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जानिए, पंजाब की मुफ्त बिजली योजना, सरकार पर कितना बोझ बढ़ेगा?

जानिए, पंजाब की मुफ्त बिजली योजना, सरकार पर कितना बोझ बढ़ेगा?

पंजाब सरकार ने 1 जुलाई से 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने की घोषणा की है। यह उसका चुनावी वादा था। जानिए कि क्या है पूरी योजना और कैसे सरकार पर इसका बोझ पड़ेगा। 

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने 1 जुलाई से राज्य के बिजली उपभोक्ताओं के लिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा की है। यह उसका चुनाव में किया गया प्रमुख वादा था। यह योजना क्या है? इससे कितने उपभोक्ताओं को फायदा होगा ? पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) पर इसका क्या बोझ पड़ेगा? आइए इसे जानते हैंः

नई बिजली योजना क्या है?

आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव से पहले नई बिजली योजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि अगर हमें पंजाब में सत्ता मिली तो सरकार राज्य के हर घर को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देगी। सरकार बनते ही बिजली बिल माफी का वादा फौरन पूरा होगा। समझा जाता है कि पंजाब की मुफ्त बिजली योजना दिल्ली जैसी होगी।

पंजाब में कितनों को फायदा?

पंजाब बिजली बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक 73.80 लाख घरों में बिजली मुहैया कराई जाती है। राज्य में खपत का जो पैटर्न है, उसके अनुसार, करीब 62.25 लाख घर प्रति माह 300 यूनिट से कम की खपत करते हैं। इसका मतलब है कि इस योजना से लगभग 84 फीसदी लोगों को सीधे फायदा होगा। पीएसपीसीएल के अधिकारी का कहना है कि इसलिए, 84 फीसदी उपभोक्ताओं को कुछ भी भुगतान करने की जरूरत ही नहीं होगी। यानी उनका पूरा शुल्क माफ किया जा सकता है।

बिजली की औसत खपत कितनी?

पीएसपीसीएल के अधिकारियों के अनुसार, बिजली की खपत में मौसमी बदलाव होते हैं। यह खपत गर्मियों में बढ़ जाती है और सर्दियों में घट जाती है। इसलिए, उपभोक्ताओं को प्रति माह 300 यूनिट से कम के ब्रैकेट में सर्दियों में कमी और गर्मियों में थोड़ा बढ़ोतरी होती है। इसे ध्यान में रखते हुए, 300 यूनिट तक खपत करने वाले परिवारों की औसत संख्या 62.25 लाख है। शेष 11.55 लाख परिवार प्रति माह 300 यूनिट से अधिक की खपत करते हैं। औसत की गणना आंकड़ों के आधार पर की जाती है, जो एक बिलिंग चक्र में अधिकतम घरों को दिखाती है, जिन्होंने 300 यूनिट तक बिजली की खपत की है। यह 69.31 लाख परिवार अधिकतम और न्यूनतम 51.23 लाख परिवार तक जाती है। इसलिए, औसत की गणना 62.25 लाख परिवार की गई है। इसी तरह, एक बिलिंग चक्र में प्रति माह 300 से अधिक यूनिट का उपयोग करने वाले अधिकतम 22.57 लाख परिवार थे, और न्यूनतम 4.49 लाख। इनका औसत 11.55 लाख पर बैठता है। पीएसपीसीएल के आंकड़ों के अनुसार, 300 यूनिट तक की श्रेणी में औसत खपत 137 यूनिट प्रतिमाह थी।

वार्षिक बिजली सब्सिडी कितनी?

पंजाब में अभी घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को सालाना 3,998 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलती है। इसमें से 1,657 करोड़ रुपये एससी/बीसी/बीपीएल परिवारों के लिए हैं, जिनकी संख्या 21.83 लाख है। उन्हें पहली 200 यूनिट हर महीने बिजली मुफ्त मिलती है। अन्य 2,341 करोड़ रुपये की सब्सिडी 7 किलोवाट तक के लोड वाले 64.46 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाती है। पिछली कांग्रेस सरकार ने 1 नवंबर, 2021 से इन उपभोक्ताओं के लिए विभिन्न स्लैब में बिजली बिल में 3 रुपये प्रति यूनिट की कटौती की थी। मौजूदा सरकार ने इस सब्सिडी को जारी रखा है।

नई योजना का क्या होगा असर?

आंकड़ों के मद्देनजर अगर बिजली की खपत का पैटर्न इसी तरह जारी रहता है और उपभोक्ता हर महीने औसतन 137 यूनिट बिजली खर्च करते हैं तो पंजाब सरकार को पिछली सब्सिडी सहित 5,500 करोड़ रुपये की बिजली सब्सिडी का बोझ उठाना पड़ेगा। लेकिन अब शनिवार को जो घोषणा हुई है, उससे लगभग 1,502 करोड़ रुपये का सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा।

 - Satya Hindi

नई योजना पर अधिकारी क्या सोचते हैं?

पीएसपीसीएल के अधिकारियों का मानना है कि जो उपभोक्ता हर महीने 150 यूनिट बिजली खर्च कर रहे थे, वे अब 300 यूनिट तक की खपत करेंगे क्योंकि यह मुफ़्त होगी। साथ ही, संयुक्त परिवार इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने मीटर अलग-अलग करवा सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग हर महीने 300 यूनिट से थोड़ा ज्यादा खपत करते हैं,वे इस ब्रैकेट में आने के लिए अपनी खपत घटाएंगे।

तो, क्या पंजाब सरकार पर सब्सिडी लागत और बढ़ेगी?

हां। पीएसपीसीएल का कहना है कि अगर सभी उपभोक्ता 5.11 रुपये प्रति यूनिट की दर से पूरी 300 यूनिट मुफ्त बिजली का उपयोग करते हैं, तो कुल सब्सिडी लागत 459 करोड़ रुपये के निश्चित शुल्क के अलावा बढ़कर 11,452 करोड़ रुपये हो जाएगी। इस तरह, कुल राशि हर साल 11,911 करोड़ रुपये होगी। लगभग 11.55 लाख उपभोक्ताओं के लिए जो 300 यूनिट से अधिक बिजली का उपयोग करते हैं, वार्षिक सब्सिडी लागत 2,427 करोड़ रुपये है, जिसमें 302 करोड़ रुपये के निश्चित शुल्क शामिल हैं। इसलिए, दोनों श्रेणियों (लगभग 73.80 लाख उपभोक्ताओं) के लिए अनुमानित वार्षिक सब्सिडी लागत बढ़कर 14,337 करोड़ रुपये हो जाएगी।

सरकार कैसे भुगतान करेगी?

पार्टी के प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि आने वाले महीनों में सरकार की आबकारी और खनन से आमदनी में काफी वृद्धि होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि 'इंस्पेक्टर राज' खत्म होने से टैक्स कलेक्शन भी बढ़ेगा। एक बार आमदनी बढ़ने के बाद, पार्टी द्वारा किये गए हर वादे का फायदा जनता तक पहुंचाया जाएगा।

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