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अभिषेक बनर्जी टीएमसी छोड़कर क्या बीजेपी में शामिल होंगे? जानें वह क्या बोले
ममता बनर्जी की पार्टी में घमासान क्यों मचा है? ऐसा घमासान कि ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी को यह सफ़ाई देनी पड़ रही है कि वह बीजेपी में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा है कि वह टीएमसी के भीतर के 'गद्दारों' को बेनकाब करना जारी रखेंगे। तो सवाल है कि आख़िर ममता बनर्जी की पार्टी में ऐसा क्या हुआ है कि पार्टी में 'गद्दारी' की नौबत आन पड़ी? वह भी पश्चिम बंगाल में चुनाव से एक साल पहले।
अभिषेक बनर्जी कोलकाता में टीएमसी पार्टी के एक सम्मेलन में बोल रहे थे। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की ख़बरों का खंडन करते हुए कहा कि वह अपनी पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अपने दलबदल की अफवाह फैलाने वालों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।
अभिषेक ने कहा, 'जो लोग कह रहे हैं कि मैं बीजेपी में शामिल हो रहा हूं, वे झूठ फैला रहे हैं। जब तक आप सभी हमारे साथ हैं, हम भाजपा के चक्रव्यूह को ध्वस्त करते रहेंगे... पार्टी के बारे में बुरा बोलने वालों की पहचान हो चुकी है। मैं ही वह व्यक्ति हूं जिसने मुकुल रॉय और सुवेंदु अधिकारी जैसे लोगों की पहचान की, जो पार्टी के खिलाफ गए।'
उन्होंने कहा, 'जो लोग कह रहे हैं कि अभिषेक बनर्जी बीजेपी में जाएंगे, वे अफवाह फैला रहे हैं। मैं बेईमान नहीं हूं। भले ही मेरा गला काट दें मैं अपनी कटी हुई सांस की नली से ममता बनर्जी जिंदाबाद का नारा लगाता रहूंगा।'
अभिषेक ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ मतभेदों के दावों को खारिज करते हुए कहा, 'मैं टीएमसी का वफादार सिपाही हूं। मेरी नेता ममता बनर्जी हैं।'
उन्होंने कहा कि
“
मैं टीएमसी में गद्दारों को बेनकाब करना जारी रखूंगा, जैसा कि मैंने पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान किया था।
अभिषेक बनर्जी, टीएमसी नेता
अभिषेक बनर्जी का यह बयान तब आया है जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में टीएमसी में तनाव की ख़बरों के बीच यह कयास लगाया जाने लगा कि क्या उनकी पार्टी से दूरियाँ बढ़ रही हैं? क्या वह किसी पार्टी में स्विच कर सकते हैं? बता दें कि उनके ख़िलाफ़ केंद्रीय एजेंसियाँ पड़ी हुई हैं।
एक दिन पहले ही ख़बर आई थी कि शिक्षा भर्ती घोटाले में सीबीआई ने जो तीसरी चार्जशीट दाखिल की है उसमें अभिषेक बनर्जी का भी नाम है। चार्जशीट में कहा गया है कि एक आरोपी ने अभिषेक बनर्जी का नाम लिया है।
इस पर अभिषेक बनर्जी के कार्यालय ने बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि सीबीआई राजनीति से प्रेरित होकर काम कर रही है और उनकी छवि खराब करना चाहती है। अभिषेक के वकील ने कहा है कि ईडी इस मामले की जांच कर रही है और ईडी ने अभी तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है।
बता दें कि मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से लगातार रिपोर्टें आ रही हैं कि अभिषेक और ममता बनर्जी के बीच तनाव जारी है। क़रीब महीने भर पहले अभिषेक बनर्जी ने उन कलाकारों के बहिष्कार के मुद्दे पर पार्टी के कुछ नेताओं से असहमति जताई थी, जो कोलकाता के आरजी कर अस्पताल केस में टीएमसी सरकार की आलोचना कर रहे थे। तब ममता बनर्जी ने अपने भतीजे के क़रीबी माने जाने वाले मंत्रियों की आलोचना की थी।
हाल ही में ममता ने अभिषेक के 'वफादारों' की खिंचाई की थी। यहाँ तक कि उन्होंने मंत्रियों- ब्रत्य बसु और स्नेहाशीष चक्रवर्ती की आलोचना की थी। ये अभिषेक बनर्जी के खास माने जाते हैं।
स्कूलों में सेमेस्टर प्रणाली की शुरुआत पर सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी ने शिक्षा मंत्री बसु से पूछा, 'मुझे मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि प्राथमिक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली शुरू की जा रही है। मुझे और मुख्य सचिव को सूचित किए बिना ब्रत्य ने इस तरह का नीतिगत निर्णय कैसे लिया?' उन्होंने परिवहन विभाग की खिंचाई करते हुए कहा, 'क्या मंत्री या सचिव कभी सड़कों पर यह देखने के लिए जाते हैं कि आम लोगों को क्या हो रहा है?'
ऐसी ही तनातनी की ख़बरों के बीच अब अभिषेक बनर्जी के पार्टी बदलने को लेकर ख़बर चली। लेकिन फिलहाल अभिषेक ने इन ख़बरों को अफवाह क़रार दिया है और खुद को ममता का वफादार सिपाही बताया है। तो सवाल है कि जब सबकुछ इतना ठीक है तो फिर आख़िर दोनों नेताओं के बीच तनाव की ख़बरें क्यों आ रही हैं?