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नागरिकता संशोधन: गुवाहाटी हिंसा में 2 की मौत, डिब्रूगढ़ में कर्फ़्यू में ढील

नागरिकता संशोधन: गुवाहाटी हिंसा में 2 की मौत, डिब्रूगढ़ में कर्फ़्यू में ढील

नागरिकता संशोधन विधेयक के ख़िलाफ़ पूरा असम जल रहा है, पूरे राज्य में ज़ोरदार आन्दोलन चल रहा है। गुवाहाटी में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में दो आन्दोलनकारी मारे गए हैं। 

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन के दौरान गुरुवार को गुवाहाटी में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में दो लोगों की मौत के बाद तनाव बढ़ गया है। गुवाहाटी में कर्फ़्यू जारी है। इंटरनेट पर लगी पाबंदी जारी रहेगी। दूसरी ओर, शुक्रवार को डिब्रूगढ़ में सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक कर्फ़्यू में ढील दी गई है। इस बीच ख़बर है कि किसान नेता अखिल गोगोई को जोरहाट से गिरफ़्तार किया गया है। 

गुरुवार की शाम गुवाहाटी के लाचित नगर में आंदोलनकारियों पर सुरक्षाकर्मियों ने गोलियाँ बरसाईं, जिसमें एक युवक मारा गया। मारे गए युवक का नाम दीपांजल दास है। युवक सैनिक भवन के कैंटीन में काम करता था। इसके अलावा और दूसरी जगह पर हुई फायरिंग में भी एक व्यक्ति की मौत हो गई है।

गुवाहाटी में कर्फ़्यू के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह टायर जलाकर यातायात बाधित किया है। बीजेपी विधायकों पर पत्थर फेंके गए हैं। चबुवा के विधायक विनोद हजारिका के घर में आग लगा दी गई। कई जगहों पर बीजेपी और आरएसएस कार्यालयों पर हमले किए गए हैं।

पुलिस आयुक्त का तबादला

गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त दीपक कुमार का तबादला कर उनके स्थान पर मुन्ना प्रसाद गुप्ता को लाया गया है। वहीं तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को गुवाहाटी के तीन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था संभालने का जिम्मा सौंपा है। इसके बाद भी स्थिति नहीं संभल रही है।

कर्फ्यू के बाद भी आंदोलनकारी जगह-जगह जमा हो रहे हैं। अखिल असम छात्र संघ (आसू) के आह्वान पर लगभग एक हजार लोग लताशील खेल मैदान में जुटे। विधेयक के ख़िलाफ़ हुंकार भरी। आसू ने शुक्रवार को 10 घंटे के अनशन का एलान किया है।

मुख्यमंत्री ने की अपील

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया है इसलिए वह राज्य का अहित नहीं होने देंगे। वहीं स्थिति को देखते हुए संयुक्त कमान की एक बैठक आयोजित की गई। इसमें राज्य में क़ानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सेना को पूरी तरह उतारने का फ़ैसला किया गया।

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