इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) को रमजान महीने से पहले संभल के शाही जामा मस्जिद का दौरा करने को कहा। ताकि सफेदी और सफाई पर अदालत फैसला ले सके। हाईकोर्ट ने एएसआई को इस संबंध में शुक्रवार सुबह 10 बजे तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। हालांकि रमज़ान महीने की शुरुआत 1 मार्च से होने की उम्मीद है। यानी अगर अदालत शुक्रवार को जामा मस्जिद की सफाई-पुताई का निर्देश देती है तो मस्जिद कमेटी के पास एक दिन का ही समय होगा।
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने शाही जामा मस्जिद, संभल के प्रबंधन समिति द्वारा दायर अर्जी पर यह आदेश पारित किया। जिसमें मस्जिद की तैयारी संबंधी कार्यों पर विरोधी पक्ष की आपत्तियों को चुनौती दी गई थी।
अदालत ने गुरुवार 27 फरवरी का स्पष्ट आदेश में तीन सदस्यीय टीम को मस्जिद का दौरा करने, निरीक्षण करने और शुक्रवार सुबह 10 बजे तक कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा है कि "पक्षों के बीच समानता बनाए रखने के लिए...सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखा जाए।"
आदेश सुनाए जाने के बाद, एएसआई के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि एएसआई टीम के सदस्यों को सुरक्षा प्रदान की जाए। हालांकि, अदालत ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा- यह गैर जरूरी है।
- दूसरे पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने मस्जिद कमेटी की मांग का विरोध करते हुए कहा कि अगर इन्हें अनुमति दी गई तो कमेटी वहां उस बिल्डिंग में छेड़छाड़ कर सकते हैं। वकील जैन ने यह भी कहा कि अदालत उसे मस्जिद न कहे। अदालत ने उनकी आपत्ति के बाद निर्देश दिया कि फैसले में मस्जिद के साथ कथित शब्द और जोड़ा जाये।
यह आदेश अदालत ने राज्य सरकार, एएसआई के वकील और प्रबंधन समिति के वकील द्वारा पेश तर्कों पर विचार करने के बाद पारित किया। कोर्ट में, प्रबंधन समिति की ओर से वरिष्ठ वकील एसएफए नकवी ने तर्क दिया कि एएसआई सफेदी के कार्यों का अनावश्यक रूप से विरोध कर रहा है, जबकि यह एएसआई की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे कार्यों को करे। इसके जवाब में, एएसआई के वकील, अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह ने कहा कि समिति के अधिकारियों द्वारा एएसआई के अधिकारियों को मस्जिद परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।
आखिर सफाई-पुताई के लिए शाही जामा मस्जिद, संभल की कमेटी को इलाहाबाद हाईकोर्ट क्यों आना पड़ा। दरअसल, मस्जिद कमेटी ने सबसे पहले स्थानीय पुलिस से शाही मस्जिद की सफाई की अनुमति मांगी। लेकिन संभल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। मस्जिद कमेटी ने सबसे पहले जिले के आला अधिकारियों को अपने इरादे के बारे में सूचित किया था।
कमेटी ने कहा था कि शाही मस्जिद में सफेदी, सफाई, मरम्मत, कुछ क्षेत्रों को ढंकना और अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था करना है। ताकि रमज़ान में रोज़ा रखने वालों को कोई असुविधा न हो। कमेटी ने अधिकारियों से यह भी अनुरोध किया कि पारंपरिक अज़ान और मस्जिद के रखरखाव गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध न लगाया जाए।
11 फरवरी, 2025 के एक पत्र में, संभल के एएसपी ने कहा था कि मस्जिद एक संरक्षित स्मारक है। इसलिए किसी भी कार्य को करने से पहले प्रबंधन समिति को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से अनुमति लेनी होगी। इस पत्र और जवाब को चुनौती देते हुए, प्रबंधन समिति ने उच्च न्यायालय का रुख किया। कमेटी ने कहा कि यह सारा काम हर साल रमज़ान के शुरू होने से पहले कमेटी करती रही है। इस पर कभी जिले के अधिकारियों या एएसआई की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई।
मस्जिद कमेटी ने कोर्ट से कहा कि संभल के एएसपी का जवाब समिति के धार्मिक गतिविधियों को स्वतंत्र रूप से चलाने के अधिकार में अनुचित बाधा है। यह अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संरक्षित है। कमेटी ने अदालत से अधिकारियों को निर्देश देने की प्रार्थना की कि वे मस्जिद परिसर के भीतर अज़ान और प्रकाश व्यवस्था के कार्यों में हस्तक्षेप न करें।
संभल लंबे समय से विवाद के केंद्र में है। संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही मस्जिद के सर्वे को लेकर बवाल हुआ था। बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इसमें चार मुस्लिम युवकों की मौत हुई। कई घायल हुए हैं। हिंसक झड़प तब हुई जब एक सर्वे टीम मस्जिद का सर्वेक्षण करने पहुँची। एक शिकायत पर अदालत के आदेश के बाद टीम सर्वे करने पहुँची थी। शिकायत में दावा किया गया है कि संरचना मूल रूप से एक मंदिर थी। यह सारा मात्र एक दिन में हुआ। यानी जिस दिन स्थानीय कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया, उसी दिन सर्वे टीम मस्जिद जा पहुंची।
वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में दावा किया कि शाही मस्जिद के स्थान पर कभी हरिहर मंदिर नामक मंदिर हुआ करता था। मुगल सम्राट बाबर ने 1529 में इसे आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया था। बता दें कि विष्णु जैन और उनके पिता हरि शंकर जैन ने ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ विवाद समेत कई पूजा स्थलों से जुड़े मामलों में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है। देश के कई विपक्षी नेताओं ने संभल जाने की कोशिश की लेकिन यूपी सरकार ने उन्हें जाने नहीं दिया। सपा ने आरोप लगया कि संभल हिंसा के पीछे बीजेपी है।
संभल के सर्वे का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 29 नवंबर को संभल की शाही मस्जिद के सर्वे पर रोक लगा दी। संभल में शाही जामा मस्जिद की प्रबंधन समिति ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें मुगल-युग की मस्जिद के सर्वेक्षण की अनुमति दी गई है। अदालत ने देशभर में सभी मस्जिदों के सर्वे पर रोक लगाई थी।
(रिपोर्ट और संपादनः यूसुफ किरमानी)