह भारत रूस का 25 वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत से रूस को चाय, मोबाइल और फार्मास्यूटिकल्स का निर्यात सबसे ज्यादा होता है। जबकि रूस से भारत को कच्चा तेल, कोयला और हीरे आयत किए जाते हैं।

भारत ने यूक्रेन को अप्रैल-दिसंबर की अवधि में फार्मास्यूटिकल्स और मोबाइल फोन का करीब 3 करोड़ 72 लाख डॉलर का निर्यात किया था, जबकि करीब 2 अरब डॉलर का सूरजमुखी तेल और यूरिया आयात किया है। इस वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में दोनों देशों में कुल निर्यात भारत के निर्यात का एक प्रतिशत से कम रहा। कच्चे तेल की सप्लाई होगी प्रभावित कच्चे तेल सहित तमाम रूसी निर्यात पर प्रतिबंध से भारत ही नहीं हर देश का व्यापार प्रभावित होगा। कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही आठ साल के उच्च स्तर पर हैं और गुरुवार को 100 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार कर गई हैं। अगर रूस से भारत को कच्चे तेल का आयात रुकता है तो भारत की परेशानी बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का कहना कि निर्यातक कच्चा तेल भेजने में देरी कर सकते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष बढ़ने पर शिपमेंट फंस सकता है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय ने कहा कि निर्यातक ऑर्डर पूरा करने में भी देरी कर रहे हैं। हम शिपमेंट के फंसने से चिंतित हैं, हम नहीं जानते कि यह कितने समय तक (संघर्ष के दौरान) किस बंदरगाह पर रहेगा। एक दवा कंपनी के एक शीर्ष कार्यकारी ने कहा कि यूक्रेन को शिपमेंट के लिए कार्गो बीमा उपलब्ध नहीं है, इसे देखते हुए, निर्यातकों को माल के फंसने के जोखिम को ध्यान में रखते हुए शिपमेंट भेजने या नहीं भेजने पर अपना निर्णय लेना होगा।

एक प्रमुख भारतीय दवा कंपनी जो रूस और यूक्रेन दोनों को ही दवा भेजती है, के शीर्ष कार्यकारी ने कहा कि वर्तमान में किसी भी देश को माल निर्यात करने में कोई समस्या नहीं है।

निर्यातकों की चिंता क्या है? विशेषज्ञों का कहना है कि रूस को भारत का निर्यात अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद बड़े पैमाने पर जारी रह सकता है। रूसी राष्ट्रपति वाल्दिमिर पुतिन ने गुरुवार को पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्स्क क्षेत्र में "विशेष सैन्य अभियान" का आदेश देने के बाद अमेरिका ने सबसे पहले वीईबी (रूस का राज्य विकास बैंक) और रूसी सैन्य बैंक पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।

सहाय ने कहा, अधिक चिंता यह है कि यदि युद्ध आगे बढ़ता है तो इसका ग्लोबल प्रभाव पड़ेगा और इस समय कोई भी झटका ग्लोबल व्यापार के हालात में सुधार की प्रक्रिया में देरी करेगा।

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