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उत्तरकाशी सुरंग हादसाः 11 वां दिन, बचाव कार्य जारी, पीएम मोदी ने फोन किया

उत्तरकाशी सुरंग हादसाः 11 वां दिन, बचाव कार्य जारी, पीएम मोदी ने फोन किया

उत्तर काशी की सुरंग में फंसे हुए 41 मजदूरों को बचाने का काम 11वें दिन भी जारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार सुबह उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से बात की। धामी ने पीएम को पिछले 24 घंटे में हुए काम की जानकारी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की और उत्तरकाशी सुरंग बचाव कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी ली। बुधवार को बचाव कार्य का 11वां दिन है। मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया कि उन्होंने पीएम मोदी को पिछले 24 घंटों में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी है। 

सुरंग में फंसे हुए मजदूरों को बचाने के लिए कई तरह से काम हो रहा है। सरकारी एजेंसियां ​​उन्हें गर्म खाना मुहैया कराकर जिंदा रखने की कोशिश कर रही हैं। मंगलवार रात को श्रमिकों को पुलाव और मटर पनीर उपलब्ध कराया गया। बुधवार की सुबह एक बड़ी सफलता मिली, जब लंबाई में ड्रिलिंग के लिए एक स्थान की पहचान की गई। सीमा सड़क संगठन ने सुरंग स्थल के पास सड़कें बनाईं, जिससे मंगलवार को फंसी मशीन को निकलने में मदद मिली।

राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम के निदेशक अंशू मनीष खुल्को ने बताया कि "वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए स्थान की पहचान कर ली गई है। सुरंग के ऊपर पहाड़ी पर वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए सड़क का काम लगभग पूरा हो चुका है। 350 मीटर से अधिक सड़क निर्माण का काम पूरा हो चुका है। बीआरओ सिल्क्यारा और बरकोट दोनों तरफ से सड़क बना रहा है। वो भी लगभग पूरा हो चुका है।"

सोमवार शाम को बचावकर्मियों ने फंसे हुए लोगों को खाना मुहैया कराने के लिए 6 इंच का पाइप बिछाया था लेकिन उन्हें केवल केले, संतरे और दवाइयां ही उपलब्ध कराई गईं। मोबाइल चार्जर भी पाइप के जरिए भेजे गए। उसी पाइप के जरिए मंगलवार रात को उन्हें वेज पुलाव, मटर-पनीर और मक्खन लगी चपातियां दी गईं।

सुरंग के ढहने के बाद पहली बार अंदर एक एंडोस्कोपी कैमरा भेजा गया। इससे अंदर के हालात पता चल रहे हैं। इसके जरिए फंसे हुए मजदूरों के परिवारों की उम्मीद भी बढ़ चली है।

एक अधिकारी ने कहा कि अगले 40 घंटों में अच्छी खबर मिलने की उम्मीद है क्योंकि बचाव कार्य जो पिछले 9 दिनों में सफल नहीं हो सका, उसमें अब लगातार सकारात्मक प्रगति शुरू हुई। टेलीस्कोपिंग तरीके से अब 900 मिमी के स्थान पर 800 मिमी व्यास वाले पाइप डाले जा रहे हैं।

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